केरलम् की यूडीएफ सरकार ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ एफआईआर से पहले प्रारंभिक जांच का फैसला किया है। पिनराई को कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से कथित तौर पर 3.28 करोड़ रुपये मासिक भुगतान के रूप में मिलने और मोहम्मद रियास पर हवाला लेन-देन में शामिल होने का आरोप है।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने राज्य पुलिस प्रमुख रवाड़ा चंद्रशेखर को निर्देश दिए हैं। क्राइम ब्रांच के एडीजीपी एच. वेंकटेश की निगरानी में विशेष जांच दल गठित की जाएगी, जिसमें आर्थिक अपराध शाखा को भी शामिल किया जा सकता है। यह फैसला प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) की 7 सितंबर की रिपोर्ट और महाधिवक्ता के. जाजू बाबू व अभियोजन निदेशक टी. असफ अली की राय के बाद हुआ। राय के अनुसार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 और 13(1)(बी) के तहत मामला बन सकता है। प्रारंभिक जांच में साक्ष्य मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार ने जांच एक महीने के भीतर पूरी करने को कहा है।
क्या है मामला?
सीएमआरएल-एक्जालॉजिक प्रकरण 2019 की आयकर तलाशी से शुरू हुआ और अब रिश्वत व भ्रष्टाचार की जांच तक पहुंच गया है। विवाद सीएमआरएल और पिनराई विजयन की बेटी टी. वीणा की बंद हो चुकी कंपनी एक्जालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए भुगतानों से जुड़ा है। 25 जनवरी 2019 को आयकर विभाग ने सीएमआरएल के कार्यालय, फैक्ट्री और प्रमुख अधिकारियों के परिसरों पर तलाशी ली। जांच में 2012-13 से 2018-19 के दौरान ₹135.54 करोड़ के फर्जी खर्च सामने आए।
सीएमआरएल ने सेटलमेंट प्रक्रिया में ₹134.27 करोड़ के बढ़े हुए खर्च स्वीकार किए, जिनमें से ₹73.38 करोड़ को व्यावसायिक खर्च मानने और ₹57.78 करोड़ को अतिरिक्त आय के रूप में पेश करने का आग्रह किया। 12 जून 2023 के सेटलमेंट आदेश ने खर्च बढ़ाने, नकद भुगतान के लिए राशि पैदा करने और वीणा-एक्जालॉजिक को ₹1.72 करोड़ के बिना सेवा वाले भुगतान संबंधी आयकर विभाग के निष्कर्षों को बरकरार रखा।
मार्च 2024 में ईसीआईआर दर्ज होने के बाद ईडी ने भुगतान और मनी ट्रेल की जांच शुरू की। ईडी ने ₹3.28 करोड़ को अवैध पारिश्रमिक के रूप में देखा। ₹2.78 करोड़ वीणा-एक्जालॉजिक से जुड़े भुगतान और ₹50 लाख के अलग लेन-देन का भी उल्लेख जांच में है। आरोप है कि ये भुगतान वास्तविक सेवाओं के बदले नहीं, बल्कि पिनराई विजयन तक अवैध भुगतान पहुंचाने की व्यवस्था का हिस्सा थे। सीएमआरएल के पूर्व सीएफओ पी. सुरेशकुमार ने जांचकर्ताओं को बताया कि वीणा को भुगतान इसलिए किया गया, क्योंकि उनका संबंध पिनराई से था।
5 जून 2026 को केरलम उच्च न्यायालय ने सीएमआरएल की ईडी की पीएमएलए जांच रद्द करने की मांग खारिज कर दी और जांच जारी रखने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि निर्धारित अपराध से संबंधित एफआईआर न होने से ईडी की पीएमएलए के तहत जांच और पूछताछ की कार्रवाई स्वतः बाधित नहीं होती। सितंबर 2026 में ईडी ने पिनराई विजयन, वीणा और मोहम्मद रियास समेत अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस को रिपोर्ट भेजी। तब महाधिवक्ता से राय मांगी गई। मामले का एक अन्य विवादित पहलू सीएमआरएल अधिकारियों के बयान हैं। दो अधिकारी ने ईडी को दिए पुराने बयान से मुकर गए हैं और दबाव में बयान देने की बात कही है।
‘रेड बुक’ या डायरी के सुराग
ईडी ने हवाला और विदेशी लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की। सितंबर 2026 में उसने राज्य के पुलिस प्रमुख को विस्तृत पत्र सौंपा, जिसमें जुलाई 2024 से जुलाई 2025 के बीच हवाला और विदेशी मुद्रा लेन-देन के आरोप हैं। ईडी के अनुसार, दुबई में वी.पी. फैयाज को ₹85 लाख स्थानांतरित किए गए, जिनमें से ₹3.49 लाख प्राप्त किए गए। उसने वीणा की 2024 में हुई चार दुबई यात्राओं पर भी सवाल उठाए। ईडी ने डीजीपी से भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत अलग मामला दर्ज करने की मांग की, क्योंकि उसके अनुसार मूल अपराध की जांच राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आती है।
इस मामले को संवेदनशील बनाने वाले सीएमआरएल से जुड़े पुराने दस्तावेज और डायरी नोट्स हैं। 2023 के आयकर रिकॉर्ड में पीवी, ओसी, आरसी, केके व आईके जैसे संक्षिप्त नाम सामने आए, जिन्हें तत्कालीन सीएफओ के बयान के आधार पर क्रमशः पिनराई विजयन, ओमन चांडी, रमेश चेन्निथला, पी.के. कुंजालिकुट्टी और वी.के. इब्राहिम कुंजू से जोड़ा गया। पिनराई का कहना है कि उनकी बेटी की कंपनी को सीएमआरएल से मिला भुगतान अवैध नहीं था।
राजनीतिक विवाद भी कम नहीं
रियास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया और वह मामले का कानूनी सामना करेंगे। सीपीएम लगातार इस मामले की जांच का विरोध करती रही है। उसका आरोप है कि ईडी बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के हाथों में एक औजार है। भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने सरकार पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि मामले में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन कह चुके हैं कि सरकार ईडी की रिपोर्ट की जांच करेगी। इसमें कोई राजनीति नहीं है। राज्य के मंत्री के. मुरलीधरन ने भी कहा है कि राज्य सरकार पुलिस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी। पुलिस कानून के अनुसार स्वतंत्र कार्रवाई कर सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि 27 मई, 2026 को जब ईडी अधिकारी तिरुवनंतपुरम में पिनराई विजयन के आवास पर छापेमारी के बाद लौट रहे थे तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन पर हिंसक हमला किया था। रिपोर्टों के अनुसार, ईडी अधिकारियों की गाड़ियों में तोड़फोड़ भी
की गई। बहरहाल, सीएमआरएल-एक्जालॉजिक प्रकरण में असली सवाल अब यह नहीं है कि राजनीतिक आरोप कौन लगा रहा है। सवाल यह है कि पैसों का स्रोत क्या था? भुगतान किसके लिए था? उसके बदले क्या मिला और क्या उपलब्ध साक्ष्य अदालत में उन आरोपों को साबित कर सकते हैं? यही वे सवाल हैं जिनका जवाब आने वाले दिनों में केरलम की राजनीति ही नहीं, बल्कि जांच की विश्वसनीयता भी तय करेगा।

















