'राष्ट्र सिर्फ भौगोलिक टुकड़े नहीं, ब्रह्मांड का फर्ज है'-मैडिसन स्क्वायर में बोले सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत
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‘राष्ट्र सिर्फ भौगोलिक टुकड़े नहीं, ब्रह्मांड का फर्ज है’-मैडिसन स्क्वायर में बोले सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत

आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन में कहा कि राष्ट्र सिर्फ भौगोलिक टुकड़े नहीं। भारत का मिशन वसुधैव कुटुंबकम है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 30, 2026, 06:50 am IST
inविश्व
श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सिर्फ भौगोलिक टुकड़े नहीं होते। ब्रह्मांड के हिसाब से हर राष्ट्र का कोई फर्ज होता है।

स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि हर राष्ट्र को कोई संदेश देना होता है, कोई मिशन पूरा करना होता है और कोई किस्मत पूरी करनी होती है। वे नागपुर से आकर इस खुशी और भावना में शामिल हुए थे।

उन्होंने दो तरह की सोच बताई। एक सोच है – जीओ और जीने दो। दूसरी सोच है – जीओ और सिर्फ उन्हें जीने दो जो हमारी बात मानें। जो सिर्फ आज्ञा मानने वालों की रक्षा करते हैं, उन्हें उन्होंने राक्षस कहा। दूसरी तरफ वे लोग हैं जो कहते हैं कि चाहे कोई माने या न माने, सुने या न सुने, क्या सोचता है या कितना फायदेमंद है – ये छोटी बातें हैं। मुख्य बात ये है कि हम सब इंसान हैं। जिंदगी चलानी है तो भाईचारे से रहना होगा।

आत्मा और एकता की बात

डॉ. भागवत ने कहा कि आत्मा ही वो सच्चाई है जो हम सबको जोड़ती है। शरीर, कपड़े, बोलने का तरीका अलग-अलग होने के बावजूद हम सब एक माला के मोतियों जैसे हैं, जिन्हें एक धागा जोड़ता है। शरीर मर जाता है, लेकिन कुछ स्थायी रहता है। कुछ लोग मानते हैं कि वह न्याय के दिन तक रहता है, कुछ मानते हैं कि जन्म-मरण के कई चक्रों से गुजरता है। लेकिन वह नष्ट नहीं होता। इसलिए जब हम जी रहे होते हैं तो अलग-अलग चीजें दिखती हैं, लेकिन हम एक-दूसरे में रहते हैं और एक-दूसरे के होते हैं।

भारत का मिशन

उन्होंने बताया कि इंसान की जिंदगी इसी ज्ञान को सबको देने और खुद जीने के लिए मिली है – अपनी मुक्ति और दुनिया की भलाई के लिए। यही भारत को पूरा करना है। भारतीयों को दुनिया भर में ये संदेश उपदेश से नहीं, बल्कि खुद के आचरण से देना है। यही भारत की किस्मत है।

धर्म क्या है

धर्म वो सिद्धांत है जो सबको जोड़ता है, सबको संभालता है, फूट नहीं डालता, सबका संतुलन रखता है और बीच का रास्ता है। भारत का काम दुनिया को ये देना है। इसकी मजबूत नींव है अस्तित्व की एकता। धर्म कोई मजहब या पूजा-पाठ नहीं है। ये उससे ऊपर है। ये वो नियम है जिससे ब्रह्मांड चलता है, जिससे इंसान जिंदगी की उलझनों को संभाल सकता है। ये वो संतुलन है जिससे सब एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

कर्तव्य और प्रवासी भारतीयों से बात

आजकल फादर्स डे, मदर्स डे मनाते हैं क्योंकि हमें उनके प्रति अपना फर्ज याद आता है। पर्यावरण के प्रति भी फर्ज याद रखना चाहिए। अमेरिका में बसे भारतीयों से उन्होंने कहा कि पहले अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहो। उसके बाद अगर जन्मभूमि के लिए कुछ करने का मन हो तो भारत से मिले मूल्यों के साथ रहो।

उन्होंने कहा कि हम सब किसी न किसी के कर्जदार हैं। खाने से पहले खेती होनी चाहिए। किसान खेती बंद कर दें तो क्या खाएंगे? कपड़े मिलों, मजदूरों और कपास उगाने वालों की वजह से मिलते हैं। इसलिए वापस देना भी जरूरी है।

39 राज्यों के 6000 से ज्यादा लोग आए

इस कार्यक्रम में 39 अमेरिकी राज्यों के 853 शहरों से 6,000 से ज्यादा लोग आए। इसमें 250 छात्र और 250 संगठन शामिल थे। कुछ आंकड़ों में 85 शहरों और करीब 200 संगठनों का जिक्र भी है। संघ शताब्दी वर्ष के दौरान यह कार्यक्रम हुआ। 135 हिंदू-अमेरिकी संगठनों का समर्थन मिला। आयोजक एहेड फोरम थे। थीम थी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है।

Topics: वसुधैव कुटुंबकमयूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशनमोहन भागवत न्यूयॉर्क भाषणमोहन भागवतराष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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