
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक के विषय पर देश के लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है और यह लाखों युवाओं के भविष्य व पीड़ा से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है.
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार इस संवेदनशील मामले में केवल संतोष मानकर बैठने वाली नहीं है, बल्कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ऐतिहासिक और अत्यंत कठोर कानूनी कदम उठाने जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले ढाई महीनों में सरकार द्वारा उठाए गए त्वरित और प्रभावी कदमों का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि जांच एजेंसियों ने पूरी सख्ती से कार्रवाई की है.
PM मोदी ने जारी किया वीडियो।
‘मैं जानता हूं, पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है,
हम पेपर लीक के एक भी आरोपी को नहीं छोड़ेंगे।
पेपर लीक को सरकार जल्द ही एक ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाने जा रही है जिससे भविष्य में पेपर लीक की संभावना खत्म हो जाए।’ pic.twitter.com/X9X3IEYHpN
— Panchjanya (@epanchjanya) July 23, 2026
प्रधानमंत्री के संदेश के प्रमुख बिंदु:
सफाई और पारदर्शिता को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने का संकल्प दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं मंत्रालयों और संबंधित विभागों को विशेष निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद देर रात एक ऐतिहासिक विधेयक का मसौदा (Draft Bill) तैयार कर लिया गया है.
“हम यहां पर संतोष मानने वाले लोगों में से नहीं हैं। मैंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के लिए विभागों को निर्देश दिए थे। विभागों ने देर रात मुझे इसका मसौदा सौंप दिया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कठोरतम सजा के प्रावधानों वाले इस मसौदे पर कैबिनेट में चर्चा कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।” – नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा कि कैबिनेट मंत्रियों के महत्वपूर्ण सुझावों के बाद इस विधेयक के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा. इसके पश्चात, जैसे ही संसद का दूसरा सप्ताह शुरू होगा, इस बिल को संसद के पटल पर रखा जाएगा.
सरकार का प्रयास रहेगा कि जल्द-से-जल्द इस कठोर विधेयक को दोनों सदनों में पारित कराया जाए, ताकि देश के शिक्षा तंत्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर किसी भी प्रकार का आंच न आ सके.