
भोपाल (मध्य प्रदेश)। राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन स्थित प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवनवृत और विचारों पर आधारित बहुचर्चित महानाट्य “युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार” का गरिमामयी मंचन संपन्न हुआ. संस्कार भारती और मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का यह 54वां सफल मंचन रहा.
ढाई घंटे की इस प्रभावशाली और जीवंत नाट्य प्रस्तुति ने स्वाधीनता संग्राम के दौर में भारत की दशा और भविष्य की चिंताओं को जीवंत कर दिया. नागपुर की प्रसिद्ध संस्था ‘नादब्रह्म’ द्वारा रचित यह नाटक पूरे संघ इतिहास के बजाय विशेष रूप से डॉ. हेडगेवार के जीवन, उनके प्रश्नों, राष्ट्रवादी संघर्ष और वैचारिक यात्रा पर केंद्रित है.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महानाट्य के मंचन के पश्चात अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रवादी विचार के प्रणेता डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को स्वतंत्रता मिलने से पहले ही उसे अक्षुण्ण रखने के महत्व को गहराई से समझ लिया था.
“डॉ. हेडगेवार ने देशभक्ति के साथ-साथ समाज को समरसता और समानता का अनूठा दर्शन दिया। वे दूरदर्शी सोच के साथ रचनात्मक प्रकल्प संचालित करते थे। उनका समता का भाव ही आज का भारत अंगीकार कर रहा है। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में जो कदम उठाए जा रहे हैं, वह भी इसी समानता के मूल दर्शन से प्रेरित हैं।” – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान ‘एक विधान’ से है. डॉ. हेडगेवार ने स्वाधीनता आंदोलन के कठिन दौर में केवल ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के भाव का प्रकटीकरण ही नहीं किया, बल्कि लाखों नागरिकों को निस्वार्थ राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी.
मंच पर बीती सदी के उन महान नायकों को एक साथ देखना दर्शकों के लिए अत्यंत रोमांचक और प्रेरक रहा, जिन्होंने भारतीय इतिहास को दिशा दी— महर्षि अरविंदो, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, स्वातंत्र्यवीर सावरकर और मोहनदास करमचंद गांधी.
नाट्य दृश्यों में दर्शाया गया कि नागपुर और कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशनों के दौरान डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्र हित में कुछ मौलिक प्रश्न उठाए थे:
महानाट्य के मुख्य वैचारिक बिंदु:
इस महानाट्य के माध्यम से एक सदी के इतिहास को जीवंत करने में ‘नादब्रह्म’ संस्था का सराहनीय योगदान रहा. नाटक के निर्माता पद्माकर धानोरकर, लेखक डॉ. अजय प्रधान, निर्देशक सुबोध सुर्जिकर और संगीत निर्देशक शैलेष दाणी के कुशल मार्गदर्शन में 40 दक्ष कलाकारों की टीम ने अद्वितीय मंचन किया. बैकड्रॉप तकनीक, प्रभावशाली संवादों और सधे हुए संगीत ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा.
कार्यक्रम को संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी हेमंत मुक्तिबोध ने भी संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. हेडगेवार का संपूर्ण जीवन राष्ट्र निष्ठा और कर्म आधारित जीवन का अप्रतिम स्वरूप था.
इस अवसर पर मंच पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी अशोक पांडे, प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेता व निर्देशक राजीव वर्मा, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, शशि भाई सेठ, संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव, संस्कार भारती के रवींद्र सहस्त्रबुद्धे सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक और रंगकर्मी उपस्थित रहे.