राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत 22 जुलाई को सीवान के महावीरी सरस्वती विद्या मंदिर में युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए उत्तर बिहार प्रांत के सह-प्रांत प्रचारक प्रवीर जी ने कहा कि आज के युवा न सिर्फ अपने भविष्य के निर्माता हैं, बल्कि देश के वर्तमान और भविष्य की नींव भी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जिन दस सामाजिक कर्तव्यों पर ज़ोर दिया है, उनका पालन हर नागरिक, खासकर युवाओं के लिए जरूरी है, ताकि सामाजिक जीवन को मजबूत और व्यवस्थित किया जा सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रार्थना सभा में उत्तर बिहार प्रांत के सह प्रांत प्रचारक प्रवीर जी, सारण विभाग कार्यवाह प्रभात रंजन, सिवान जिला प्रचारक बसंत कुमार, सह जिला कार्यवाह बिनोद पाण्डेय, जिला संपर्क प्रमुख गिरीश कुमार तथा विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कुमार विजय रंजन द्वारा माँ सरस्वती, ॐ तथा भारत माता के तैलचित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
परिवार, समरसता और प्रकृति
प्रवीर जी ने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि जाति, भाषा, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव समाज को कमजोर करता है। सभी भारतीय एक परिवार के सदस्य हैं और परस्पर सम्मान, आत्मीयता तथा सहयोग की भावना ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। कुटुंब प्रबोधन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि संस्कारों की पहली पाठशाला परिवार होता है। माता-पिता एवं बड़ों का सम्मान, पारिवारिक संवाद और भारतीय जीवन-मूल्यों का पालन समाज को सुदृढ़ बनाता है। पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अनिवार्य दायित्व बताते हुए उन्होंने जल, जंगल, जमीन तथा जैव विविधता के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने की प्रेरणा दी।
स्वदेशी और राष्ट्रधर्म
प्रवीर जी ने स्वदेशी आचरण अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने तथा भारतीय ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं पर गर्व करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक एवं सामाजिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। अनुशासन, कानून का सम्मान, मतदान, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव एक आदर्श नागरिक की पहचान है। हिन्दू संगठन, चरित्र निर्माण, राष्ट्र सर्वोपरि की भावना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भारतीय समाज की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा कि सशक्त चरित्र, सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के बल पर ही भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है।
अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए इन सामाजिक कर्तव्यों का पालन करने, समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा अपने आचरण से आदर्श नागरिक बनने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति नई चेतना का संचार किया। इस अवसर पर विद्यालय के उप-प्राचार्य आशुतोष कुमार, देवानंद श्रीवास्तव, मुरली मनोहर मिश्र, योगेन्द्र राम, हरदीप सिंह, सुश्री सुमन कुमारी सहित विद्यालय के सभी आचार्य-बंधु एवं भगिनी उपस्थित रहे। विद्यालय के मीडिया प्रभारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में समस्त आचार्यों एवं भैया-बहनों ने राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का सामूहिक संकल्प लिया।

















