क्या कभी भी समावेशीकरण के नाम पर मस्जिदों में ईसाइयों के वस्त्रों को लेकर फैशन शो हो सकते हैं? क्या कभी इसके नाम पर मस्जिदों में चर्च की प्रेयर हो सकती है? अगर नहीं तो फिर लंदन के चर्च में रविवार 12 सितंबर को मॉडेस्ट फैशन शो में बुर्के और नकाब वाली पोशाकों का फैशन शो क्यों हुआ? यह प्रश्न इन दिनों सोशल मीडिया पर ईसाई पूछ रहे हैं? आखिर चर्च की ऐसी क्या विवशता रही कि उसने यह कदम उठाया?
लंदन के हाइड पार्क में सेंट जॉन्स चर्च ने “मॉडेस्ट फैशन वीक” का आयोजन कराया। इसमें जो मॉडल थीं, वे मॉडेस्ट यानी ऐसी पोशाकों में थीं, जिनमें कम से कम त्वचा दिखती है और जो इस्लामिक मूल्यों के हिसाब से डिजाइन की जाती हैं। जो तस्वीरें आ रही हैं, उनमें दिख रहा है कि कैसे चर्च परिसर में नकाब और हिजाब पहने मॉडल ने पोशाकों के साथ रैम्प पर वॉक किया।
मीडिया के अनुसार इस आयोजन के मुख्य प्रायोजकों में से एक ब्रिटिश मुस्लिम मैगजीन थी, जिसने पहले भी इस्लामिक मूल्यों का समर्थन करते हुए लेख प्रकाशित किये हैं। इनमें यह शामिल है कि एक शौहर घर का मुखिया होता है और महिलाओं को केवल घर के कार्यों तक ही सीमित रहना चाहिए। सेंट जॉन्स चर्च में मॉडेस्ट फैशन वीक का आयोजन करने वाले आयोजक चाहते हैं कि वे डिजाइनर्स, ब्रांड्स और व्यापारियों को साथ लाएं और मॉडेस्ट फैशन का नेटवर्क बनाएं।
सोशल मीडिया पर मचा हंगामा
इस फैशन वीक के वीडियो सामने आते ही हंगामा मच गया है। SubversiveForce ने इसका वीडियो साझा करते हुए लिखा कि पिछले शनिवार चर्च ऑफ इंग्लैंड के लिए और भी शर्म की बात। सेंट जॉन्स चर्च, हाइड पार्क, लंदन ने “माडेस्ट फैशन वीक” का आयोजन कराया, जिसमें हिजाब और नकाब पहले महिलाएं परेड कर रही थीं। ब्रिटेन की कोई भी मस्जिद ऐसे ईवेंट नहीं कर सकती है।
More embarrassment for the Church of England last Saturday.
St John’s Church, Hyde Park, London, hosting ‘Modest Fashion Week’, with parades of hijab- and niqab-wearing women.
No mosque in Britain would ever host the equivalent event. pic.twitter.com/Jkw48LlboC
— Subversive Force (@SubversiveForce) September 19, 2026
लोगों ने आयोजकों पर भी प्रश्न उठाए कि यह समझा जा सकता है कि वे लोग कहीं भी यह फैशन शो कर सकते थे, मगर उन्होनें केवल चर्च ही चुना, क्योंकि इसके पीछे मंशा जीत की हो सकती है।
एक यूजर ने इस्लामिक मुल्क कतर का अपना अनुभव साझा करते हुए एक्स पर लिखा कि ‘विश्वास नहीं होता’। उन्होंने लिखा कि जब वे कतर में थे, तो उन्हें अपने क्राफ्ट स्टॉल पर क्रिसमस ट्री की एक छोटी सी तस्वीर लगाने की भी अनुमति नहीं थी। जब उन्होंने ऐसा किया, तो एक सिक्योरिटी गार्ड ने आकर कहा था कि वे ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि यह मुसलमानों के लिए “अफेन्सिव” है। उन्हें धमकी दी गई कि अगर वे उसे तत्काल नहीं हटाते हैं, तो उनके स्टॉल को बंद कर दिया जाएगा और उनके क्राफ्ट वर्क को तोड़ दिया जाएगा। दोहा में कोई भी चर्च नहीं है।
Unbelievable!
When I lived in Qatar I wasn't even allowed to have a button-art picture of a Christmas tree on my craft stall.
The security guard came and told me to remove the picture because people had complained that it was "offensive to Muslims".
He said that if I didn't… https://t.co/EeqRzH3Ho3
— Dr P. Accurate sex-recognition is a human right (@Psychgirl211) September 20, 2026
लोगों का प्रश्न यह भी था कि यह मॉडेस्ट फैशन वीक में मॉडिस्टी का निर्धारण कौन करता है? क्या यह कुछ पुरुषों का महिलाओं को दबाने का ही एक नया रूप नहीं है? क्या यह महिला विरोधी एजेंडा नहीं है कि माडिस्टी के नाम पर नकाब और हिजाब वाली ड्रेस फैशन शो में हैं?
एक यूजर ने यह भी लिखा कि ऐसा लग रहा है कि चर्च ऑफ इंग्लैंड को अब इस्लाम ही संचालित कर रहा है। पहले अल कायदा की प्रशंसा करने वाले मुसलमान को अवार्ड दिया और अब यह? लोगों का यह भी कहना था कि यदि मॉडेस्ट फैशन वीक में मॉडिस्टी दिखानी ही थी, तो फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया कि सभी धर्मों के अनुसार मॉडिस्टी दिखाई जाती। मॉडिस्टी के बहाने इस्लामीकरण को धीरे-धीरे सामान्य क्यों बनाया जा रहा है? उसे क्यों ग्लैमराइज़ किया जा रहा है और अब यह सब केवल ब्रिटेन की सड़कों पर ही नहीं बल्कि चर्च तक में है? आखिर क्यों?
वहीं, कुछ लोगों ने ईरान और अफगानिस्तान में मुसलमान महिलाओं की स्थिति को लेकर भी प्रश्न किये और पूछा कि मॉडेस्ट फैशन वीक मनाने के बहाने कहीं उन महिलाओं के घावों पर तो नमक नहीं छिड़का जा रहा है?
घटना के समय पर भी सवाल
यह घटना 9 सितंबर 2011 के हमले की बरसी के कुछ ही दिन बात लंदन में हुई है। लोग इसकी टाइमिंग पर भी प्रश्न उठा रहे हैं। हालांकि पश्चिम में मॉडेस्ट फैशन वीक पहली घटना नहीं है। हाल ही में पेरिस में भी मॉडेस्ट फैशन वीक हुआ था, जिसमें हिजाब पहने मॉडल ने रैम्प पर वॉक की थी। हालांकि वह चर्च में नहीं हुआ था, मगर आलोचना हुई थी।
ईरान और अफगानिस्तान की महिलाओं की पीड़ा
मॉडेस्ट फैशन शो के आलोचकों का तर्क यह होता है कि जहां ईरान में महिलाएं अनिवार्य हिजाब के कानून के चलते अपनी आजादी और अपनी जान से हाथ धो रही हैं, तो वहीं पश्चिमी देशों में हिजाब या नकाब को एक फैशन के रूप में दिखाना उन महिलाओं के दर्द और संघर्ष को कम करना है। ऐसे फैशन शो दमन के प्रतीकों को प्रगतिशील फैशन के रूप में बढ़ा रहे हैं और यह उन महिलाओं के प्रति असंवेदनशील कदम है, जो इस पोशाक से मुक्ति चाहती हैं।











