नई दिल्ली। राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को लेकर भ्रामक खबरों पर विराम लग गया है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों से खान-पान, जनेऊ, शिखा और निजी आदतों से जुड़े सवाल पूछे गए थे। जबकि ऐसा नहीं है। सूत्रों का कहना है कि साक्षात्कार के लिए आने वाले लोगों से उनके धार्मिक विश्वासों के बारे में सवाल नहीं किया गया। उनके पेशेवर जीवन को वरीयता दी गई है।
उनका मूल्यांकन उनके बायोडाटा, पुराने प्रशासनिक अनुभव, विशाल जनसमूह के प्रबंधन और मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाने के दृष्टिकोण पर आधारित था। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ( सीईओ) के चयन के लिए बनी सर्च कमेटी ने इंटरव्यू की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त को तीर्थ क्षेत्र परिसर में हुए थे। फाइनल राउंड में 16 उम्मीदवार बुलाए गए थे।
सर्च कमेटी में ये रहे शामिल
- जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली
- लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वी.के. चतुर्वेदी
- न्यूक्लियर साइंटिस्ट डॉ. सुरेश हवरे
इनकी विशेषज्ञता रक्षा, न्यायपालिका और प्रशासन के क्षेत्रों में है, जो इस महत्वपूर्ण संस्थागत नेतृत्व भूमिका के लिए उम्मीदवारों के मूल्यांकन में अलग-अलग दृष्टिकोण लाती है।
चयन प्रक्रिया का विवरण
अलग-अलग क्षेत्रों से 16 पेशेवर लोगों को बुलाया गया था। यह संख्या सभी आवेदकों के 0.3% से भी कम थी। 50 से 70 वर्ष की आयु के इन व्यक्तियों में सेना के पूर्व अधिकारी, रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी, और विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी सेवाओं के प्रोफेशनल्स शामिल हैं। फाइनल राउंड के लिए बुलाए गए सभी 16 उम्मीदवार बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले लोग हैं।
















