गत अगस्त को भुवनेश्वर में पूज्य संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के 18वें बलिदान दिवस के अवसर पर ‘धर्म रक्षा दिवस–2026’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भुवनेश्वर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के परिसर में आयोजित था।
धर्म जागरण समन्वय द्वारा आयोजित स्मृति समारोह में पूज्य संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के धर्म, संस्कृति, शिक्षा और जनजातीय समाज के कल्याण में योगदान एवं उनके बलिदान का स्मरण किया गया।
इस अवसर पर पूर्व क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख बिनय कुमार भुइयां ने मुख्य वक्ता के रूप में अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने स्वामी जी के जीवन, आदर्श, सेवा और बलिदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती महाराज का जन्म कंधमाल की पवित्र भूमि पर हुआ था। इस वर्ष उनकी जन्म-शताब्दी मनाई जा रही है।
उन्होंने चकापाद गांव को अपनी कर्मभूमि बनाया। लक्ष्मणानंद जी ने वनवासी समाज के स्वाभिमान को जगाया। इतना ही नहीं, उन्होंने वनवासी बालिकाओं के लिए आश्रम-छात्रावास, चिकित्सालय जैसी सुविधाएं खड़ी कीं। उन्होंने कंधमाल जिले में जनजागरण के लिए पदयात्राएं कीं और सामूहिक यज्ञ संपन्न कराए।
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी ने अपना पूरा जीवन धर्म, संस्कृति, शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। विशेष रूप से जनजातीय समाज की शिक्षा, सामाजिक उन्नति और जागरूकता के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनके बलिदान दिवस को धर्म रक्षा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

















