यदि 1947 में भारत का विभाजन न हुआ होता, तो अखंड भारत आज दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल होता। विशाल आबादी के साथ उसके पास कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या भी बहुत अधिक होती। यही पॉपुलेशन डिविडेंड उसकी अर्थव्यवस्था, उद्योग और विकास को तेज गति देने की बड़ी ताकत बनता।
सैन्य दृष्टि से भी ऐसा भारत दुनिया की प्रमुख रक्षा शक्तियों में होता। विशाल भूभाग, बड़ी जनसंख्या और व्यापक संसाधनों के कारण उसकी सैन्य क्षमता बहुत बड़ी होती। पश्चिमी सीमा के कारण भारत को पश्चिम एशिया और मध्य एशिया तक सीधा संपर्क मिलता, जबकि पूर्वी क्षेत्र दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंच और एक्ट ईस्ट पॉलिसी को अधिक मजबूती देता।
चीन जैसी बड़ी शक्ति के सामने भी इतना विशाल भारत एक मजबूत रणनीतिक संतुलन कायम कर सकता था। हालांकि इतने बड़े और विविध देश के सामने आंतरिक सुरक्षा, क्षेत्रीय असमानता, भाषाई विविधता और राजनीतिक मतभेद जैसी चुनौतियां भी होतीं।
लेकिन यदि इन विविधताओं को मजबूत संघीय व्यवस्था और प्रभावी प्रशासन के माध्यम से संभाला जाता, तो अखंड भारत आर्थिक, सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में से एक होता। सैन्य शक्ति के स्तर पर वह अमेरिका के बाद दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में शामिल होने की क्षमता रखता।
















