कुछ दिनों पहले जौहर पर जहर उगलने वालीं स्वरा भास्कर अब अयोध्या में सदियों की प्रतीक्षा के बाद बने श्रीराम मंदिर पर आए निर्णय पर शर्मिंदा हैं। किसी कार्यक्रम के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनमें स्वरा भास्कर उस निर्णय को अस्वीकार करते हुए दिखाई दे रही हैं, जिसके लिए लाखों हिंदुओं ने बलिदान दिया और जो हिंदुओं की चेतना और एकता का प्रतीक है।
स्वरा भास्कर ने कहा कि जब 2020 में श्रीराम जन्मभूमि का निर्णय आया तो वह अवाक रह गईं। उनके अनुसार वह निर्णय उनके लिए बहुत बड़ा धक्का था। यही कारण था कि जैसे ही उन्हें इस निर्णय के विषय में पता चला, उन्होनें अपनी फोन बुक में मौजूद सभी मुस्लिम कलाकारों, आमिर, शाहरुख, सलमान और फवाद तक सभी को मैसेज किया।
स्वरा भास्कर ने बताया कि राम जन्मभूमि फ़ैसले से वह काफी परेशान थीं।
उन्होंने अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद कई मुस्लिम सेलिब्रिटीज़ को मैसेज किया।
इनमें आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान भी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि एक हिंदू होने के नाते उन्हें अफ़सोस और शर्मिंदगी महसूस हुई और… pic.twitter.com/8kqciVdhBm
— Panchjanya (@epanchjanya) September 17, 2026
उस मैसेज में उनकी शर्मिंदगी थी कि वे इस निर्णय के प्रति शर्मिंदा हैं, एक हिंदू के तौर पर।
मगर यह सहानुभूति क्यों?
अब प्रश्न यह उठता है कि मुस्लिम कलाकारों के साथ सहानुभूति या एकता क्यों? ऐसा क्या हुआ था, जो स्वरा भास्कर को यह करना या कहना पड़ा? क्या वह उनके घर का मामला था, जिसके लिए उन्हें शर्मिंदगी हुई? क्या उन्होंने वह मामला लड़ा था और सबसे बढ़कर प्रश्न कि क्या वह मामला मुसलमान विरोधी था?
नहीं! श्रीराम मंदिर वाला मामला कभी भी मुसलमानों का विरोधी नहीं था। वह तो अपना मंदिर पाने की लड़ाई थी। वह मंदिर जो सदियों पहले तोड़ दिया गया था। सबसे बढ़कर हिंदुओं ने न्यायपालिका पर विश्वास किया।
यह विश्वास एक दो दिनों का विश्वास नहीं था और संघर्ष नहीं था, बल्कि यह सदियों का संघर्ष था। मगर फिर भी स्वरा भास्कर को इस निर्णय को लेकर शर्मिंदगी क्यों हुई?
क्या अपनी अस्मिता के प्रतीकों को पाना शर्म का विषय है? स्वरा की अस्मिता इससे अलग हो सकती है, मगर स्वरा की अस्मिता के अलग होने का अर्थ यह नहीं होता कि वह करोड़ों और अरबों हिंदुओं की आस्थाओं का उपहास उड़ाएं? क्या स्वरा भास्कर को यह लग रहा था कि तमाम ऐतिहासिक प्रमाणों के बाद भी न्यायपालिका हिंदुओं को वह भूमि नहीं देगी? क्या स्वरा भास्कर को ऐसा लग रहा था कि न्यायपालिका मात्र तुष्टीकरण के लिए और उनके जैसे लोगों के लिए न्याय का अर्थ ही बदल देगी?
क्या हिंदू होने के नाते शर्मिंदगी थी?
स्वरा भास्कर को किस बात को लेकर शर्मिंदगी थी, यह समझ से परे है। क्या हिन्दू होने के नाते उन्हें शर्मिंदगी थी? मगर वे तो खुद को शायद हिंदू मानती भी नहीं हैं। शायद वे अपने आप को नास्तिक मानती थीं। ऐसा मीडिया में आता रहा है, क्योंकि किसी भी आम हिंदू का हृदय उन ढांचों को देखकर असीम पीड़ा में भर जाता है, जो अयोध्या में थी, और मथुरा और काशी में अभी भी है।
जब न्यायपालिका के आए इस निर्णय पर स्वरा भास्कर हिन्दू होने के नाते शर्मिंदा हो रही हैं, तो क्या मथुरा में उस ढांचे पर शर्मिंदा होंगी, जो कृष्ण जन्मभूमि पर है?
यह शर्मिंदगी एकतरफा क्यों है? हालांकि स्वरा भास्कर ने जब अपने मुसलमान कलाकारों को अपने दिल की बात लिखी कि वह उनके साथ हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए था और हिंदू होने के नाते वह शर्मिंदा हैं तो अधिकतर लोगों ने उन्हें मैसेज किया कि इट्स ओके, मगर आप यह सब नहीं भेजिए।
आजादी का नारा कश्मीर का नारा
इसी कार्यक्रम में एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें स्वरा कह रही हैं कि “जेएनयू का नारा” तो फवाद का कहना था कि जेएनयू का नारा क्या होता है। आजादी का नारा तो कश्मीर का नारा था। और फवाद के यह कहने के बाद कि यह कश्मीर का नारा था, स्वरा ने उसे “प्रोग्रेसिव” कहा। अब यह भी पूछना चाहिए कि कश्मीर का भारत से आजादी का नारा प्रोग्रेसिव कहां से हो गया?
क्या स्वरा जैसे लोगों को वहां पर आजादी का मतलब नहीं पता है या फिर वह जान-बूझकर जानना ही नहीं चाहते? दूसरा ही विकल्प लग रहा है कि इन्हें सब पता है कि कश्मीर के लिए आजादी के नारे का अर्थ क्या है, मगर फिर भी एजेंडा उसे “प्रोग्रेसिव” ही कहने में है।
उमर खालिद ने उन्हें मिलाने में भूमिका निभाई
स्वरा और फवाद ने यह भी इस कार्यक्रम में बताया कि कैसे उमर खालिद ने उन दोनों को मिलाने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
सोशल मीडिया पर एक बार फिर विरोध
स्वरा भास्कर के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का विरोध तो आरंभ हो गया है, मगर उनका यह भी कहना है कि स्वरा दरअसल यह सब समाचारों में बने रहने के लिए कहती हैं, क्योंकि कई बार वे यह कह चुकी हैं कि उनके पास अब काम बचा नहीं है।उनका यह भी कहना है कि स्वरा को अभी भी खानों का या मुसलमान कलाकारों का सर्टिफिकेट चाहिए। ऐसा क्यों? लोग यह भी पूछ रहे हैं कि हिंदुओं के इतिहास और अस्मिता से स्वरा को इतनी चिढ़ या घृणा क्यों है?
शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने इस बयान पर प्रतिक्रिया दी। एक्स पर आईएनएस के साथ बातचीत में कहा कि स्वरा को किसने हिंदुओं की तरफ से माफी मांगने का ठेका दिया? वह हिंदुओं को नहीं बल्कि टुकड़े-टुकड़े गैंग का प्रतिनिधित्व करती है।















