
नई दिल्ली। देशभर में नीट-यूजी (NEET-UG) और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच अब प्रदर्शन के तौर-तरीकों और उसके पीछे की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. जंतर-मंतर और राजधानी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में अपना चेहरा ढककर पुलिस बलों पर हमला करने, भीड़ को उकसाने और शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाने वाली तस्वीरों के सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है कि क्या वास्तव में यह आंदोलन सिर्फ शिक्षा सुधारों तक सीमित है या इसके पीछे कोई और एजेंडा काम कर रहा है?
Delhi Police officer. He is now in the ICU. pic.twitter.com/riswrj9BKM
— Shivam Dixit (@ShivamdixitInd) July 22, 2026
हालिया घटनाओं में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस कर्मियों पर पथराव किए जाने, सार्वजनिक व्यवस्था को ठप करने तथा प्रदर्शन के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और भारतीय सेना के प्रति अपमानजनक बयानबाजी व नारों की तस्वीरें सामने आने के बाद समाज का एक बड़ा वर्ग इस तरह की अराजकता पर आक्रोश व्यक्त कर रहा है.
विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक की रोकथाम निस्संदेह अत्यंत गंभीर विषय हैं, लेकिन भारत में पेपर लीक का इतिहास दशकों पुराना है. अतीत में भी ऐसी कई बड़ी घटनाएं हुई हैं, लेकिन उस दौर में इस तरह का हिंसक और प्रायोजित विरोध देखने को नहीं मिला:
अतीत की प्रमुख पेपर लीक घटनाएं:
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या केवल कुछ चुनिंदा मौकों पर राजनीतिक लाभ उठाने के लिए ‘सिलेक्टिव विरोध’ दर्ज कराया जा रहा है?
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ रोकने और एक फुल-प्रूफ पारदर्शी व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स एक्ट, 2024’ (Public Examinations – Prevention of Unfair Means Act, 2024) जैसा कड़ा कानून पारित किया है.
“नए कानून के तहत पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वाले संगठित अपराधियों एवं गिरोहों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल की सजा और न्यूनतम ₹1 करोड़ तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है, ताकि परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनी रहे।”
देश का हर नागरिक और छात्र समुदाय इस बात पर सहमत है कि पेपर लीक नहीं होना चाहिए और दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए. हालांकि, विरोध प्रदर्शन की आड़ में चेहरा ढककर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने, सुरक्षाबलों पर हमला करने और देश के आस्था केंद्रों व सशस्त्र बलों का अपमान करने वाले तत्वों को लेकर अब सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है.
जांच एजेंसियों और आम जनता की नजर अब उन उपद्रवियों पर है जो छात्रों के न्यायोचित मुद्दे को मोहरा बनाकर देश में अस्थिरता और वैमनस्य का माहौल पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं.