
प्रतीकात्मक तस्वीर
ब्रिटेन में लगातार ही शरणार्थियों को लेकर आम लोगों का विरोध बढ़ता जा रहा है और उनका कहना है कि शरणार्थी और अवैध अप्रवासी देश के लिए और उनके लिए सुरक्षा खतरा बन रहे हैं। अपराध बढ़ रहे हैं और उनका घरों से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है। मगर फिर भी सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। अब जो नई रिपोर्ट आई है, उसमें बताया गया है कि कैसे ब्रिटेन में एक बार अवैध रूप से आ जाने के बाद वहीं पर टिके रहने के लिए क्या-क्या बहाने बनाते हैं, क्या – क्या झूठ बोलते हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी मुल्कों में समलैंगिक होना अपराध है और इसके लिए सजा का प्रावधान है, इसलिए इन मुल्कों के आदमी यह बहाना सबसे ज्यादा बनाते हैं। डेली मेल के अनुसार, कई पाकिस्तानी आदमी भी यही कहते हैं कि वे घर इसलिए नहीं जा सकते क्योंकि वे उस आदमी के साथ संबंध में हैं, जो इस आशय का दावा पेश कर रहा है।
पिछले साल बंद हुए लंदन गे सौना लेग्स 800 क्लब में खींची हुई फोटो इस बात का सबूत देती हैं कि जो भी ये आदमी बोल रहे हैं, वह सब सच है। इस क्लब की तस्वीरों में अधनंगे आदमी खड़े दिखाई देते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार काफी संख्या में बांग्लादेशी आदमी भी यही दावा करते हैं। मगर बांग्लादेशी यह भी दावा करते हैं कि उन्हें राजनीतिक कारणों से भी शरण दी जाए।
वहीं कुछ लोग ऐसे रहे, जिन्होनें यह दावा किया कि उस पार्टी के सदस्य हैं, जो अभी सत्ता से बेदखल हो गए हैं, मगर वे लोग यह बता नहीं पाए कि आखिर कौन सी पार्टी पर प्रतिबंध है और वे अपनी पार्टी के बारे में भी कुछ न बता सके। बीबीसी ने इसी वर्ष अप्रेल में इसी मामले को लेकर एक पड़ताल की थी। उस पड़ताल में शरण चाहने वालों का एक सुसंगठित नेटवर्क मिला था, जिसमें वह अप्रावसियों को यह प्रशिक्षित करने के लिए पैसे ले रहे रहे थे कि कैसे वे लोग अपना आवेदन सफल रूप से बनाएं।
उन्हें तरीके और कवर लेटर बताए जाते थे कि कैसे इन्हें प्रयोग करना है। और कैसे झूठे सबूत लगाने हैं, जैसे कि किसी गे क्लब की तस्वीरें आदि।
द टाइम्स के हवाले से Sundayguardian ने लिखा है कि होम ऑफिस के एक कर्मचारी ने बताया कि केवल 100 में से शरण का केवल एक ही दावा सही होता है। उसने “पैकेज दावों” का उल्लेख किया। अब यह पैकेज दावे क्या होते हैं?
