भारत सरकार देश में अपराधों को अंजाम देकर देश छोड़कर भागे मुजरिमों को लगातार वापस लाने की कोशिशों में लगी है। इसी क्रम में लगभग दो हफ्ते पहले 88 करोड़ रुपये के निवेश धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी अविनाश राठोड को भारत लाया गया था। अब उसकी पत्नी विशाखा राठोड को भी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत लाया गया है। उसे सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने उन्हें 3 अगस्त को गिरफ्तार किया था। विशाखा पर भारतीय एजेंसियों का केस चल रहा था और इंटरपोल की रेड नोटिस भी जारी थी। सीबीआई, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के मिलकर काम करने के बाद यूएई अधिकारियों ने उसे भारत भेज दिया। वे पुणे पहुंचीं, जहां महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
मामला क्या है?
जांचकर्ताओं के मुताबिक, विशाखा और उनके पति अविनाश राठोड ने कई लोगों को निवेश योजनाओं में पैसे लगाने के लिए राजी किया। उसने हर महीने तय रिटर्न देने का वादा किया। लेकिन यह वादा झूठा था। निवेशकों से इकट्ठा किया गया पैसा अलग-अलग बैंक खातों और डीमैट खातों में घुमा दिया गया। कुल धोखाधड़ी करीब 88 करोड़ रुपये की बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि दंपति और उसके सहयोगियों ने पैसे हड़पने के बाद देश छोड़ दिया था।
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पति को पिछले महीने लाया गया था
विशाखा की वापसी से पहले उसके पति अविनाश राठोड को भी यूएई से लाया जा चुका है। दोनों के खिलाफ 4 जून 2026 को इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुई थी। उसी नोटिस के आधार पर यूएई पुलिस ने अविनाश को हिरासत में लिया और 23 जुलाई को भारत भेज दिया। मुंबई एयरपोर्ट पर पुणे पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग ने उन्हें गिरफ्तार किया। बाद में पुणे की अदालत ने पुलिस को 10 दिन की रिमांड दी। जांच में उनसे फंड के लेन-देन और पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ चल रही है।
इंटरपोल की मदद से हुई गिरफ्तारी
सीबीआई ने बताया कि विशाखा का पता लगाने और उन्हें वापस लाने में यूएई के अधिकारियों से लगातार संपर्क रखा गया। इंटरपोल रेड नोटिस के बाद ही यह कार्रवाई संभव हुई। विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। अब विशाखा महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत में हैं और उनसे आगे की जांच होगी।
फरार अपराधियों को वापस लाने की मुहिम
यह मामला उन कई मामलों में से एक है, जिनमें भारत आर्थिक अपराधियों और फरार लोगों को विदेश से वापस ला रहा है। सीबीआई इंटरपोल और दूसरे देशों की एजेंसियों के साथ काम करती है। भारत का नेशनल सेंट्रल ब्यूरो भी सीबीआई ही है। संसद में हाल ही में बताया गया कि 2019 से जुलाई 2026 तक भारत ने 36 देशों से 274 फरार अपराधियों को वापस लाया है।












