अविभाजित भारत में कृषि की स्थिति बेहतर होती। हमें सिंधु का मैदान और बांग्लादेश का डेल्टा का मैदान मिलता, जिससे गेहूं, चावल और जूट का उत्पादन होता, लेकिन दूसरी दृष्टि से देखा जाए तो उतनी ही जनसंख्या या उससे अधिक जनसंख्या हमारे पास होती। कुल मिलाकर खाद्यान्न का उत्पादन जो बढ़ा हुआ होता, वह उतनी ही जनसंख्या के काम आ जाता।
औद्योगिक दृष्टि से हमें कुशल श्रमिक मिल सकते थे। बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर हमें मिल सकता था। खनिज की बात करें तो बलूचिस्तान को आने वाले समय में क्रिटिकल मिनरल का एक क्षेत्र कहा जा रहा है। इसका हमे बहुत लाभ मिलता। हम एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति होते। साथ ही भारत एक विशाल तटरेखा वाला देश होता।
आज जिस तरह सामुद्रिक शक्ति आगे बढ़ रही है, तो अविभाजित भारत हिंद महासागर पर अपना दबदबा रखता और वैश्विक व्यापार का केंद्र बनता। साथ ही भारत की पहुंच यूरोप के बाजारों और मध्य एशिया के ऊर्जा केंद्रों तक होती। इसके साथ ही परस्पर बाह्य और आंतरिक संघर्ष के कारण जो संसाधन, समय एवं शक्ति का अनावश्यक व्यय हो रहा है, उसका विकास के लिए उपयोग होता और समग्र भारत द्रुत गति से विकास करता।
















