नई दिल्ली/उज्जैन: उज्जैन के अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक जारी सड़क चौड़ीकरण की जद में आए अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हो पा रही है। प्रशासन कई दिनों से प्रतिमा को हटाने के लिए चार बार प्रयास कर चुका है। मंदिर भवन के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है लेकिन प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है।
हनुमान मंदिर और प्रतिमा के विस्थापन को लेकर मंदिर के बाहर मंगलवार को साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साधु-संतों का कहना है कि जब भगवान हनुमान स्वयं वहां से हटना नहीं चाहते हैं तो प्रशासन हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने का प्रयास क्यों कर रहा है? हनुमानजी की प्रतिमा को न हटा पाने को साधु-संत किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और क्यों सुर्खियों में बना हुआ है।
क्या है यह पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी भरा पोस्टर भी लगाया है। जिसमें लिखा है कि हनुमान जी की प्रतिमा हटाने के दौरान यदि किसी भी तरह से प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। वहीं, प्रशासन की योजना है कि हनुमानजी की प्रतिम को सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित किया जाए। श्रद्धालु और लोग नहीं चाहते कि प्रतिमा अपनी जगह से हटे। प्रतिमा की गहराई जानने के लिए करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है। नगर निगम और जिला प्रशासन अब इसे लेकर विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला कर रहा है। आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। जिसके बाद प्रतिमा हटाने की अगली तकनीक तय की जाएगी।
हनुमानजी की प्रतिम को बताया जा रहा है परमार काल की शिल्पकला
बता दें कि हनुमान जी की प्रतिमा हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से तैयार की गई है जो परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है। दरअसल हनुमानजी की इस प्रतिमा को यहां लॉकिंग सिस्टम से स्थापित किया गया है। जिस कारण नगर निगम से इसे इतने दिनों से हटा नहीं पाया।
क्यों हटाई जा रही है प्रतिमा?
स्थानीय लोग इसे ऐतिहासिक मंदिर बता रहे हैं। इस मंदिर और प्रतिमा को यहां से सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के चलते हटाया जा रहा है। यहां मंदिर कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण किया जाना है। जिसकी जद में यह प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर भी आ रहा है। स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। साधु-संतों और हिंदूवादी संगठन भी यहां से मंदिर और प्रतिमा हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त तरह से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी हनुमानजी की प्रतिम को हटाए जाने को लेकर विरोध हो रहा है।

















