नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और इसके बाद बने हालात में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर अब तक 810 लोगों की मौत की खबर है। इनमें नेपाल के 794 और तिब्बत के 16 लोग शामिल हैं। वहीं दोनों देशों में 3,048 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार सामने आ रहे इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस प्राकृतिक आपदा ने कितनी बड़ी तबाही मचाई है। नेपाल में बाढ़ का असर कई इलाकों में देखने को मिला है। तेज बारिश और बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों से दूर हो गए हैं। कई लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। राहत और बचाव टीमों की ओर से लापता लोगों को खोजने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
ताजा जानकारी के अनुसार नेपाल ने 2,502 लापता लोगों की सूची जारी की है। वहीं तिब्बत की ओर से 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। दोनों देशों के आंकड़ों को मिलाने पर लापता लोगों की संख्या 3,048 पहुंच जाती है। नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। जारी जानकारी के मुताबिक करीब 592 विदेशी नागरिक अभी तक लापता बताए जा रहे हैं। इससे उन परिवारों की चिंता और बढ़ गई है, जिनके अपने लोग नेपाल घूमने या किसी दूसरे काम से गए थे और अब उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया
इस आपदा के बीच भारत के लिए भी राहत की खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार शाम करीब 5:30 बजे जानकारी दी कि नेपाल में फंसे 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इससे पहले शनिवार रात जारी लापता लोगों की सूची में 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा भारतीय मूल के 128 लोगों से भी संपर्क नहीं हो पाने की बात कही गई थी। ऐसे में 149 भारतीयों का सुरक्षित बचाया जाना उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नेपाल में बाढ़ के बाद हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन और राहत दल प्रभावित इलाकों में लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटे हैं। लापता लोगों की तलाश भी लगातार जारी है। वहीं भारत सरकार भी नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर रख रही है। जिन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। नेपाल में आई इस बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदा कितनी तेजी से बड़े स्तर पर जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को सुरक्षित ढूंढने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाने की है।
















