पाञ्चजन्य के सुशासन संवाद ‘ओडिशा की उड़ान 2.0’ संवाद में वरिष्ठ पत्रकार तृप्ति श्रीवास्तव ने महिला सोलो ट्रैवलर कायनात काजी और लेखक राहुल नील से यात्राओं और उनकी चुनौतियों को लेकर चर्चा की। इस मौके पर कायनात ने कहा कि ये देश बहुत ही अद्भुत देश है। अगर आप भारत को देखना चाहते हैं तो इसके लिए पूरा जीवन भी कम है।
भारत जैसे देश में फीमेल सोलो ट्रैवलर बनना कितना चैलेंजिंग है?
कायनात- आपने ट्रैवलर के नाम जब भी सुना होगा तो उसमें अधिकतर पुरुष रहे होंगे। ह्वेनसांग, फाह्यान, इब्न बतूता, अल्बनीज। लेकिन इस कतार में शायद किसी महिला का नाम आता हो। जब मैं छोटी थी तो सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में लोगों की तस्वीर देखती थी, तो लगता था कि ये कितने अद्भत लोग होंगे, जो अपने देश से निकलकर अनजान देशों की यात्रा करते हैं और उसके बारे में लिखते हैं। मुझे भी इसका शौक लगा और वहीं से इस यात्रा की शुरुआत हो गई। जब आप अपने देश को किताबों से इतर देखने के लिए निकलते हैं तो आपको अहसास होता है कि ये कितना अद्भुत देश है और पूरा जीवन कम है भारत को देखने के लिए। इन्हीं यात्राओं ने सशक्त बनाया।
आपने कहां से कहां तक की यात्रा की?
मैंने लगभग पूरे भारत की यात्रा कर ली है। लद्दाख से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से अरुणाचल तक। मेरी ये यात्रा केवल शहरों तक सीमित नहीं रही वरन ये यात्रा आत्मा को आत्मा से जोड़ने की रही है, जो कि गांवों में पाई जाती है। जब हम छोटे थे, तो किताबों के माध्यम से सब कुछ देखा था। फिर यात्राएं शुरू की तो देखा कि कल्पनाएं हकीकत से अधिक खूबसूरत नहीं होती।
राहुल नील आपने भारत को देखा और लिखा। जब घूम कर देखते हैं और उसे लिखते हैं तो क्या दोनों में अंतर होता है?
राहुल नील-2021 में हमने पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की। जहां हमने नागालैंड और मणिपुर की सीमा पर स्थित जुहॉय वैली की ट्रैकिंग की। लेकिन, मैं आज तक उस यात्रा वृतांत को लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। क्योंकि, मुझे ऐसा लगता है कि मैं कितना भी लिखूंगा, वो उस यात्रा के साथ न्याय नहीं होगा। इस देश में असंख्य स्थान हैं, जो इतने अतुलनीय हैं कि उनका वर्णन संभव ही नहीं है।
जब आप एक लेखक के तौर पर कहीं जाते हैं तो क्या चीज आपको सबसे पहले प्रभावित करती है?
जब यात्राएं शुरू की थी तो लिखनी है, इसलिए शुरू नहीं की थी। केवल यात्रा करने के लिए यात्राएं की थी। मुझे लगता है कि जिस लम्हे में आप यात्राएं कर रहे हैं, उसे जीना बहुत जरूरी है। बजाय इसके कि उसे कैमरे में उतारने की कोशिश करें। अपनी आंखों को संग्रहालय बनाना सीखिए आपकी यात्राएं सफल होंगी।
एक बार कश्मीर में यात्रा करने के दौरान ट्रक ड्राइवर से जम्मू जाने के लिए लिफ्ट मांगी और मुझे लिफ्ट मिली। उस घटना के तीन साल बाद उसने मुझे अपनी बहन की शादी की कार्ड मुझे दिल्ली भेजा। य़े भारत है!
वायरल कंटेंट और वास्तविकता जो ट्रैवल व्लॉग की होती है, उसमें आप क्या अंतर देखती हैं?
वायरल क्यों होना है? प्रसिद्धि के लिए या पैसे के लिए! पैसा क्यों चाहिए? मन की शांति और सुख के लिए। यात्रा से वो मुझे पहले ही मिल चुका है। जरूरत ही नहीं है। मैं ब्यूटी पार्लर नहीं जाती, क्योंकि यात्राओं ने मुझे ये सिखा दिया है कि मुझे किसी को प्रभावित नहीं करना है। जब मैं घर से निकलती हूं तो प्रकृति की हवा मुझे ये अहसास दिलाती है कि मैं जिंदा हूं। मैंने यात्रा से पाया है कि देश के हर कोने में एक मित्र है। मैंने अपनी हर यात्रा में एक वाक्य को परखा है-संकल्प से सिद्धि।















