महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर FDA की कार्रवाई लगातार जारी है। मिलावट और गंदगी जैसी शिकायतों पर विभाग दुकानों के खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है। लेकिन पुणे से सामने आया एक मामला FDA की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर रहा है। जिस मिठाई की दुकान का लाइसेंस पहले सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़ी शिकायतों के बाद निलंबित किया गया था, वही दुकान दोबारा जांच में करीब 98 फीसदी मानकों पर सही पाई गई। इसके बावजूद दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं मिली। मामला जब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने FDA को कड़ी फटकार लगाई और 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
12 जून को बंद हुआ था कारोबार
यह मामला पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स का है। 12 जून को फूड पॉइजनिंग की शिकायत और साफ-सफाई से जुड़ी चिंताओं के बाद FDA ने दुकान का फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया था। दुकान ने 15 जून को इस कार्रवाई को चुनौती दी। इसके बाद दुकान की ओर से 9 जुलाई को FDA को एक रिपोर्ट दी गई, जिसमें बताया गया कि जांच के दौरान सामने आई कमियों को दूर कर दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के चार दिन बाद विभाग ने दुकान की दोबारा जांच की। दोबारा जांच में दुकान को 36 में से 35 अंक मिले। इसका मतलब है कि दुकान करीब 98 फीसदी फूड सेफ्टी मानकों पर खरी उतरी। इसके बावजूद FDA ने लाइसेंस बहाल नहीं किया और दुकान बंद रही। दुकान के मालिकों ने इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान FDA ने कहा कि लाइसेंस निलंबन के खिलाफ विभागीय अपील लंबित है, इसलिए दुकान को खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने FDA की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और गौतम ए. अंखड़ की बेंच ने विभाग के रवैये को अनुचित बताया। कोर्ट ने माना कि जब दोबारा जांच में दुकान 36 में से 35 अंक हासिल कर चुकी है, तो उसे सिर्फ अपील लंबित होने के आधार पर बंद रखना उचित नहीं है। दुकान की ओर से बताया गया कि 34 दिनों तक कारोबार बंद रहने से करीब 8.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ। मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने FDA को 30 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये का मुआवजा जमा करने का आदेश दिया। साथ ही दुकान का लाइसेंस निलंबन रद्द कर दिया गया और उसे तुरंत कारोबार शुरू करने की अनुमति दे दी गई।

















