सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सिर्फ आंदोलन हो रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि पुलिस लाठीचार्ज कर दे। शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार संविधान के तहत पूरी तरह सुरक्षित है। शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा निकाले गए चलो संसद विरोध मार्च के दौरान हुई हिंसा और फिर पुलिस की लाठीचार्ज को लेकर की है।
मनोज झा दायर की थी याचिका
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा पिछले हफ्ते CJP के प्रदर्शन पर की गई कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया। यह याचिका राजद सांसद मनोज झा ने दाखिल की थी।
मुख्य न्यायाधीश के सामने उल्लेख
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के सामने याचिका का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने मामले को मंगलवार (कल) के लिए सुनवाई के लिए रख दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, “शांतिपूर्ण और कानूनी प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत पूरी तरह गारंटीड है। जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, सिर्फ आंदोलन हो रहा है इसलिए लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता।”
कोर्ट ने आगे कहा कि अगर कोई अधिकता (excesses) हुई है तो उसे अलग से जांचा जाना चाहिए। यह चिंता सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में लागू होनी चाहिए।
एक समान प्रोटोकॉल की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि सभी राज्यों में पुलिस कार्रवाई के लिए एक समान प्रोटोकॉल होना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, अनुशासन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की फोर्स (बल) के इस्तेमाल को स्वतंत्र रूप से जांचा जाना चाहिए।
क्या था मामला?
पिछले हफ्ते टॉल्स्टॉय मार्ग इलाके में CJP के प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसकी तस्वीरें और वीडियो काफी वायरल हुए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने अचानक बल प्रयोग किया।मनोज झा की याचिका में इसी घटना का जिक्र है और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
















