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Explainer: नेपाल का सैलाब को देखते हुए भारत को अलर्ट रहने की क्यों जरूरत है?

नेपाल में GLOF की घटना से हिमालयी क्षेत्रों में खतरा बढ़ा। जानें हिमालय में कितनी ग्लेशियल झीलें हैं, सिक्किम की पुरानी घटना, विशेषज्ञों की राय और भारत सरकार के जोखिम कम करने के उपाय।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 29, 2026, 01:00 pm IST
inविश्व

नेपाल में ग्लेशियर झील फटने की घटना से भारत में चिंता बढ़ी है। बुधवार को वहां ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की वजह से अचानक बाढ़ आई। इस घटना ने हिमालयी इलाकों में मौजूद खतरनाक ग्लेशियल झीलों की ओर फिर ध्यान खींचा है।

हिमालय में कितनी ग्लेशियल झीलें हैं

सरकारी सर्वेक्षणों के मुताबिक हिमालयी रेंज में कुल करीब 7500 ग्लेशियल झीलें हैं। इनमें से लगभग 200 ऐसी हैं जिनसे भविष्य में खतरा हो सकता है। सिक्किम में अकेले 10 प्रतिशत झीलें हैं और वहां की 25 झीलों को बेहद खतरनाक माना गया है। एक अध्ययन में बताया गया है कि इन झीलों में से करीब 4700 गंगा नदी बेसिन में आती हैं। इनका कैचमेंट एरिया ढाई लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है। अगर इनमें से किसी एक झील का प्राकृतिक बांध टूट जाए तो निचले इलाकों में बड़ी बाढ़ आ सकती है।

सिक्किम की पुरानी घटना याद दिलाती है खतरा

भारत को इससे पहले भी GLOF का सामना करना पड़ा है। 3 अक्टूबर 2023 की आधी रात को सिक्किम की साउथ ल्होनक झील में ग्लेशियल चट्टानों का करीब 14.7 मिलियन क्यूबिक मीटर हिस्सा अचानक ढह गया था। इससे झील से 20 मीटर ऊंची लहर उठी थी। इस लहर ने कई पनबिजली परियोजनाओं और बस्तियों को नुकसान पहुंचाया था।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA के सदस्य कृष्णा वत्सा का कहना है कि नेपाल की यह घटना हिमालयी आपदाओं के एक नए पहलू को दिखाती है। ऐसे खतरे अक्सर चेन रिएक्शन की तरह होते हैं। बर्फ या चट्टान गिरने से मलबा बहता है, अस्थायी झील बन जाती है और फिर वह फटकर बाढ़ का रूप ले लेती है। यह सब इतनी तेजी से होता है कि नीचे रहने वाले लोगों को चेतावनी देने का वक्त बहुत कम मिल पाता है।

NDMA के पूर्व सदस्य सैयद सफी अहसान रिजवी के अनुसार, भारत के नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम ने खतरे वाली 195 झीलों की पहचान की है। उन्होंने आकलन, निगरानी, शुरुआती चेतावनी, खतरा कम करने और सामुदायिक जागरूकता को प्राथमिकता बताई है।

इसे भी पढ़ें: LoC पर 3 पाकिस्तानी ड्रोन ने की घुसपैठ, सेना ने ऐसे किया नाकाम

सरकार ने क्या कदम उठाए हैं

सिक्किम की आपदा के बाद केंद्र सरकार ने GLOF के खतरों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समन्वय समिति बनाई थी। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा कर रहे हैं। इसका मकसद संवेदनशील झीलों का सर्वेक्षण करना और ज्यादा जोखिम वाली झीलों की पहचान करना है।

सरकार ने हिमालय के चार राज्यों के लिए नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के तहत 150 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं। नवंबर 2024 में हुई बैठक में आकलन, निगरानी और जोखिम कम करने के उपायों पर सहमति बनी थी। इससे पहले कई एजेंसियों ने मिलकर ए-कैटेगरी की झीलों का आकलन करने के लिए संयुक्त अभियान चलाए। इनमें एनडीएमए, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, सी-डैक, आईटीबीपी और सेना के वैज्ञानिक व अधिकारी शामिल रहे।

Topics: GLOFग्लेशियल झील फटनाहिमालय ग्लेशियल झीलेंसिक्किम साउथ ल्होनक झीलनेपाल बाढ़
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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