Odisha's Udaan 2.0:‘डरेंगे तो फंसेंगे, लालच करेंगे तो लुटेंगे’, साइबर एक्सपर्ट अमित जी ने बताया फ्रॉड से बचने का मंत्र
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Odisha’s Udaan 2.0:‘डरेंगे तो फंसेंगे, लालच करेंगे तो लुटेंगे’, साइबर एक्सपर्ट अमित जी ने बताया फ्रॉड से बचने का मंत्र

हममें से बहुत से लोग किसी न किसी रूप में साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। किसी के पैसे चले गए, किसी का फेसबुक, इंस्टाग्राम या ट्विटर अकाउंट हैक हो गया, तो किसी का फोन चोरी हो गया। साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Sep 3, 2026, 06:16 pm IST
inओडिशा
श्री अमित दुबे जी (साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ)

श्री अमित दुबे जी (साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ)

‘पाञ्चजन्य’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘सुशासन संवाद-ओडिशा की उड़ान 2.0’ में देश, समाज, संस्कृति और सुशासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ। इसी क्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़े एक विशेष सत्र में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ श्री अमित दुबे जी ने वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी के साथ संवाद किया। इस दौरान साइबर फ्रॉड के बदलते तरीकों, डिजिटल अरेस्ट, UPI और बैंकिंग सुरक्षा, निजी डेटा की गोपनीयता तथा सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि साइबर अपराधियों से बचने के लिए हर नए फ्रॉड के तरीके को याद रखना जरूरी नहीं, बल्कि डर और लालच के संकेतों को पहचानना और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत रुककर सोच लेना सबसे जरूरी है।

सवाल: आज के समय में साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आपने साइबर अपराध के कई तरीके उजागर किए हैं। आम लोगों को सबसे पहले क्या समझना चाहिए?

जवाब:  हममें से बहुत से लोग किसी न किसी रूप में साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। किसी के पैसे चले गए, किसी का फेसबुक, इंस्टाग्राम या ट्विटर अकाउंट हैक हो गया, तो किसी का फोन चोरी हो गया। साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी का फोन चोरी हो जाए और उसके पास मौजूद सिम कार्ड को किसी दूसरे फोन में डाल दिया जाए, तो कुछ सेवाओं के जरिए लेन-देन की कोशिश की जा सकती है। ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है- UPI PIN। इसलिए फोन चोरी होने की स्थिति में केवल फोन को लॉक करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तुरंत सिम और बैंकिंग सेवाओं को भी सुरक्षित करना जरूरी है।

सवाल: क्या सिर्फ सिम कार्ड के जरिए किसी के UPI तक पहुंच बनाई जा सकती है?

जवाब: साइबर अपराधी कई तरीकों से लोगों के बैंकिंग सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। कुछ मामलों में वे ऐसे USSD विकल्पों का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं, जिनके जरिए मोबाइल इंटरनेट के बिना भी बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखिए, UPI PIN किसी को बताना या अनजान व्यक्ति के कहने पर उसे रीसेट करना बेहद खतरनाक है। फोन या सिम चोरी होने पर तुरंत बैंक और टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करना चाहिए। साइबर अपराध के तरीके लगातार बदल रहे हैं। जो तरीका आज इस्तेमाल हो रहा है, जरूरी नहीं कि कल भी वही तरीका इस्तेमाल हो।

सवाल: आपने साइबर अपराध के कई तरीके बताए हैं। क्या आपको लगता है कि आम आदमी के लिए हर नए फ्रॉड के तरीके को जान पाना संभव है?

जवाब: नहीं। हर नए फ्रॉड के तरीके को याद रखना संभव नहीं है। इसलिए आपको हर तकनीकी तरीके की जानकारी रखने के बजाय एक बेसिक इंस्टिंक्ट विकसित करनी होगी। साइबर अपराध का नया तरीका चाहे कोई भी हो, उसके पीछे अक्सर दो चीजों में से एक होती है- डर या लालच। आपको डराया जाएगा या आपको कुछ पाने का लालच दिया जाएगा।

सवाल: डर और लालच के जरिए लोगों को किस तरह फंसाया जाता है?

