18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : दिखी कूटनीतिक कुशलता
September 19, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : दिखी कूटनीतिक कुशलता

यह भारत की कूटनीतिक कुशलता ही है कि नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में युद्धरत देश आए ही नहीं, बल्कि उन्होंने बैठकर एक-दूसरे की बातों को सुना और समझा। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी। अब इन सहमतियों पर अमल कब और किस रूप में होता है, इसे देखना होगा

Written byजितेंद्र कुमार त्रिपाठीजितेंद्र कुमार त्रिपाठी
Sep 19, 2026, 05:58 pm IST
inभारत

क्स देशों का 18वां शीर्ष सम्मेलन नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को संपन्न हुआ। जहां ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में पिछले वर्ष हुए शीर्ष सम्मेलन में चीन की ओर से वहां के प्रधानमंत्री और रूस तथा ईरान के विदेश मंत्रियों ने अपने शासनाध्यक्षों का प्रतिनिधित्व किया, वहीं भारत में हुए शीर्ष सम्मेलन में इन तीनों देशों के राष्ट्रपति स्वयं पहुंचे। यह इस आयोजन की विशेषता रही, जिसने भारत के बढ़ते कद को रेखांकित किया। इतना ही नहीं, रूस और चीन के राष्ट्रपति तो अपने साथ क्रमशः 300 और 400 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ले आए। युद्धग्रस्त होने के बावजूद ईरान के राष्ट्रपति न सिर्फ स्वयं आए, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिले। यह भी दिखाता है कि ये देश अब भारत को कितना महत्व देते हैं।

दिखा कूटनीतिक कौशल

विश्व में कई स्थानों पर युद्ध या युद्ध जैसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच सफलतापूर्वक इतने बड़े पैमाने पर आयोजन करवाना ही इस सम्मेलन के मेजबान की एक बड़ी उपलब्धि है। 11 सदस्य देशों, 9 सहभागी देशों, 6 आमंत्रित देशों और पांच अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। यह आशंका थी कि संभवतः क्षेत्रीय तनावों के चलते कोई घोषणापत्र जारी ही न हो सके, क्योंकि ब्रिक्स के घोषणापत्र सर्वसम्मति से ही जारी होते हैं। किंतु इन शंकाओं को निर्मूल सिद्ध करते हुए घोषणापत्र न केवल जारी हुआ, बल्कि सम्मेलन के पहले ही दिन जारी कर दिया गया। यह भारत के कूटनीतिक कौशल को दिखाता है। सम्मेलन की तीसरी सबसे बड़ी सफलता यह थी कि दो दुश्मन देशों (ईरान और संयुक्त अरब अमीरात) के नेता न सिर्फ मिले, बल्कि लगभग बीस मिनट तक द्विपक्षीय वार्तालाप भी किया। इस दौरान एक-दूसरे को ‘बिरादर’ कहकर संबोधित किया। इससे यह संभावना दिखती है कि निकट भविष्य में दोनों देशों के संबंधों में सुधार आ सकता है। यह भारत की सफल विदेश नीति के इस सिद्धांत का प्रमाण है कि हम विवादरत देशों के बीच मध्यस्थता नहीं करते, किंतु उनके लिए ऐसा वातावरण तैयार करते हैं, जिसमें वे बातचीत कर सकें।

बनी व्यापक सहमति

शीर्ष सम्मेलन में जारी किया गया घोषणापत्र बहुत विस्तृत है। 45 पृष्ठ में समाहित 140 अनुच्छेदों वाले इस दस्तावेज में कोई ऐसा बिंदु नहीं छूटा है, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण हो। जहां इसमें अप्रैल, 2025 में जॅॅम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा है, आतंकवाद को जन्म देने, पालने और वित्तपोषित करने वालों की भर्त्सना है, एकपक्षीय कर और अर्थदंड लगाने, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने, आपूर्ति-शृंखला बाधित करने की निंदा की गई है।

