एक समय था, जब आज के पाकिस्तान के मुल्तान में सूर्यदेव को समर्पित एक ऐसा भव्य मंदिर मौजूद था, जिसकी कहानी हजारों साल पुरानी बताई जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब ने सूर्य उपासना के लिए 12 सूर्य मंदिरों की स्थापना की थी और मुल्तान का सूर्य मंदिर उन्हीं में से एक था।
कहा जाता है कि यह मंदिर करीब 5000 वर्ष पुरानी परंपरा से जुड़ा था और कभी अपनी भव्यता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। लेकिन इतिहास के लंबे सफर में आक्रमणों और समय के थपेड़ों ने इस मंदिर को धीरे-धीरे नष्ट कर दिया। और फिर आया 1947 का विभाजन- जिसने केवल सीमाएं ही नहीं बदलीं, बल्कि मुल्तान से जुड़ी इस प्राचीन हिंदू विरासत की बची-खुची स्मृतियों को भी लगभग हमेशा के लिए मिटा दिया। आज वहां उस मंदिर का कोई पूर्ण या सक्रिय स्वरूप मौजूद नहीं है। बची है तो सिर्फ उसकी कहानी एक ऐसे सूर्य मंदिर की, जिसे हमने खो दिया।
हमने खोया – मुल्तान स्थित सूर्य मंदिर
श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब से जुड़ी मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब ने सूर्य उपासना के लिए 12 सूर्य मंदिरों की स्थापना की थी। इन्हीं में से एक प्रमुख सूर्य मंदिर मुल्तान का माना जाता है।
5000 वर्ष पूरी हुई थी स्थापना
मुल्तान स्थित यह सूर्य मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा सूर्य मंदिर था। इस सूर्य मंदिर का इतिहास करीब 5000 साल पुराना है।

विभाजन ने अंतिम स्मृतियाँ भी छीन लीं
सूर्य मंदिर विभाजन से बहुत पहले (मध्यकाल में) मुख्य रूप से नष्ट हो चुका था, लेकिन 1947 का विभाजन उसकी अंतिम स्मृति और हिंदू उपस्थिति को हमेशा के लिए मिटा गया। आज पाकिस्तान में इसका कोई सक्रिय या पूर्ण रूप नहीं बचा।

















