"बिना मातृत्व के सृष्टि का सृजन असंभव": विश्वमांगल्य सभा में बोले सरसंघचालक जी
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परिवार को समय देना और बच्चों से सतत संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक : डॉ. मोहन भागवत

नई दिल्ली में विश्वमांगल्य सभा के समापन सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 'युगानुकूल मातृत्व' पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने परिवार व्यवस्था और संस्कारों को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 25, 2026, 08:40 am IST
inभारत, दिल्ली
Mohan Bhagwat Vishwa Mangalya Sabha Contemporary Motherhood Ambedkar International Center Delhi Panchjanya

नई दिल्ली। वैश्विक महिला संगठन विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित उत्तर भारत की राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक का भव्य समापन समारोह नई दिल्ली स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में संपन्न हुआ.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने “युगानुकूल मातृत्व (Contemporary Motherhood)” विषय पर प्रबुद्ध मातृशक्ति को संबोधित किया.

Mohan Bhagwat Vishwa Mangalya Sabha Contemporary Motherhood Ambedkar International Center Delhi Panchjanya

सरसंघचालक जी ने अपने भाषण की शुरुआत चुटीले अंदाज में करते हुए कहा कि मातृत्व जैसे विषय पर पुरुषों का बोलना अपने आप में एक विरोधाभास जैसा है, क्योंकि इस पर प्राकृतिक एकाधिकार महिलाओं का ही है.

Mohan Bhagwat Vishwa Mangalya Sabha Contemporary Motherhood Ambedkar International Center Delhi Panchjanya

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ ठाकुर जैसे महापुरुषों ने भारतीय परंपरा और मातृत्व के चिंतन को पूरी समग्रता से समाज के सामने रखा है.

Mohan Bhagwat Vishwa Mangalya Sabha Contemporary Motherhood Ambedkar International Center Delhi Panchjanya

“मातृत्व की शाश्वत बातें युग के साथ नहीं बदलतीं” : सरसंघचालक

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने मातृत्व की मूल अवधारणा और उसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सृष्टि के आदिकाल से ही संपूर्ण जीव-जगत का आधार मातृत्व रहा है.

Mohan Bhagwat Vishwa Mangalya Sabha Contemporary Motherhood Ambedkar International Center Delhi Panchjanya

“मातृत्व की शाश्वत बातें वही रहती हैं, वे युग के अनुसार नहीं बदलतीं; बल्कि उन्हीं मूल्यों के कारण युग बदलने वाले महापुरुष जन्म लेते हैं। सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण और निरंतरता बिना मातृत्व के संभव ही नहीं है। मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसका विचार है, और उस विचार को सही दिशा देने का कार्य माता ही करती है।” – डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक, RSS

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उन्होंने आगे कहा कि माता ही बच्चे की पहली गुरु होती है और जीवनभर भावनात्मक संबल का सबसे बड़ा केंद्र बनी रहती है. आज के दौर में परिवार को समय देना और बच्चों से सतत संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बच्चे उपदेशों से नहीं बल्कि माता-पिता के आचरण का अनुकरण करके सीखते हैं.

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पश्चिमी अंधानुकरण के बजाय भारतीय परिवार व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत

अपने संबोधन में सरसंघचालक जी ने समाज में फैले भ्रमों और सांस्कृतिक चेतना पर भी विचार रखे:

सरसंघचालक जी के प्रमुख संदेश:

  • संस्कृति पर अटूट विश्वास: भारतीय संस्कृति के बारे में वर्षों तक भ्रम फैलाया गया, जबकि हमारी परंपराएं अत्यंत प्रबल और प्रत्यक्ष हैं. हमें अपने इतिहास और ज्ञान पर भरोसा रखना चाहिए.
  • विविधता में एकता: एकता ही सत्य है और विविधता के बीच एकात्म भाव ही भारतीय जीवनशैली का मूल संदेश है.
  • अंधानुकरण से बचाव: विदेशी जीवनशैली को बिना विचार किए अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाना समय की मांग है.

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14 देशों और 33 प्रांतों में फैली ‘विश्वमांगल्य सभा’ की यात्रा

23–24 जुलाई को विश्व युवक केंद्र में आयोजित उत्तर भारत की इस दो दिवसीय प्रबोधन बैठक में विभिन्न राज्यों की लगभग 280 प्रमुख महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

समापन सत्र में विभिन्न क्षेत्रों से आई 900 से अधिक प्रबुद्ध महिलाएं मौजूद रहीं, जबकि संवाद कार्यक्रम के लिए 2,000 से 2,500 महिलाओं ने अग्रिम पंजीकरण कराया था.

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संगठन का परिचय और प्रमुख उपलब्धियां:

  • स्थापना: 19 फरवरी 2010 को नागपुर में 600 वर्ष पुरानी श्री दत्त पीठ परंपरा के 18वें पीठाधीश्वर परम पूज्य आचार्य स्वामी जीतेंद्रनाथ जी महाराज के मार्गदर्शन में हुई.
  • वैश्विक विस्तार: भारत के 33 प्रांतों में सक्रिय होने के साथ-साथ अमेरिका और नीदरलैंड सहित विश्व के 14 देशों में संगठन कार्य कर रहा है.
  • विशाल जनसमर्थन: वर्तमान में लगभग 6 लाख मातृशक्ति इस संगठन से जुड़कर शिक्षा, संस्कार, सामाजिक जागरण और सेवा कार्यों में योगदान दे रही हैं.
  • व्यापक अभियान: वर्ष 2026 में संगठन ने देश के 23 प्रांतों में विशेष अधिवेशन आयोजित किए, जिनमें 37,000 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया.

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विश्वमांगल्य सभा “संस्कार, सामर्थ्य, सदाचार और सेवा” के चतुःसूत्री सिद्धांतों पर कार्य करते हुए “मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के संकल्प को साकार कर रही है.

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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