अपारभूमिविस्तारमगण्यजनसंकुलम्।
राष्ट्र संघटनाहीनं प्रभवेन्नात्मरक्षणे॥
भावार्थ :
अपार भूमि विस्तार वाला, जिसमें असंख्य जनसंख्या हो, संघटन रहित वह राष्ट्र भी अपनी रक्षा करने में समर्थ नहीं होता।
आज के लिए प्रासंगिकता :
वैचारिक एवं रणनीतिक: संगठनात्मक शक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एकजुटता (Social Cohesion), संप्रभुता
समकालीन संदर्भ: जनसांख्यिकी (Demographics), वैश्विक चुनौतियाँ, आंतरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकीकरण।
आज के समय में प्रासंगिकता (Relevance for Today)
यह श्लोक आज के आधुनिक वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है, जो स्पष्ट करता है कि केवल विशाल भू-भाग (Territory) और बड़ी जनसंख्या (Population) ही किसी देश की शक्ति की गारंटी नहीं होते:
आंतरिक एकजुटता और सुरक्षा: यदि कोई राष्ट्र विशाल और अधिक आबादी वाला होने के बावजूद आंतरिक रूप से विभाजित, जाति-धर्म के आधार पर बंटा हुआ या दिशाहीन (संगठन-हीन) है, तो वह बाहरी और आंतरिक खतरों के सामने कमज़ोर सिद्ध होता है।
जनसंख्या लाभांश (Demographic Dividend) का सही उपयोग: भारत वर्तमान में विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। यदि यह विशाल जनशक्ति सुसंगठित, अनुशासित और ‘राष्ट्रीय हित’ के साझा उद्देश्य से नहीं जुड़ी है, तो यह शक्ति बनने के बजाय एक चुनौती बन सकती है।
वैश्विक और हाइब्रिड खतरों का सामना: आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि सूचना युद्ध (Information Warfare), साइबर हमले और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने के रूप में लड़े जाते हैं। ऐसे में नागरिकों का संगठित और जागरूक होना ही राष्ट्र रक्षा का असली आधार बनता है।

