पैकेज दावों का अर्थ हुआ कि कोई भी स्थिति हो, दो तीन दावे जरूर ही किए जाएंगे। जैसे कि हजारों ईराकी कुर्द लोगों के आवेदनों में से यह अलग से दावा किया गया है कि ईराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रधानमंत्री की बेटी से उनके संबंध हैं, इस्ले उनकी जान को खतरा है। और उन्हें ब्रिटेन में शरण दी जाए।
उसने कहा कि उसे हंसी आती है कि कैसे एक ही दावे को कई लोग प्रयोग कर रहे हैं।
जो आज ब्रिटेन के होम ऑफिसर का अधिकारी दावा कर रहा है, लगभग वही दावे बीबीसी ने अप्रेल में अपनी रिपोर्ट में किए थे कि कैसे ब्रिटेन में शरण के लिए लोग झूठ का सहारा ले रहे हैं। हालांकि यह दावा नहीं किया जा सकता कि 100 में से केवल एक ही दावा सच है।
फिर भी बीबीसी की रिपोर्ट में रिपोर्टर्स ने खुद ही अन्डरकवर पड़ताल की थी। उसमें पाया था कि कैसे अप्रवासी जिनका वीजा खत्म होने वाला होता है, उन्हें झूठी कहानियाँ दी जाती हैं, जिन्हें सुनाकर वे शरण पा सकते हैं। उन्हें बताया जाता है कि कैसे सबूत बनाने हैं, और कैसे और कहाँ से फ़ोटो लेनी है और साथ ही मेडिकल रिपोर्ट्स क्या लगानी है।
फिर वे यह दावा करते हुए शरण मांगते हैं कि वे समलैंगिक हैं, और उन्हें डर है कि अगर वे अपने मुल्क (पाकिस्तान या बांग्लादेश) जाएंगे तो उन्हें जान से हाथ धोना पड़ेगा। बीबीसी की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि यूके में जो यह व्यवस्था है, कि जिसके अंतर्गत देश में उन लोगों को शरण दी जाती है, जो किसी दंड या शोषण के चलते अपने मुल्क न जा पाएं, जैसे कि पाकिस्तान और बांग्लादेश, जहां पर समलैंगिक होने के कारण लोगों को जान से हाथ धोना पड़ सकता है।
इस कानून का जमकर लाभ उन लोगों द्वारा उठाया जाता है, जो ब्रिटेन में किसी न किसी कारण रहना चाहते हैं। ये लोग वे होते हैं, जो या तो विद्यार्थी होते हैं, काम करने आते हैं, वीजा खत्म होने वाला होता है। बीबीसी के अनुसार कुल शरणार्थी दावों में यह समूह 39% है, जो वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा रहा था। बीबीसी के पत्रकारों ने पड़ताल की थी, उसमें एक लॉ फर्म ने झूठे शरणार्थी दावे के ले 7000 यूरो मांगे थे और यह भरोसा दिया था कि होम ऑफिस से इनकार की संभावना बहुत कम है।
इन दावों में झूठा एचआईवी का दावा होता है। बीबीसी के एक अन्डरकवर रिपोर्टर को यहाँ तक कहा गया था कि वह पाकिस्तान से अपनी बीवी को ला सकता है और फिर वह भी यह दावा कर सकती है कि वह लेसबियन है।
बीबीसी का अन्डर कवर रिपोर्टर एक ऐसी बैठक में पहुंचा था, जिसे एक एलजीबीटी समूह ने इस कारण आयोजित कराया था कि वह एलजीबीटी समूह के लोगों के लिए शरण को सुनिश्चित कर सके। मगर वहाँ पर आने वाले लोगों ने अन्डरकवर रिपोर्टर को बताया कि जो भी लोग आए थे, उनमें से कोई भी समलैंगिक नहीं था।
एक व्यक्ति जीशान ने तो यहाँ तक कहा कि “यहाँ पर कोई भी समलैंगिक नहीं है। 1% तो क्या 0.01% भी समलैंगिक नहीं है।“
अन्डर कवर पत्रकार को वीजा लेने के लिए एक मार्ग बताया गया था और वह था, “मानवाधिकार और यह गे केस या सेम सेक्स” मामला कहलाता है।
अन्डर कवर रिपोर्टर से कहा गया कि “गे का पता करने के लिए कोई जांच नहीं होती है,” बस आदमी को कहना होता है।
इसमें इस पूरी प्रक्रिया को बताया गया था कि कैसे इस झूठे दावे पर यूके में आसानी से शरण मिल सकती है।
बीबीसी की अप्रेल की रिपोर्ट और अभी द टाइम्स में होम ऑफिस के एक कर्मचारी का यह दावा कि 100 में से एक ही दावा सच होता है, उस गुस्से को सही ठहराते प्रतीत होते हैं, जो ब्रिटेन के आम लोगों में इन आप्रवासियों के प्रति भर रहा है।