कांग्रेस ने एक बार फिर भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम पर सवाल उठाए हैं। इस बार बहाना बनाया ऑपरेशन सिंदूर और राम मंदिर को। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर संदेह जताया। अल्वी ने कहा कि आखिर एक सेवानिवृत्त एयर मार्शल को राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा कोई ऐसा सच है, जिसे छिपाने के लिए यह नियुक्ति की गई है? भाजपा ने कांग्रेस पर भारतीय सेना का अपमान करने का आरोप लगाते हुए पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय सेना का अपमान करना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुकी है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता ने कहा, “भाजपा की मौजूदा सरकार सुप्रीम कोर्ट के जज में से किसी को राज्यपाल बना रही है तो किसी को राज्यसभा का सदस्य बना रही है। ये लोगों के दिमाग में शक पैदा करती है। अब सेवानिवृत्त एयर मार्शल को आपने राम मंदिर के ट्रस्ट का सीईओ बना दिया है। उनका इससे क्या लेना देना है? मुझे लगता है कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई सच तो नहीं छिपा है जिसकी वजह से उन्हें यहां सीईओ बनाया गया।”
राशिद अल्वी ने दावा करते हुए कहा आगे कहा, ”भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री की नीति देश को बर्बाद कर देगी। अभी तक राम मंदिर के अंदर जिन लोगों ने डकैती डाली थी, उनके न नाम पता चलें और न ही सभी को गिरफ्तार किया गया है।” राहुल गांधी ने गलवान घाटी में सेना के शौर्य पर सवाल उठाए थे। सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सवाल उठाए गए थे।
भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “कांग्रेस बाबरी की पैरोकार है। सेनाध्यक्ष को गुंडा बताएंगे, सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगेंगे और पूर्व एयर मार्शल के राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सीईओ बनाए जाने पर भी सवाल जताएंगे।” राकेश त्रिपाठी ने दावा किया कि कांग्रेस की इस मानसिकता और लगातार उठाए जा रहे निराधार सवालों का जवाब आने वाले चुनावों में देश की जनता जरूर देगी।
जाने, कौन हैं सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों में रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह वायुसेना की पश्चिमी कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाक अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के दौरान पश्चिमी वायु कमान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके पास थी। वह 30 अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। मिश्रा का सैन्य करियर लंबा और उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान भी अहम जिम्मेदारियां निभाई और कई सम्मान प्राप्त किए। इसके अलावा उन्होंने 38 वर्षों से अधिक के अपने करियर में महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ नियुक्तियां भी संभाली हैं। ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका के लिए जितेंद्र मिश्रा को वर्ष 2025 में सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
5,585 आवेदनों के बाद हुआ चयन
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी को शायद यह भी पता नहीं कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने सीईओ के चयन के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई थी। इस पद के लिए उन्हें 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें से 16 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इसके बाद सर्च कमेटी ने तीन उम्मीदवारों के नाम की लिस्ट ट्रस्ट के सामने रखी थी। अंततः दो सितंबर को इस पद के लिए जितेंद्र मिश्रा को नियुक्त किया गया। मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से आते हैं।

















