केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले झारखंड दौरे पर रांची आए हुए थे। मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने की मांग करने वाले आंदोलन चल रहे हैं। लेकिन अगर जाति व्यवस्था खत्म हो जाए, तो हम भी आरक्षण छोड़ने को तैयार हैं। SC-ST के लिए आरक्षण का प्रावधान बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने दिया था। यह 1950 में संसद से पास हुए संविधान में शामिल है।
SC-ST और OBC की आबादी और आरक्षण
अठावले ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में SC-ST की आबादी करीब 25 प्रतिशत और OBC की 52 प्रतिशत है। इस तरह कुल मिलाकर इनकी आबादी लगभग 77 प्रतिशत हो जाती है। इन्हें 49.5 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। बाकी जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए, जिनकी सालाना आमदनी 8 लाख रुपये से कम है, केंद्र सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आरक्षण व्यवस्था खत्म करने की मांग सही नहीं लगती। अगर आरक्षण खत्म करना है तो जाति व्यवस्था भी खत्म करनी होगी। अठावले ने आगे कहा कि आज भी SC वर्ग के लोगों को सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। सरकारी नौकरियों में प्रमोशन और दूसरी सुविधाओं से भी वे अक्सर वंचित रह जाते हैं। सरकारी उपक्रमों में आरक्षण जारी रहे, इसके लिए सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत बनी रहनी चाहिए। निजीकरण से इसमें दिक्कत आ सकती है।
जातिगत जनगणना पर राहुल गांधी को जवाब
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस बार सरकार जाति आधारित जनगणना कराने का फैसला कर चुकी है। इस पर राहुल गांधी श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। अठावले ने पूछा कि अगर उनकी मंशा सही थी तो 2011 में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के समय जाति आधारित जनगणना क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि इस बार की जनगणना से SC, ST, OBC, सामान्य वर्ग और सभी धर्मों के लोगों की सही जानकारी मिल जाएगी।
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हेमंत सरकार पर टिप्पणी
अठावले ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड बनाने में शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वे शुरू से सक्रिय थे। हेमंत सोरेन भी जब मुख्यमंत्री बने तो सक्रिय दिखे, लेकिन बाद में दलित और आदिवासी समुदायों को जो न्याय मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल रहा है।
छात्र आंदोलन पर बात
छात्र आंदोलन को सही बताते हुए अठावले ने कहा कि सरकार को पहले छात्रों से बात करनी चाहिए थी। बात नहीं हुई और उन पर लाठीचार्ज हुआ। बाद में 2014 से हुई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया। छात्रों की मांग जायज थी क्योंकि परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई और पारदर्शिता नहीं रही। लेकिन जो लोग सालों से नौकरी कर रहे हैं, उनके साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि नई नीति बनाकर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिया जाए। केंद्र सरकार ने देशभर में 10 लाख युवाओं को नौकरी देने का काम किया था। राज्य सरकार को भी भारत सरकार का सहयोग लेकर ज्यादा उद्योग लगाने चाहिए।

















