भुवनेश्वर : पवित्र जन्माष्टमी और कृषि आधारित लोकपर्व ‘नुआखाई’ से पहले ओडिशा सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को ओडिशा युनिवर्सिटी आफ एग्रिकलचलर एंड टेक्नोलाजी स्थित कृषि शिक्षा सदन में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान सीएम- किसान योजना की पांचवीं किस्त की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की।
इस किस्त के तहत राज्य के 41,35,978 छोटे एवं सीमांत किसानों तथा 13,949 भूमिहीन कृषि परिवारों को डीबीटी के माध्यम से ₹833 करोड़ से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई। सरकार के अनुसार, यह राशि वर्ष 2026-27 की रबी फसल से पहले किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक सहित आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मदद करेगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि उनकी सरकार किसानों और भूमिहीन परिवारों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि ही ओडिशा की प्रगति की वास्तविक नींव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम- किसान केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके श्रम को उचित सम्मान देना भी है। उन्होंने कहा कि कृषि सामग्री की खरीद से लेकर संबद्ध आजीविका तथा किसान परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने तक यह योजना विभिन्न स्तरों पर सहायता प्रदान कर रही है।
धान पंजीकरण की समयसीमा 7 सितंबर तक बढ़ी
मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन 2026-27 के लिए धान पंजीकरण की समयसीमा बढ़ाकर 7 सितंबर कर दी गई है। उन्होंने हाल में मयूरभंज, क्योंझर, बालेश्वर, भद्रक, केंद्रापड़ा और सुंदरगढ़ सहित कई जिलों में आई बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए ₹1,000 करोड़ के विशेष सहायता पैकेज की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजस्व और कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों द्वारा किए गए नुकसान के आकलन के आधार पर प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

किसानों की आय दोगुनी करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की वार्षिक आय को कम से कम दोगुना करना सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय कृषि विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि ‘समृद्ध किसान योजना’ के तहत केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य और राज्य सरकार की इनपुट सहायता को मिलाकर किसानों से धान ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। किसानों को धान बिक्री के 48 घंटे के भीतर भुगतान उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, खरीफ सीजन 2025-26 में 18.84 लाख किसानों से 77.48 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और इनपुट सब्सिडी के रूप में रिकॉर्ड ₹5,663.84 करोड़ का भुगतान किया गया। इसी तरह, रबी सीजन में 3.63 लाख किसानों को ₹1,494.89 करोड़ की सहायता दी गई।
किसान परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति
मुख्यमंत्री ने किसान परिवारों के बच्चों को उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए सहायता देने वाली ‘कृषि विद्यानीधि योजना’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 68,910 लाभार्थियों के बच्चों को ₹291.60 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी भूमि संबंधी जानकारी के साथ ‘फार्मर्स रजिस्ट्री’ में पंजीकरण कराने की अपील की।
पशुपालन, मत्स्य पालन और मिलेट्स पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, श्री अन्न अभियान और राष्ट्रीय दलहन मिशन पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में ₹4,886 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 6.92 लाख क्विंटल रागी (मंडिया) की खरीद की गई। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री कृषि उद्यम योजना के तहत किसानों और कृषि उद्यमियों को ₹1 करोड़ तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
जलवायु परिवर्तन को बड़ी चुनौती बताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, अनियमित मौसम, जल संकट और मिट्टी का क्षरण कृषि के सामने गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य में जैविक खेती, मिलेट्स की खेती और पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य में खाद्यान्न, फल और सब्जियों के क्षेत्र में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा में उत्पादित कपास को देश के प्रतिष्ठित ‘कस्तूरी कॉटन’ ब्रांड के लिए मान्यता मिली है। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों के लिए राज्य के किसानों का आभार व्यक्त किया।
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने दी सहायता का भरोसा
उपमुख्यमंत्री एवं कृषि एवं किसान सशक्तीकरण मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि सरकार के मंत्री और अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का प्रत्यक्ष दौरा कर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि बाढ़ प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से सहायता दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रभावित किसान सब्जियों की मिनीकिट खरीदकर उसका बिल सरकार के समक्ष जमा कर सकते हैं, जिसके बाद निर्धारित राशि DBT के माध्यम से उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। उन्होंने किसानों से उर्वरक की उपलब्धता को लेकर किसी भी भ्रामक सूचना पर विश्वास नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है।
‘असमय बारिश’ को आपदा की सूची में शामिल किया गया
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि ओडिशा सरकार ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर ‘असमय बारिश’ को आधिकारिक रूप से आपदा की सूची में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि असमय बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने तथा कृषि के लिए अनुकूल वातावरण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में खोरधा विधायक एवं जिला योजना बोर्ड के अध्यक्ष प्रशांत कुमार जगदेव, कृषि एवं किसान सशक्तीकरण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र यादव, कृषि एवं खाद्य उत्पादन निदेशक शुभम सक्सेना, उद्यान निदेशक कालुंगे गोरख वामन, ओयुएटी के कुलपति डॉ. प्रभात कुमार राउल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्यस्तरीय कार्यक्रम में 750 से अधिक किसानों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। सीएम- किसान योजना के कई लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम का सभी 30 जिलों में लाइव प्रसारण किया गया, जहां मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारियों, कृषि विभाग के अधिकारियों और किसानों की मौजूदगी में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में राज्य के सभी किसान भाई-बहनों को आगामी कृषि-आधारित लोकपर्व ‘नुआखाई’ की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

















