स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी समारोह 21 अगस्त से, शिक्षा- जनजातीय कल्याण व सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर
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स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी समारोह 21 अगस्त से, शिक्षा- जनजातीय कल्याण व सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी के अवसर पर वर्षभर चलने वाले समारोहों का शुभारंभ 21 अगस्त 2026 को तालचेर के गुरुजंगा में होगा।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Aug 20, 2026, 04:59 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी के अवसर पर वर्षभर चलने वाले समारोहों का शुभारंभ 21 अगस्त 2026 को तालचेर के गुरुजंगा में होगा। जन्म शताब्दी समारोह नवंबर 2027 तक जारी रहेंगे। इस दौरान ओडिशा के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, ओडिशा में करीब 25,000 स्थानों पर शताब्दी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके अलावा हरिद्वार, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता सहित प्रमुख शहरों में भी बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बुधवार को भुवनेश्वर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जन्म शताब्दी समारोह समिति, ओडिशा के अध्यक्ष स्वामी जीवनमुक्तानंदपुरी और संयोजक बिनय कुमार भूयाँ ने समारोहों की विस्तृत रूपरेखा जारी की। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन, सामाजिक कार्यों और आदर्शों को स्मरण करने के साथ-साथ शिक्षा, समाजसेवा, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने का अवसर होगा।

21 अगस्त को गुरुजंगा में भव्य शुभारंभ
शताब्दी समारोह का उद्घाटन 21 अगस्त, श्रावण शुक्ल नवमी के अवसर पर तालचेर के गुरुजंगा में होगा। दिनभर चलने वाले कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7 बजे कलश यात्रा से होगी। इसके बाद सुबह 8.30 बजे गो पूजा और 9 बजे यज्ञ का शुभारंभ होगा। सुबह 10 बजे नगर परिक्रमा और 11 बजे धार्मिक सभा आयोजित की जाएगी।

दोपहर करीब 1 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। दोपहर 3 बजे शताब्दी समारोह से जुड़े कार्यकर्ताओं की बैठक होगी। शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें भजन, संगीत, नृत्य, पाला तथा संतों के प्रवचन प्रमुख आकर्षण होंगे। गांव के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के साथ स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन, कार्य और विचारों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उद्घाटन समारोह में कई संतों और प्रमुख व्यक्तित्वों के शामिल होने की संभावना है। इनमें ब्रह्मानंद सरस्वती, सच्चिदानंद महाराज, शिवदास बाबा, स्मृति सागर महाराज, जीवन चैतन्य महाराज, सच्चिदानंद दास महाराज, बाबाजी विश्वनाथ दास, श्रद्धानंद सरस्वती और अविनाश बाबा सहित अन्य संत शामिल हैं। आरएसएस के क्षेत्र कार्यवाह दुर्गा प्रसाद साहू सहित ओडिशा के कई प्रमुख लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

नवंबर 2027 तक चलेगा कार्यक्रम
समिति ने अगस्त 2026 से नवंबर 2027 तक के लिए कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की है। 23 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक गांवों और शहरी क्षेत्रों में श्रद्धांजलि एवं स्मृति सभाओं का आयोजन किया जाएगा। अक्टूबर में चकापद में संस्कृत सम्मेलन और जलेसपेटा में महिला सम्मेलन प्रस्तावित है। नवंबर 2026 में ओडिशा के संबलपुर, बरहामपुर और भुवनेश्वर में तीन बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसी दौरान हरिद्वार, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

जनवरी से अप्रैल 2027 के बीच संतों द्वारा गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता एवं संपर्क यात्राएं निकाली जाएंगी। अप्रैल और मई 2027 में ब्लॉक एवं शहर स्तर पर बड़े सम्मेलनों का आयोजन प्रस्तावित है। शताब्दी समारोह 2027 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की पुण्यतिथि और जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के साथ आगे भी जारी रहेंगे।

शिक्षा और जनजातीय कल्याण पर विशेष जोर
समिति के अध्यक्ष स्वामी जीवनमुक्तानंदपुरी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का योगदान केवल आध्यात्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने विशेष रूप से कंधमाल जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, कृषि और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम किया।
समिति के अनुसार, स्वामी लक्ष्मणानंद ने ऐसे समुदायों के बीच शिक्षा का प्रसार करने के लिए संस्थानों की स्थापना और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया, जहां औपचारिक शिक्षा तक पहुंच सीमित थी। उनके प्रयासों से कंधमाल में दो संस्कृत विद्यालय और दो कॉलेज तथा तुलसीपुर में एक हाई स्कूल की स्थापना से उनका संबंध बताया जाता है।

आयोजकों ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में भी उनके योगदान का उल्लेख किया। उनके अनुसार, उन्होंने कंधमाल में रात्रि विद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया तथा योग और शारीरिक व्यायाम को सामुदायिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण विकास में योगदान
समिति ने बताया कि स्वामी लक्ष्मणानंद ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी पहल की। कंधमाल के कटिंगिया में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र तथा रायगड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना से उनके जुड़ाव का उल्लेख किया गया। ग्रामीण और जनजातीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने कृषि और पशुपालन को भी प्रोत्साहित किया। आयोजकों के अनुसार, उन्होंने जैविक खेती तथा गोपालन के प्रति लोगों को जागरूक किया और इन क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन देने का प्रयास किया।
सिंचाई के लिए कुछ क्षेत्रों में छोटे चेक डैम बनाए गए तथा कटिंगिया में कृषि सहकारी समिति की स्थापना को भी उनके प्रयासों से जोड़ा गया है।

पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों पर जोर
समिति के अनुसार, स्वामी लक्ष्मणानंद ने वन संरक्षण के लिए गांव स्तर पर समितियों के गठन को प्रोत्साहित किया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की। उन्होंने प्लास्टिक के कम उपयोग तथा घर-घर तुलसी के पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने पर भी जोर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में कीर्तन मंडलियों, भागवत टुंगियों और अन्य सांस्कृतिक एवं धार्मिक मंचों के गठन को भी उनके सामाजिक कार्यों का हिस्सा बताया गया। कंधमाल और गजपति में मंदिरों से संबंधित गतिविधियों तथा कंधमाल में महिला कीर्तन मंडलियों के गठन को भी आयोजकों ने उनके योगदान से जोड़ा।

गो-संरक्षण आंदोलन में भूमिका
समिति ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के गो-संरक्षण आंदोलन से जुड़े योगदान को भी याद किया। आयोजकों के अनुसार, उन्होंने 1966 में दिल्ली में करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में हुए गो-संरक्षण आंदोलन में भाग लिया था और इस दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा था। इसके अगले वर्ष उन्होंने ओडिशा में गो-संरक्षण आंदोलन का नेतृत्व किया और इसके सिलसिले में जेल गए। समिति के अनुसार, उन्होंने धार्मिक जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कार्य किया और धर्मांतरण के विषय पर समुदायों के बीच जागरूकता फैलाने तथा लोगों को अपनी पैतृक आस्था से पुनः जुड़ने के प्रयासों का समर्थन किया।

सेवा और सामाजिक कार्यों से जुड़ा जीवन
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जन्म 19 जुलाई 1926, श्रावण शुक्ल नवमी को हुआ था। कंधमाल में उनका कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जहां चकापद और जलेसपेटा उनके प्रमुख कार्यस्थलों के रूप में विकसित हुए। उन्होंने जनजातीय और ग्रामीण समुदायों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम किया।

उनके कार्यों ने उन्हें कंधमाल के सामाजिक और धार्मिक जीवन में एक प्रमुख व्यक्तित्व बनाया।
23 अगस्त 2008 को जन्माष्टमी के अवसर पर कंधमाल के जलेसपेटा आश्रम में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद कंधमाल में व्यापक हिंसा हुई थी। शताब्दी समिति ने कहा कि वर्तमान समारोहों का उद्देश्य उनके बताए सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यों को याद करना और उनसे प्रेरित जनकल्याणकारी गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।

पांच सूत्रीय संकल्प
शताब्दी समारोह के दौरान समिति ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के बताए आदर्शों के आधार पर पांच सूत्रीय संकल्प का आह्वान किया है। इसमें धर्मांतरण के खिलाफ जागरूकता, गो-रक्षा, घर-घर गोपालन को प्रोत्साहन, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण, नियमित सत्संग के माध्यम से सामुदायिक संगठन को मजबूत करना तथा ‘मां, माटी और मातृभाषा’ की रक्षा को शामिल किया गया है।

समिति ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और संस्कृत के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया है। संयोजक बिनय कुमार भूयाँ ने लोगों से इन संकल्पों को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपनाने तथा शताब्दी वर्ष को समाजसेवा एवं सांस्कृतिक जागरूकता का अवसर बनाने की अपील की।

स्मरण के साथ सामाजिक पहल का संदेश
आयोजकों के अनुसार, जन्म शताब्दी समारोह केवल स्मृति कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती से जुड़े शिक्षा, सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक विकास के कार्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा। ओडिशा के हजारों स्थानों और देश के प्रमुख शहरों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के माध्यम से संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, समुदाय के प्रतिनिधियों और आम लोगों को जोड़ने की योजना है। समिति ने लोगों से शताब्दी समारोह के विभिन्न कार्यक्रमों और सामाजिक संपर्क अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है।

Topics: ओडिशा न्यूजSwami Lakshmanananda SaraswatiBirth Centenary Celebrationजन्म शताब्दी समारोहOdisha Newsस्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या
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