भारत और ओमान के बीच होने वाला कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA), यानी मुक्त व्यापार समझौता, भारत के इंडस्ट्रियल सामान के निर्यात को काफी मदद कर सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान में अभी भारतीय सामान पर इंपोर्ट ड्यूटी जीरो से लेकर 100 फीसदी तक लगती है। ज्यादातर भारतीय प्रोडक्ट्स पर औसतन 5 फीसदी ड्यूटी है, लेकिन कुछ चीजों जैसे मीट, शराब और तंबाकू पर बहुत ज्यादा टैक्स है। इस समझौते से टैरिफ कम या खत्म होने से भारतीय सामान सस्ता पड़ेंगे और ज्यादा बिक सकेंगे।
मौजूदा व्यापार की स्थिति
2024-25 में भारत और ओमान के बीच कुल व्यापार करीब 10.5 अरब डॉलर का था। भारत ने ओमान को 4.1 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया, जबकि ओमान से 6.6 अरब डॉलर का आयात हुआ। भारत का निर्यात मुख्य रूप से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर निर्भर है।
प्रमुख निर्यात वाली चीजें ये हैं:
नाफ्था: 747.6 मिलियन डॉलर
पेट्रोल: 561 मिलियन डॉलर
कैल्साइंड एल्यूमिना: 313 मिलियन डॉलर
मशीनरी: 231 मिलियन डॉलर
एयरक्राफ्ट: 165 मिलियन डॉलर
चावल: 182 मिलियन डॉलर
आयरन और स्टील के सामान: 120 मिलियन डॉलर
ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स: 128.6 मिलियन डॉलर
सिरेमिक प्रोडक्ट्स: 79.9 मिलियन डॉलर
गौरतलब है कि ओमान से भारत मुख्य रूप से एनर्जी और फर्टिलाइजर आयात करता है, जैसे क्रूड ऑयल, LNG और केमिकल्स।
समझौते के मुख्य फायदे
यह CEPA सामान, सर्विसेज और निवेश को कवर करेगा। भारत-यूएई FTA की तरह ही इसका पैटर्न है। टैरिफ कम होने से इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स जैसे मशीनरी, आयरन-स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम सामान को फायदा होगा। खास तौर पर फार्मा सेक्टर में भारतीय दवाओं को तेज अप्रूवल मिल सकता है। व्यापार मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता टेक्सटाइल्स, फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, एग्रोकेमिकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टर्स में नए मौके खोलेगा। ओमान गल्फ रीजन का गेटवे भी बन सकता है।
निवेश और स्ट्रैटेजिक पहलू
दोनों देशों के बीच पहले से 6000 से ज्यादा जॉइंट वेंचर्स हैं। भारत ने ओमान के सोहर और सलालाह फ्री जोन्स में 7.5 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किया है। यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि एनर्जी सिक्योरिटी और गल्फ में भारत की मौजूदगी को मजबूत करेगा। ओमान भारत का महत्वपूर्ण एनर्जी सप्लायर है।
क्या चुनौतियां हैं
ओमान का घरेलू मार्केट छोटा है, इसलिए बहुत बड़ा जंप देखने को नहीं मिलेगा। GTRI का कहना है कि लंबे समय तक ग्रोथ के लिए प्रोडक्ट्स की क्वालिटी बेहतर करनी होगी और अलग-अलग वैरायटी लानी होगी। फिर भी, यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को नई ताकत देगा।

















