महाराष्ट्र की मुंबई साइबर पुलिस ने बांद्रा में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद रेलवे द्वारा चलाए जा रहे ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ के दौरान सोशल मीडिया पर झूठी और भड़काऊ जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। साइबर पुलिस ने बांद्रा में पत्थरबाजी के बारे में झूठी जानकारी पोस्ट करने के आरोप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘अनुषी तिवारी प्राउड इंडियन’ नाम के एक हैंडल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस अकाउंट से 22 मई को एक पोस्ट में झूठा दावा किया गया था कि शुक्रवार को नमाज अदा करते समय हुए पुलिस के लाठीचार्ज में 13 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। मस्जिद के इमाम को भी पुलिस ने गोली मार दी। मुंबई साइबर पुलिस के अनुसार, झूठी जानकारी फैलाकर दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की गई, जिससे दंगे भड़क सकते हैं।
अनुषी तिवारी अकाउंट हैंडल पर पहले भी केस दर्ज हुआ था
इससे पहले भी अनुषी तिवारी नाम के इस हैंडल पर कई फर्जी और भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लग चुका है। मेरठ पुलिस ने 10 मई को इस हैंडल के खिलाफ केस दर्ज किया था, जिसमें हिंदू-मुस्लिम दंगे फैलाने का प्रयास किया गया था। कई यूजर्स ने अनुषी तिवारी नाम के इस अकाउंट हैंडल पर पुलिस से कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि यह अकाउंट पाकिस्तान से चलाया जा रहा है, जिसे भारत में ब्लॉक किया जाना चाहिए।
कोलकाता पुलिस ने सख्त कार्रवाई करने को कहा
बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद अनुषी तिवारी के सोशल मीडिया हैंडल से कई भड़काऊ पोस्ट की गई थीं, जिस पर कोलकाता पुलिस ने संज्ञान लिया और उन खबरों को फर्जी बताया था। कोलकाता पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से 5 मई को पोस्ट किया, ”चुनाव के नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर दूसरी जगहों के वीडियो और फोटो को कोलकाता से जोड़कर कई गुमराह करने वाले पोस्ट फैलाए जा रहे हैं। कोलकाता पुलिस ऐसे कंटेंट पर कड़ी नजर रख रही है। सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
अतिक्रमण हटाओ अभियान पांचवे दिन भी जारी
मुंबई के बांद्रा पूर्व स्थित गरीब नगर इलाके में रेलवे की जमीन पर चल रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान शनिवार (23 मई) को पांचवे दिन भी जारी है। पश्चिम रेलवे ने अपने एक्स अकाउंट पर इसकी कुछ वीडियो भी साझा की हैं। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक 19 मई से शुरू हुई इस कार्रवाई में अब तक इलाके के करीब 100 प्रतिशत अवैध अतिक्रमण हटा दिए गए हैं। सभी अवैध मस्जिदों और मदरसों को तोड़ दिया गया है। फिलहाल उन्हीं निर्माणों को छोड़ा गया है, जिन्हें हटाया नहीं जाना।
सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण अभियान के खिलाफ याचिका खारिज की
इस बीच कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए 21 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने और तेजी से अभियान जारी रखा। पश्चिम रेलवे के अधिकारी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया कानून और अदालत के निर्देशों के तहत ही चलाई जा रही है और इसमें वैध संरचनाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा।
अवैध मस्जिदों, मदरसों पर बुलडोजर कार्रवाई
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दूसरे दिन यानी बुधवार (20 मई) को दो अवैध मस्जिदों पर बुलडोजर कार्रवाई कर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। ये दोनों मस्जिदें रेलवे की जमीन पर बनी थीं। अवैध निर्माण गिराने का पता चलते ही मौके पर आसपास के इलाकों से भारी भीड़ जमा हो गई। इन लोगों ने बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया और पुलिस बल पर पथराव करने लगे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में महिला, पुरुष और नाबालिग पथराव करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं एक अन्य वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति सीमेंट का बड़ा सा पत्थर पुलिस के ऊपर फेंकता हुआ नजर आ रहा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही कार्रवाई
यह मामला 2017 से कोर्ट में लंबित था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में (29 अप्रैल 2026) रेलवे की जमीन पर बनी अवैध झुग्गियों और निर्माणों को हटाने की अनुमति दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस दौरान किसी भी वैध संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। रेलवे प्रशासन ने कार्रवाई करने से पहले इस इलाके में रहने वाले लोगों को जगह खाली करने का नोटिस दिया था। दरअसल, रेलवे की जमीन पर बने अवैध निर्माण से न सिर्फ लोगों की जान को खतरा था, बल्कि ट्रेन संचालन भी प्रभावित हो सकता था। ऐसे में अतिक्रमण हटाने से न केवल रेलवे सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि ट्रेन संचालन में सुगमता आएगी। साथ ही भविष्य में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं और यात्री क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

