वहीं दूसरी ओर खाद्य-सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध काम, महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान के विस्तार की बात की गई है। ग्लोबल गवर्नेंस, संयुक्त राष्ट्र संघ तथा ब्रेटनवूड्स संस्थानों (विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व व्यापार संगठन) में तत्काल सुधार की मांग को दोहराया गया है। फिलिस्तीन, गाजा, सीरिया, विसैन्यीकरण, आण्विक हथियार, कृषि सहयोग, मध्यम एवं लघु उद्योग जैसे विषयों पर भी वार्ता हुई।

कुल मिलाकर यह माना जा सकता है कि नई दिल्ली शीर्ष सम्मेलन बहुत सफल रहा। पिछले शीर्ष सम्मेलन की तुलना में इसमें संख्यात्मक रूप से ज्यादा और गुणात्मक रूप से अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व रहा और मुद्दों पर अधिक विस्तार से चर्चा हुई तथा अधिक व्यापक सहमति बनी। किंतु अब यह देखना है कि जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन पर क्रियान्वयन कब और कैसे आरंभ होता है-यही इसका लिटमस टेस्ट होगा।

बढ़ा वार्ता का महत्व

किसी भी क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसके हाशिए पर आम तौर पर कई द्विपक्षीय वार्ताएं होती हैं। ऐसी वार्ताएं कई बार तात्कालिक वैश्विक या क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण मुख्य सम्मेलन से भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। दिल्ली सम्मेलन भी इसका अपवाद नहीं है। भारत के साथ रूस, चीन, ईरान के शासनाध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिनिधिमंडल स्तर पर हुई वार्ता इसका उदाहरण है। यद्यपि रूस और चीन के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता का विवरण सामने नहीं आया है।

इसका अनुमान लगाया जा सकता है कि रूस के साथ रुपए में व्यापार के कारण रूस के पास जमा हो रहे भारतीय मुद्रा के भंडार के निस्तारण, वहां से निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति, सैन्य सामग्री-खासकर एस-400 मिसाइलरोधी संरचना और उसके उन्नत संस्करण एस-500 की खरीद, यूक्रेन-युद्ध, रूस के उन्नत सुखोई-57 लड़ाकू विमान की आपूर्ति, मध्य-पूर्व के तनाव आदि पर बात हुई होगी। चूंकि रूस के साथ हमारे संबंध दशकों से निरपवाद रूप से अच्छे रहे हैं और राष्ट्रपति पुतिन अभी पिछले दिसंबर में ही भारत की राजकीय यात्रा कर चुके हैं (मोदी जी इस साल के अंत में रूस जाने वाले हैं)। इस द्विपक्षीय वार्ता से कोई बहुत नए और आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त नहीं हुए होंगे। ऐसे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता का महत्व बढ़ जाता है। शी का 400 लोगों का भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल लेकर आठ साल बाद भारत आना यह दिखाता है कि चीन भारत से अपने रिश्ते सुधारने को उत्सुक है। 2019 में हुई उनकी भारत की राजकीय यात्रा के बाद गलवान घाटी में भारत-चीन की सेनाओं में हुई झड़प से द्विपक्षीय संबंध रसातल पर पहुंच गए थे।

नई दिल्ली घोषणापत्र

  • ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और नई दिल्ली घोषणापत्र सर्वसम्मति से अपनाया गया। भारत की कूटनीति की यह एक परीक्षा थी। इससे कुछ ही समय पूर्व ब्रिक्स 2026 के विदेश मंत्रियों का जो सम्मेलन हुआ था, उसमें मतैक्य नहीं हो पाया था और बिना घोषणापत्र जारी किए सम्मेलन समाप्त हो गया था। इस शिखर सम्मेलन में घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया। यह भारत की कूटनीतिक सफलता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। जिन मुद्दों पर सभी ने सहमति जताई, उनमें प्रमुख हैं-
  •  सीमा-पार भुगतान प्रणाली को मजबूत करना।
  •  वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार।
  • वैश्विक दक्षिण को बराबर का प्रतिनिधित्व।
  • नए मंचों की स्थापना-ब्रिक्स स्टार्टअप नवाचार कोष और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सहयोग पोर्टल।
  •  कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा।
  • सुरक्षा और भू-राजनीति।
  • पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता पर जोर।
  • आतंकवाद की कड़ी निंदा।
  • पहलगाम हमले की भर्त्सना।
  •  आतंकवादियों की वित्तीय सहायता पर रोक।
  •  एकतरफा शुल्कों की निंदा।
  • बाधित आपूर्ति शृंखला पर चिंता।

चीन का बदलता रुख

हाल की कुछ घटनाओं ने संभवतः चीन को भारत की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाने को मजबूर कर दिया है। अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्ते, विदेशी बाजार के संकुचन के कारण चीन में घटता घरेलू उत्पादन, आर्थिक विकास की दर में कमी और उसकी तुलना में भारत की छलांग मारती अर्थव्यवस्था ने चीन को भारत से संबंध सुधारने की दिशा में सोचने को संभवतः बाध्य किया है। इसके अतिरिक्त, एशिया में उसके पुराने मित्र पाकिस्तान की डांवाडोल अर्थव्यवस्था और अमेरिका की ओर बढ़ते उसके कदमों ने चीन को इस चिंता में डाल दिया है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के अंतर्गत किया गया 65 अरब डॉलर का चीनी निवेश संकट में न पड़ जाए। एक अनुमान के अनुसार, ग्वादर परियोजना तथा कतिपय बिजली परियोजनाओं के अतिरिक्त चीन का शेष निवेश असुरक्षित है। चीन के इस बदलते रुख के संकेत पिछले वर्ष से मिलने शुरू हुए।

प्रधानमंत्री मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिन में 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कर भारत की सक्रिय और बहुआयामी कूटनीति का परिचय दिया। प्रधानमंत्री की लगातार बैठकों ने भारत के लिए सम्मेलन को केवल बहुपक्षीय सहयोग का मंच नहीं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के अवसर के रूप में भी स्थापित किया। प्रधानमंत्री की प्रमुख मुलाकातों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठकें विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। पुतिन के साथ वार्ता में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल विकास और जन से जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने व्यापार और औद्योगिक सहयोग को और बढ़ाने पर भी जोर दिया।
जिनपिंग के साथ बैठक ने भारत-चीन संबंधों के लिहाज से विशेष महत्व हासिल किया। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों में आगे की प्रगति के लिए आवश्यक माना। साथ ही व्यापार, संपर्क, बाजार पहुंच और लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह बैठक दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण दौर के बाद संबंधों को स्थिर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखी गई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान की भारत की नीति दोहराई तथा समुद्री व्यापार और नौवहन की सुरक्षा पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीत की। इसमें भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी, निवेश, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार हुआ।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ने मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, मिस्र, फिलीपींस और युगांडा सहित कई देशों के नेताओं से मुलाकात की। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा और पर्यटन सहित व्यापक क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई।
इन 15 बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री ने कई नेताओं तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों के साथ अनौपचारिक मुलाकातें भी कीं। इस व्यापक कूटनीतिक सक्रियता से स्पष्ट है कि भारत ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करने के साथ-साथ द्विपक्षीय आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक संबंधों को विस्तार देने के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। कुल मिलाकर ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें भारत की ‘सक्रिय बहुपक्षीयता’ और ‘रणनीतिक संतुलन’ वाली विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण रहीं। रूस और चीन जैसे प्रमुख शक्तिशाली देशों से लेकर एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साझेदारों तक संवाद ने भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित किया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स को अधिक मजबूत आर्थिक और वैश्विक मंच बनाने की बात करते हुए कहा कि सदस्य देशों की तकनीक, उद्योग, वित्त, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की ताकतों को जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार पहले ही करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और सहयोग की संभावनाएं अभी बहुत बड़ी हैं। उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों और व्यापारिक पाबंदियों की आलोचना करते हुए ब्रिक्स के भीतर वैकल्पिक आर्थिक सहयोग और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई।

