देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और नकल के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने कानून को और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दो दिनों तक चली लंबी चर्चा और हंगामे के बाद लोकसभा ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया। इसके बाद राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा की जाएगी। इस नए संशोधन का मकसद परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न कर सके।
पेपर लीक पर सख्त सजा, एजेंसियों पर भी कड़ी कार्रवाई
इस संशोधन के तहत अब पेपर लीक जैसे अपराधों पर पहले से कहीं अधिक सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। पहले जहां दोषी को 3 से 5 साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता था, वहीं अब जेल की अवधि बढ़ाकर 10 साल तक और जुर्माना 50 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। सरकार ने परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है। यदि कोई एजेंसी लापरवाही या गड़बड़ी की दोषी पाई जाती है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के लिए भी कानून और कठोर किया गया है। अब ऐसे मामलों में कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मामलों की तेज जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाई जाएगी और जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों और विशेष लोक अभियोजकों की व्यवस्था भी की गई है। वहीं, फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ अपील हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ सुनेगी और तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करने का प्रयास होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों को और मजबूत बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की भी घोषणा की है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। कुल मिलाकर, यह संशोधन छात्रों के हितों की रक्षा करने और परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

















