दिल्ली में जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर एक नोटिस तेजी से वायरल हो रहा था। उसमें दावा किया गया था कि दिल्ली पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे बिना अनुमति के दिल्ली से बाहर न जाएं। पुलिस ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया है। साथ ही पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे FRS (फेसियल रिकग्निशन सिस्टम) का भी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
क्या था वायरल मैसेज?
वायरल नोटिस पुलिस की तरफ से जारी होने जैसा दिखाया गया था। उसमें कहा गया था कि जंतर मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास सीसीटीवी और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से लोगों की पहचान की गई है। नोटिस में लिखा था कि 48 घंटे के अंदर लिखित जवाब देना होगा। बिना अनुमति के दिल्ली (एनसीटी) से बाहर नहीं जाना है। फोन पर नजर रखी जा रही है और 24 घंटे लोकेशन एक्सेस है। यह नोटिस आधिकारिक लगने के लिए पुलिस का नाम, वेबसाइट लिंक आदि भी इस्तेमाल किया गया था।
दिल्ली पुलिस का फैक्ट चेक?
26 जुलाई की रात दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया कि यह नोटिस पूरी तरह फर्जी है। पुलिस का कहना है कि ऐसे कोई निर्देश जारी नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि फेसियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके किसी को परेशान करने या किसी की आजादी पर गैरकानूनी रोक लगाने का कोई काम नहीं किया गया।
FACT CHECK : FAKE NOTICE ❌
A fake notice purportedly issued by Delhi Police falsely claims that Delhi Police is using a facial recognition system to harass people and unlawfully restrict their freedom.
This claim is false and misleading. Delhi Police has not unlawfully… pic.twitter.com/TCdwtnZGEp
— Delhi Police (@DelhiPolice) July 26, 2026
पुलिस ने लोगों से अपील की कि बिना जांचे किसी भी ऐसी खबर या नोटिस पर यकीन न करें और उसे आगे न फैलाएं। सिर्फ आधिकारिक सूत्रों से ही जानकारी लें।
एक और फर्जी खबर
इसके साथ ही एक वीडियो भी वायरल हो रहा था जिसमें दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस के डीसीपी सुमित झा ने छात्र प्रदर्शन के विरोध में इस्तीफा दे दिया। पुलिस ने इसे भी पूरी तरह फर्जी और AI से बनाया गया बताया। पुलिस लगातार ऐसे मिसइंफॉर्मेशन से लड़ रही है। इससे पहले भी उन्होंने पाकिस्तान से चल रहे कुछ हैंडल्स को ब्लॉक किया था जो गलत खबरें फैला रहे थे।

















