रामपुर का जौहर विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां से जुड़े इस विश्वविद्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लंबी जांच के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। जमीन से जुड़े पुराने विवादों के बीच अब विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुई रकम और ट्रस्ट को मिले चंदे का हिसाब भी जांच के दायरे में आ गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में आजम खां और जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
खर्च और चंदे के हिसाब पर नजर
दरअसल, जौहर विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर आजम खां पर पहले से कई आरोप लगे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में शत्रु संपत्ति की करीब 13.08 हेक्टेयर जमीन होने का मामला भी लंबे समय से विवाद में है। इस जमीन को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके अलावा ग्राम समाज, चकरोड और किसानों की जमीन से जुड़े आरोपों में भी उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं। अब जांच का दूसरा बड़ा पहलू विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च से जुड़ा है। आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट से विश्वविद्यालय के निर्माण, जमीन खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुई रकम का पूरा ब्योरा मांगा है। बताया गया है कि ट्रस्ट को वर्ष 2015 से 2020 के बीच हुए खर्च से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था।
विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च की रकम को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। आजम खां की ओर से करीब 46 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई थी, जबकि सरकारी एजेंसी ने निर्माण लागत करीब 496 करोड़ रुपये आंकी है। इसी अंतर को लेकर जांच एजेंसियों की नजर वित्तीय रिकॉर्ड पर है। ईडी ने हाल की कार्रवाई के दौरान विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट से जुड़े कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें उन 11 फर्मों की जानकारी भी शामिल बताई जा रही है, जिनके माध्यम से ट्रस्ट को करोड़ों रुपये चंदे के रूप में मिले थे। अब इन फर्मों से भी रकम के स्रोत और लेनदेन का ब्योरा मांगा जा सकता है।

