जवाब: अपराध की प्रवृत्ति को देखें तो इंसान की कमजोरियों का फायदा उठाना कोई नई बात नहीं है। आज साइबर अपराधी उसी कमजोरी को तकनीक के साथ जोड़ रहे हैं। आपको फोन आएगा और कहा जाएगा कि आपके नाम कोई पार्सल आया है। कहीं कहा जाएगा कि आपको कोई गिफ्ट मिलने वाला है। कभी लॉटरी का लालच दिया जाएगा तो कभी सरकारी अधिकारी बनकर डराया जाएगा। आपसे कहा जाएगा कि कोई खास कोड डायल कर दीजिए, कोई लिंक खोल दीजिए या कोई एप्लिकेशन इंस्टॉल कर लीजिए। यहीं से खतरा शुरू होता है। इसलिए जिंदगी में एक बात गांठ बांध लीजिए- इस दुनिया में कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता। जब कोई व्यक्ति आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के कुछ देने का दावा करे, तो सबसे पहले सवाल पूछिए कि वह ऐसा क्यों कर रहा है

डिजिटल अरेस्ट के मामलों में भी लोगों को इसी तरह डराया जाता है। डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर व्यक्ति को डराते हैं। पीड़ित को कहा जाता है कि उसके नाम से कोई अपराध हुआ है, उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग हुआ है या उसके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है। इसके बाद उसे वीडियो कॉल पर रहने, पैसे ट्रांसफर करने या बैंक संबंधी जानकारी देने के लिए मजबूर किया जाता है। यह पूरा खेल डर पैदा करने पर आधारित होता है। अगर कोई व्यक्ति फोन पर आपको धमकाकर पैसे मांग रहा है या वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रहने के लिए कह रहा है, तो यह गंभीर खतरे का संकेत है।

सवाल: कई बार साइबर अपराधियों के पास हमारी निजी जानकारी भी होती है। इससे लोग और ज्यादा भरोसा कर लेते हैं। इससे कैसे बचें?

जवाब: यही सबसे बड़ा भ्रम है। अपराधी अगर आपके बारे में कुछ निजी जानकारी बता दे तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह कोई वास्तविक अधिकारी है। आज हम अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बहुत सारी जानकारी साझा करते हैं। हमारी खरीदारी, यात्रा, लोकेशन, सोशल मीडिया गतिविधियां और दूसरी डिजिटल गतिविधियों से कई तरह के डेटा पॉइंट तैयार होते हैं। मान लीजिए कोई व्यक्ति आपको फोन करके कहता है- “आपने कुछ दिन पहले फलां जगह से पिज्जा मंगाया था, उसका बिल इतना था और डिलीवरी आपके घर हुई थी।”

आप सोचेंगे कि इसे इतनी जानकारी कैसे पता? लेकिन अगर आपको यह समझ है कि डिजिटल दुनिया में आपकी बहुत सारी गतिविधियां रिकॉर्ड होती हैं, तो आप तुरंत सतर्क हो जाएंगे। जानकारी का किसी सिस्टम में होना अपने आप में सबसे बड़ा खतरा नहीं है; खतरा तब बढ़ता है जब आपको यह पता ही न हो कि आपका डेटा कहां और किस रूप में इस्तेमाल हो रहा है।

सवाल: क्या इसका मतलब यह है कि हमें सोशल मीडिया और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए?

जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं यह नहीं कहता कि फेसबुक इस्तेमाल करना बंद कर दीजिए, गूगल इस्तेमाल करना बंद कर दीजिए या डिजिटल दुनिया से बाहर हो जाइए। आपको डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करना है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि वे आपसे कौन-सा डेटा मांग रही हैं और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है। अपने फोन में मौजूद एप्लिकेशन की परमिशन और डेटा-सेफ्टी जानकारी जरूर देखिए। आपको यह पता होना चाहिए कि कौन-सा एप्लिकेशन आपकी कौन-सी जानकारी तक पहुंच मांग रहा है। जानकारी होना ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। अगर आपको पता है कि आपका डेटा कहां जा रहा है, तो आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं। लेकिन अगर आपको पता ही नहीं है कि आपके बारे में डिजिटल दुनिया में क्या-क्या उपलब्ध है, तो आप आसानी से किसी के झांसे में आ सकते हैं।

सवाल: क्या सिर्फ महंगा फोन या आईफोन इस्तेमाल करने से साइबर फ्रॉड से सुरक्षा मिल सकती है?

जवाब: नहीं। आपके हाथ में कौन-सा फोन है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं। साइबर अपराधी आपके डिवाइस को हैक करके ही हमेशा आप तक नहीं पहुंचते। कई बार वे आपको मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करके आपके डिवाइस तक पहुंच हासिल करते हैं। इसलिए फोन की कीमत या ब्रांड आपकी सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

सवाल: आपने कहा कि साइबर अपराधी हमें डराते या लालच देते हैं। आम आदमी को ऐसे मामलों में सबसे पहला कदम क्या उठाना चाहिए?

जवाब: सबसे पहला कदम है- रुकना। कोई फोन आए और सामने वाला आपको तुरंत निर्णय लेने के लिए मजबूर करे, तो तुरंत निर्णय मत लीजिए। अगर कोई कहता है कि आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है, पुलिस का केस हो गया है, डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है, आपको लॉटरी लगी है या कोई गिफ्ट मिला है- तो पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि कीजिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई लिंक न खोलें, कोई एप्लिकेशन इंस्टॉल न करें, कोई गोपनीय जानकारी साझा न करें और कोई PIN या OTP न बताएं।

सवाल: साइबर फ्रॉड में पैसा चले जाने के बाद लोगों को लगता है कि अब वह कभी वापस नहीं आएगा। क्या यह धारणा सही है?

जवाब: यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। पैसे की डिजिटल ट्रेल कई मामलों में मौजूद रहती है। बैंकिंग सिस्टम में लेन-देन की जानकारी रिकॉर्ड होती है और सही समय पर शिकायत करने से पैसे को ट्रेस या फ्रीज कराने की संभावना बन सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में पैसा वापस आ जाएगा। जितनी जल्दी शिकायत की जाए, उतनी ही बेहतर संभावना होती है कि कार्रवाई की जा सके। इसलिए अगर आपके साथ साइबर फ्रॉड हुआ है तो चुप न बैठें और तुरंत आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन/पोर्टल और अपने बैंक को सूचित करें।

सवाल: साइबर अपराध से बचने के लिए आपकी नजर में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र क्या है?

जवाब: मेरा सबसे बड़ा मंत्र है- जागरूक रहिए, डरिए मत। आपको डिजिटल दुनिया छोड़नी नहीं है। आपको यह समझना है कि डिजिटल दुनिया कैसे काम करती है। अगर कोई आपको डराता है, रुकिए। अगर कोई आपको अचानक लालच देता है, रुकिए। अगर कोई आपसे गोपनीय जानकारी मांगता है, रुकिए। अगर कोई आपको तुरंत कोई कार्रवाई करने के लिए मजबूर करता है, रुकिए। याद रखिए- साइबर अपराधी हमेशा आपकी तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाते, वे आपकी मानवीय कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। डर, लालच, जल्दबाजी और भरोसा- इन्हीं के जरिए वे अपना जाल बिछाते हैं। इसलिए डिजिटल युग में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच कोई महंगा फोन नहीं, बल्कि सही जानकारी, सतर्कता और सोच-समझकर लिया गया निर्णय है।

Topics: ओडिशा की उड़ान 2.0साइबर एक्सपर्ट अमित दुबेसाइबर फ्रॉड से कैसे बचेंOdisha's Udaan 2.0#panchjanyaसुशासन संवादCyber Fraud
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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