13 साल पुराने चर्चित रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को दोषी करार देते हुए 10 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही अदालत ने 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट का यह फैसला देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में एक बड़ा कानूनी फैसला माना जा रहा है।
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा, “तरुण तेजपाल केस में गोवा ब्रांच बॉम्बे हाई कोर्ट ने जो आज निर्णय दिया है, ये न्याय की जीत है। ये केस गोवा में हुआ था और इसके लिए लगातार फॉलोअप करना गोवा पुलिस और सरकार का काम था। हमारी सरकार ने लगातार केस का फॉलोअप किया और आज फैसला आया। मैं महिला के साहस को नमन करता हूं।”
10 साल की सख्त कैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना
अदालत ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत दोषी पाया। बेंच ने तरुण तेजपाल को 10 साल की सख्त कैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। फैसला सुनाए जाने के समय तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे। सजा सुनाने से पहले तेजपाल के वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उनका कहना था कि यह मामला काफी पुराना है और उनके मुवक्किल की उम्र भी 62 साल हो चुकी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए सजा पर कुछ समय तक रोक लगाने की भी मांग की। खुद तरुण तेजपाल ने भी अदालत से अपने प्रति नरमी दिखाने की गुजारिश की।
ये है मामला
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले की सही तरीके से जांच नहीं की थी। सरकार का तर्क था कि निचली अदालत ने पीड़िता के व्यवहार पर ज्यादा सवाल उठाए, जबकि आरोपी के खिलाफ मौजूद सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। वहीं, बचाव पक्ष का कहना था कि पीड़िता का बयान पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है और सीसीटीवी फुटेज भी आरोपों की पुष्टि नहीं करता। हालांकि, हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और तेजपाल द्वारा भेजे गए माफीनामे वाले ईमेल को अहम सबूत मानते हुए उन्हें दोषी ठहराया। यह मामला नवंबर 2013 का है। गोवा में आयोजित थिंक फेस्ट (THiNK Fest ) के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तहलका की एक जूनियर महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस मामले में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी माना गया है।

















