मुंबई के ताज होटल में पाञ्चजन्य की ओर से आयोजित ‘सुशासन संवाद- मुंबई संकल्प’ का आयोजन किया गया है। श्री नितेश राणे जी कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार ने पाञ्चजन्य की कंसल्टिंग एडिटर तृप्ति श्रीवास्तव जी से खास बातचीत की।
इस विशेष संवाद में मुंबई के बदलते कोस्टल लैंडस्केप, कोस्टल रोड और वाटर मेट्रो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं, मुंबई से लेकर कोकण तक समुद्री परिवहन के विस्तार, मछुआरा समुदाय के सामने खड़ी चुनौतियों तथा पारंपरिक मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। पेश है इस विशेष बातचीत के प्रमुख अंश-
प्रश्न 1. मुंबई के कोस्टल क्षेत्र और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर आपकी सरकार की क्या योजना है? आने वाले समय में मुंबई के कोस्टल एरिया की तस्वीर किस तरह बदलने वाली है?
उत्तर: मुंबई का कोस्टल क्षेत्र बहुत लंबा है और इस पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है। मुंबई में कोस्टल रोड का निर्माण जिस तरह से हो रहा है, वह आने वाले समय में शहर की तस्वीर बदलने वाला है। मैं चाहूंगा कि वर्ष 2028 में पंचजन्य के माध्यम से एक बार फिर इसी तरह का सुशासन संवाद मुंबई में आयोजित किया जाए। उस समय आज जिस तरह आप कोस्टल रोड के माध्यम से यहां पहुंचे हैं, उसी तरह हम उम्मीद करते हैं कि जनवरी 2028 से आप मुंबई वाटर मेट्रो के माध्यम से यहां तक पहुंचेंगे। मुंबई वाटर मेट्रो हमारे मुख्यमंत्री का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। जिस तरह आज मुंबई में मेट्रो का नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है, उसी तरह पूरे एमएमआर रीजन को वाटर मेट्रो के माध्यम से जोड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है। भविष्य में नरीमन पॉइंट से बांद्रा और दहिसर जैसे क्षेत्रों तक वाटर मेट्रो के माध्यम से यात्रा संभव हो सकेगी।
इसके अलावा, ताज होटल के सामने रेडियो क्लब जेटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां से वाटर टैक्सी सेवा शुरू करने की योजना है। आज ताज होटल से नवी मुंबई एयरपोर्ट तक सड़क मार्ग से पहुंचने में काफी समय लगता है। वाटर टैक्सी शुरू होने के बाद यह दूरी लगभग 14 मिनट में तय करने का लक्ष्य है। हमारा उद्देश्य केवल मुंबई या एमएमआर तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में मुंबई के पूरे कोस्टल क्षेत्र को वाटर ट्रांसपोर्ट के माध्यम से जोड़ने की योजना है। मुंबई से कोकण, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ तक समुद्री परिवहन को विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज ने समुद्र की ताकत को बहुत पहले समझ लिया था। उन्होंने समुद्री शक्ति का अध्ययन किया और उसका रणनीतिक महत्व समझा। आज उनके विचारों से प्रेरणा लेकर हम समुद्र की इस ताकत का इस्तेमाल विकास और परिवहन के लिए करना चाहते हैं।
प्रश्न 2. कम बारिश के कारण मछुआरा समुदाय के सामने संकट खड़ा हुआ है। सरकार उन्हें तत्काल किस तरह की मदद देने जा रही है?
उत्तर: महाराष्ट्र देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां हमने मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिया है। इसलिए किसानों के लिए जो फायदे, पैकेज और निर्णय लिए जाते हैं, उनका लाभ मछुआरों को भी मिल सकता है। अभी महाराष्ट्र में पानी और सूखे की गंभीर समस्या है। हम इस संकट से लोगों को बाहर निकालने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। मछुआरों की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है और उसके आधार पर उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रश्न 3. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण पारंपरिक कोली और मछुआरा समुदाय को अपनी आजीविका प्रभावित होने की चिंता है। उनके लिए सरकार ने क्या व्यवस्था की है?
उत्तर: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना एक महत्वपूर्ण योजना है। जब मैंने मत्स्य विभाग का कार्यभार संभाला, उस समय विभाग का बजट लगभग 212 करोड़ रुपये था। आज लगभग डेढ़ वर्ष बाद विभाग का बजट बढ़कर करीब 1,240 करोड़ रुपये हो गया है। मेरा उद्देश्य था कि मछुआरों को सहायता देने के लिए राज्य की अपनी योजना भी होनी चाहिए। इसलिए मार्च के बजट अधिवेशन में हमने मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से उन पारंपरिक मछुआरों की मदद करना है, जिनके पास आधुनिक तकनीक वाली नावें नहीं हैं या जो अभी तक आधुनिक तकनीक से नहीं जुड़ पाए हैं।
हमारा मंत्रालय लगातार मछुआरों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी जुटा रहा है। मैं स्वयं महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहा हूं। हाल ही में जालना और छत्रपति संभाजीनगर गया था, इसके बाद अहिल्यानगर का दौरा किया। जिन क्षेत्रों में बांधों और तालाबों पर निर्भर मछुआरे सूखे से प्रभावित हुए हैं, उनकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके आधार पर मुख्यमंत्री के माध्यम से उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पारंपरिक मछुआरों के सामने रोजगार की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। उनके हाथों को काम मिले, इसके लिए सरकार पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है।















