संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो दिन पहले एक नए वैश्विक मानचित्र के समर्थन में मतदान हुआ। उसके बाद भारत ने साफ कहा है कि प्रस्तावित मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। कोई भी गलत या गुमराह करने वाला चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट क्यों डाला
शुक्रवार को भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला था, जिसका मकसद दुनिया के नक्शों में सुधार करना और महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है। महासभा ने “करेक्ट द मैप” नाम के इस प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूर कर लिया। टोगो की तरफ से लाए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। सिर्फ अमेरिका ने इसका विरोध किया।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत ने साफ किया है कि यह प्रस्ताव किसी खास नक्शे, मानचित्र बनाने की पद्धति या देशों की सीमाओं को किसी विशेष तरीके से दिखाने का समर्थन नहीं करता। भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और इसकी वजह बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य सिद्धांत सभी क्षेत्रों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के हिसाब से सही तरीके से नक्शे पर दिखाना है।
जायसवाल ने कहा कि भारत का संप्रभु क्षेत्र देश के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख साफ, एक जैसा और किसी भी समझौते से बाहर है।
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प्रस्ताव का असल मकसद क्या है
रणधीर जायसवाल ने आगे बताया कि संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जो अलग-अलग महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को सही तरीके से दिखाते हैं। यह प्रस्ताव न तो किसी खास वैश्विक मानचित्र को अपनाता है और न ही उसे मान्यता देता है। यह राजनीतिक मानचित्र से जुड़े मुद्दों, जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नाम पर भी कोई बात नहीं करता है।
भारत ने दो दिन पहले मतदान के बाद यह रुख दोहराया है कि कोई भी गलत या गुमराह करने वाला चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाना जरूरी है।