रहना होगा सावधान

2025 के रियो ब्रिक्स शीर्ष सम्मेलन के घोषणापत्र में भी पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करके आतंकवाद की निंदा की गई। इसी वर्ष जनवरी में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के दौरान यह सहमति बनी कि कैलाश मानसरोवर का मार्ग फिर खोला जाए, दोनों राजधानियों के बीच हवाई सेवा फिर आरंभ की जाए, ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन में बन रहे बांध के आंकड़े साझा किए जाएं और सीमा के चिन्हांकन का काम तेज किया जाए। अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की बीजिंग यात्रा के दौरान सीमांकन को तेज करने पर सहमति बनी और नई दिल्ली सम्मेलन के दौरान ही फिर से हवाई यात्रा शुरू करने की घोषणा हुई।

चीन के साथ बढ़ रहे व्यापार असंतुलन पर भी इस द्विपक्षीय बैठक में निश्चय ही बात हुई होगी, क्योंकि यह भारत के विदेश व्यापार का एक बड़ा मुद्दा है। चूंकि ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने पर सहमति है, हम चीन से आयातित वस्तुओं का भुगतान रुपए में कर सकते हैं और निर्यात की गई वस्तुओं पर चीनी मुद्रा स्वीकार कर सकते हैं। इससे हमारा व्यापार घाटा रुकेगा। चीन को इस पर आपत्ति हो सकती है, क्योंकि उसके पास रूस की तरह रुपए की अधिकता हो जाएगी। इस आपत्ति को दूर करने के लिए हम चीन के लिए कुछ चुने हुए क्षेत्रों में निवेश का द्वार खोल सकते हैं। लेकिन हमें चीन के साथ बहुत सावधान रहना होगा। चीन के विषय में यह बात सत्य है कि वह आंख मूंदकर भरोसा करने के लायक नहीं है। फिर भी इसका यह अर्थ नहीं है कि हम चीन से संपर्क रखना बंद कर दें।

कूटनीति एक सतत प्रक्रिया है, इसलिए बातचीत का रास्ता सदैव खुला रखना चाहिए। कई छोटे मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर भारत और चीन की सहमति बन सकती है, उन्हीं से फिर से प्रारंभ करना चाहिए, किंतु सीमांकन से हमारा ध्यान कम नहीं होना चाहिए। ईरान के साथ बातचीत ने हमें अपने ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जागृत करने का अवसर दिया, ताकि युद्ध समाप्त होने पर तेल आपूर्ति आरंभ हो सके और चाबहार परियोजना पूरी की जा सके।

