मुंबई के बांद्रा स्थित मशहूर गैटी गैलेक्सी थिएटर अचानक बंद हो गया। मामला तब सुर्खियों में आया जब मीडिया में यह रिपोर्ट चली कि हनुमान अंश फिल्म को इस थियेटर ने उतार दिया है। इसकी जगह ईसाई मिशनरी को कार्यक्रम करने की अनुमति दी गई। विश्व हिंदू परिषद के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। लेकिन पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि थियेटर क्यों बंद किया गया। थिएटर की बाहर नोटिस चिपकाए गए हैं, जिनमें लाइसेंस रिन्यू नहीं होने के कारण शो बंद किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, प्रबंधन का कहना है कि थिएटर के अंदर कुछ केबल जल गई थीं, जिसके कारण उसे बंद किया गया है। बांद्रा पुलिस ने थिएटर के मालिक, मैनेजर और सिनेमा चलाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
‘थिएटर का लाइसेंस वर्ष 2021 से रिन्यू नहीं हुआ’
पुलिस के मुताबिक, थिएटर का लाइसेंस वर्ष 2021 से रिन्यू नहीं हुआ था। नियमों का पालन नहीं होने के कारण थिएटर प्रबंधन को शो रोकने और इसे बंद करने का निर्देश दिया गया। थिएटर के मालिक, मैनेजर और सिनेमा संचालन करने वाली कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि लाइसेंस का नवीनीकरण होने के बाद थिएटर को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है। दूसरी ओर, प्रबंधन ने बंद होने की अलग वजह बताई है। थिएटर के कार्यकारी निदेशक मनोज देसाई के नाम से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में दावा किया गया कि थिएटर लाइसेंस संबंधी कारणों से नहीं, बल्कि तकनीकी खराबी के कारण बंद हुआ है। पोस्ट के मुताबिक, थिएटर के अंदर कुछ केबल जल गई थीं। इन्हें बदलने के लिए दक्षिण मुंबई के लोहार चॉल से नई केबल मंगाई गई है। प्रबंधन का दावा है कि तकनीकी समस्या दूर होने के बाद थिएटर में दोबारा शो शुरू कर दिए जाएंगे।
1972 को थिएटर ने दर्शकों के लिए अपने दरवाजे खोले
24 नवंबर 1972 को आइकॉनिक गैटी गैलेक्सी थिएटर ने दर्शकों के लिए अपने दरवाजे खोले थे। दशकों से फिल्म प्रेमियों के बीच इसकी खास पहचान बनी हुई है। कई फिल्मी सितारे भी यहां दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने पहुंच चुके हैं। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और हुमा कुरैशी के यहां पहुंचने की खबरें सामने आती रही हैं। किसी फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया का अंदाजा लगाने के लिए भी गैटी गैलेक्सी की भीड़ को अक्सर चर्चा में रखा जाता है।
उपहार सिनेमाघर अग्निकांड की यादें ताजा हुईं
थियेटर के सेफ्टी गाइडलाइंस से समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि देश ने इससे जुड़ी त्रासदी भी देखी है। 13 जून 1997 को दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में ‘बॉर्डर’ फिल्म का शो चल रहा था। इसी दौरान सिनेमाघर के ट्रांसफॉर्मर कक्ष में आग लगी, जो तेजी से अन्य हिस्सों में फैल गई। इस हादसे में 59 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। उपहार अग्निकांड के बाद यह सवाल लगातार उठता रहा है कि सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजी औपचारिकता बनकर क्यों रह जाता है? किसी सिनेमाघर में एक साथ बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद होते हैं। ऐसे में बिजली की खराबी, आग या निकासी व्यवस्था में कमी जैसी छोटी-सी चूक भी बड़ी घटना का कारण बन सकती है।
गैटी गैलेक्सी मामले में लाइसेंस और तकनीकी खराबी को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों के बीच सबसे जरूरी सवाल यही है कि थिएटर की केबल और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच कब और कितनी प्रभावी तरीके से हुई थी। यदि लाइसेंस वर्षों से रिन्यू नहीं हुआ था तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अगर तकनीकी खराबी के कारण शो रोके गए थे तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरम्मत के बाद सभी सुरक्षा मानकों की ठीक से जांच हो।
















