क्या आप जानते हैं… एक छोटे से किराये के कमरे से शुरू हुई एक पहल आज 29,000+ स्कूलों तक पहुंच चुकी है? साल 1952… गोरखपुर का पक्कीबाग। न बड़ा कैंपस, न करोड़ों का बजट-बस एक विचार। शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और चरित्र निर्माण को जोड़ने का यह प्रयोग धीरे-धीरे एक बड़े शैक्षणिक नेटवर्क में बदल गया। आज सरस्वती शिशु मंदिर की इस 75 साल की यात्रा को अमृत महोत्सव के जरिए याद किया जा रहा है। एक कमरा → एक विचार → 29,000+ स्कूल… आखिर कैसे बनी यह 75 साल की कहानी?
जानिए सरस्वती शिशु मंदिर की 75 साल की कहानी

