संस्कृति और कूटनीति की झलक

ब्रिक्स सम्मेलन भारत की उस छवि को मजबूत करता दिखाई दिया, जिसमें प्राचीन सभ्यता और आधुनिक शक्ति, परंपरा और तकनीक, संस्कृति और कूटनीति-सभी एक साथ चलते हैं। यही शायद इस सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी पहचान रही।
भारत मंडपम बना वैश्विक मंच : दुनिया के प्रमुख उभरते देशों के नेता जब भारत मंडपम में एक साथ जुटे तो यह अपने आप में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक बना। दिल्ली ने दिखाया कि भारत बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को भव्यता और व्यवस्थित तरीके से संभालने की क्षमता रखता है।
भारतीय शाकाहारी भोजन : ब्रिक्स के भव्य रात्रिभोज में भारतीय शाकाहारी व्यंजनों को प्रमुखता दी गई। भोजन की सूची में खंडवी, खुंब गलौटी, पनीर लबाबदार, गुच्छी, मिलेट पुलाव, जलेबी और शहतूत फिरनी जैसे व्यंजन शामिल रहे।
मोदी-पुतिन की ‘कार डिप्लोमेसी’ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक साथ कार में जाना सम्मेलन के सबसे चर्चित क्षणों में रहा। इस अनौपचारिक अंदाज ने भारत-रूस के पुराने और मजबूत संबंधों की तस्वीर दुनिया के सामने रखी।
भारतीय ज्ञान परंपरा का परिचय : प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। तमिल भाषा के इस महान ग्रंथ को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर उपहार के रूप में प्रस्तुत करना भारत की प्राचीन ज्ञान और साहित्यिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर सामने लाने वाला क्षण था।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना : ब्रिक्स की भारतीय अध्यक्षता का व्यापक संदेश सहयोग, संवाद और साझी प्रगति पर केंद्रित रहा। यह भारत की उस सोच से मेल खाता है जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भावना है।
एकता का संदेश : ब्रिक्स के नेताओं द्वारा बरगद का पौधा लगाना बेहद प्रतीकात्मक रहा। बरगद भारतीय सभ्यता में दीर्घायु, स्थायित्व और व्यापकता का प्रतीक है। इसे ब्रिक्स देशों की एकता और दीर्घकालिक सहयोग से जोड़कर देखा गया।
कलाकारों ने प्रस्तुत की भारतीय संस्कृति : विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में 100 से अधिक कलाकारों की भागीदारी रही। संगीत और नृत्य के जरिए भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया गया।
भारत की सभ्यता का अनुभव : ब्रिक्स से जुड़े प्रतिनिधियों और उनके परिवारों ने दिल्ली के विभिन्न स्थलों का दौरा किया। कुछ प्रतिनिधि अक्षरधाम मंदिर और अन्य सांस्कृतिक स्थलों पर पहुंचे। इससे विदेशी मेहमानों को आधुनिक भारत के साथ उसकी सभ्यतागत विरासत देखने का अवसर मिला।
संस्कृति को ताकत से जोड़ा : ब्रिक्स में भारतीय संस्कृति को केवल नृत्य-संगीत तक सीमित नहीं रखा गया। सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा, पारंपरिक ज्ञान और सतत विकास जैसे विषयों पर भी जोर दिया गया। यानी भारत ने संदेश दिया कि उसकी संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था और वैश्विक सहयोग की ताकत भी है।

द्विपक्षीय वार्ता

इस सम्मेलन के हाशिए पर प्रधानमंत्री ने कुल 15 देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें कीं। भले ही ये देश छोटे हों, लेकिन हमारे लिए किसी न किसी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। जहां इंडोनेशिया ब्रिक्स का नया सदस्य होने के अलावा दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, मलेशिया के साथ हमारा व्यापार उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। वियतनाम के साथ हमारे व्यापारिक और सैन्य संबंध हैं। फिलीपींस और वियतनाम को हम ब्रह्मोस तथा अस्त्र मिसाइलें बेच रहे हैं। द. अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और इथियोपिया ब्रिक्स के सदस्य हैं, नाइजीरिया हमें कच्चे तेल की आपूर्ति करता है और बुरुंडी वर्तमान में अफ्रीकी संघ का अध्यक्ष है। कजाखस्तान से भले ही हमारा वार्षिक व्यापार अभी मात्र एक अरब डॉलर है, हमारे लिए यह देश यूरेनियम का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो हमारे आण्विक ऊर्जा संयंत्रों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है। हाल में ही यहां खोजे गए दुर्लभ धातुओं के बड़े भंडार के कारण कजाखस्तान हमारे उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। साथ ही उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे के मुहाने पर होने के कारण तेल परिवहन के लिए इस देश का महत्व बढ़ जाता है। इस प्रकार से हमने भारत के लिए महत्वपूर्ण सभी देशों से द्विपक्षीय वार्ताएं कर लीं और ऊर्जा-आपूर्ति, व्यापार-वृद्धि, सैन्य-व्यापार बढ़ाना सुनिश्चित कर लिया।

घाटे में अमेरिका

अंत में यह देखना चाहिए कि इस आयोजन से किसे क्या मिला? भारत को सफल आयोजन का श्रेय मिला, कई देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के द्वारा ऊर्जा आपूर्ति की सुनिश्चितता, रक्षा-निर्यात में वृद्धि की संभावना, रूस और चीन के साथ संबंधों की नई दिशाएं तलाशी गईं। चीन ने व्यापक बाजार तथा मित्रता की नई संभावनाएं तलाशीं, प्रतिबंधों की मार झेल रहे रूस तथा ईरान को बड़े पटल पर मान्यता मिली और अन्य देशों को पारस्परिक संबंधों को विकसित करने और व्यापार पर बात करने का मौका मिला।
संभवतः सबसे बड़े घाटे में अमेरिका रहा, जिसकी साख और मध्य-पूर्व में अमेरिकी सुरक्षा कवच की विश्वसनीयता पर ब्रिक्स के बढ़ते कद और ईरान-अमीरात के बीच वार्ता से धक्का लगा है। किंतु अब देखना यह है कि घोषणापत्र में किए गए वादों का धरातल पर कितना क्रियान्वयन हो पाता है और यह भी कि अमेरिकी राष्ट्रपति ब्रिक्स के नए रूप को कितना पचा पाते हैं।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : बढ़ा भारत का कद

Topics: वसुधैव कुटुम्बकम्वैश्विक वित्तीय संगठनपाञ्चजन्य विशेषसंस्कृति और कूटनीतिसांस्कृतिक धरोहरबहुपक्षीयतारणनीतिक संतुलनव्यापार असंतुलनडीपीआईआयात और निर्यातशासनाध्यक्षप्रतिनिधिमंडलप्रधानमंत्रीकूटनीतिक कौशलअंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशकअंतर्राष्ट्रीय मामलेंविश्व बैंकनिराधारडिजिटलद्विपक्षीय वार्तालाप
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सम्मेलन में भारतीय कलाकारों द्वारा दी गई सांस्कृतिक प्रस्तुति

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : बढ़ा भारत का कद

अवैध घुसपैठियों पर कसता शिकंजा

जम्मू में जनसंख्या असंतुलन – घुसपैठियों के नेक्सस पर प्रहार, जानें कैसे काम करता है पूरा गिरोह

दो दिन दिल्ली में दुनिया

यूपीआई : डिजिटल भुगतान पर पूरा ज्ञान

स्वरा भास्कर

राम मंदिर पर आए निर्णय पर स्वरा भास्कर शर्मिंदा क्यों?

चित्तौड़ विजय के 700 वर्ष : तुगलक को कैद करने वाले हम्मीर की गाैरव-गाथा

Load More

ताज़ा समाचार

IAF Surya Kiran Aerobatic Team Air Show Meerut Hawk Jets Tricolor Panchjanya

IAF Surya Kiran Air Show Meerut: गरजा आसमान, थम गईं निगाहें, सूर्यकिरण ने मेरठ में लिखी शौर्य की नई गाथा

हामिद अंसारी, पूर्व उपराष्ट्रपति

हिंदुओं का अपमान कांग्रेस की पुरानी आदत, भाजपा का हामिद अंसारी पर बड़ा पलटवार, सोशल मीडिया पर भी घिरे

up rain flood damaged roads cm yogi instructions

यूपी: आपदा पीड़ितों के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम; 1 अप्रैल से 18 सितंबर तक दिए ₹249.76 करोड़!

काशीपुर में युवा विद्यार्थी संवाद, 17 विद्यालयों के 1400 से अधिक विद्यार्थियों से सीएम धामी ने किया संवाद

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : दिखी कूटनीतिक कुशलता

CM Yogi

आपदा प्रभावितों को बड़ी राहत, 1 अप्रैल से 18 सितंबर तक बांटे गए 249.76 करोड़ रुपये

FASTag बदलने की झंझट खत्म! अब SIM की तरह कर सकेंगे पोर्ट, जानें पूरा तरीका

सुरेंद्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री, विहिप

“हिंदू सांप्रदायिक होते तो आप ऐसा बयान न दे पाते” : हामिद अंसारी के बयान की VHP ने की कड़ी निंदा, जानिए क्या कुछ कहा…

योगी सरकार का बड़ा प्लान: अब हर जिले में घायल गोवंश को मिलेगा तुरंत इलाज, बनेंगे इमरजेंसी रेस्क्यू सिस्टम

प्रतीकात्मक तस्वीर

कुंभ 2027 को लेकर एक्शन में उत्तराखंड पुलिस, ADG ने तैयारियों की ली समीक्षा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies