सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: EC शंकास्पद नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन नागरिकता तय नहीं कर सकता
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: EC शंकास्पद नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन नागरिकता तय नहीं कर सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग शंकास्पद नागरिकता वाले लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है लेकिन नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं रखता। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रशांत बोस द्वारा दायर PIL पर सुनवाई में कोर्ट ने EC और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 18, 2026, 07:45 am IST
inभारत
Supreme Court Cast Census

देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई चल रही है। इसी क्रम में एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग (EC) को शंकास्पद नागरिकता वाले लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन EC खुद यह फैसला नहीं कर सकता कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं।

मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एस. सूर्य कांत और जस्टिस जोयमलया बागची व वी. मोहना की बेंच ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए की। मामला एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद कई लोगों को राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

PIL किसने की थी दायर?

यह PIL पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चेयरपर्सन और जॉइंट फोरम अगेंस्ट NRC के कन्वीनर प्रशांत बोस ने दायर किया है। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से दलीलें रखीं।

इसे भी पढ़ें: गाजियाबाद में गरजे सीएम योगी: बोले- बम बनाने वालों को होती थी शिवभक्तों की ‘बम-बम’ से तकलीफ 

कोर्ट ने पहले भी क्या कहा था?

कोर्ट ने याद दिलाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान भी उसने बार-बार यही कहा था कि चुनाव आयोग नागरिकता का फैसला करने वाली संस्था नहीं है। बेंच ने कहा, “हमने EC को निर्देश दिया था कि शंकास्पद नागरिकता वाले लोगों की सूची केंद्र सरकार को भेज दी जाए, क्योंकि नागरिकता तय करना केंद्र का काम है।”

अपीलों की स्थिति क्या है?

एडवोकेट शंकरनारायणन ने बताया कि SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ करीब 33 लाख लोगों ने अपील की है। अब तक अपीलेट ट्रिब्यूनल ने सिर्फ 30,000 अपीलों का निपटारा किया है, जिनमें से 70 प्रतिशत में अपील स्वीकार कर ली गई और नाम वोटर लिस्ट में दोबारा शामिल करने के निर्देश दिए गए। याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 1 प्रतिशत अपीलों का ही फैसला हो पाया है। इतनी धीमी रफ्तार से यह प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और कई लोग लंबे समय तक सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं।

कल्याणकारी योजनाओं पर असर

मुख्य मुद्दा यह है कि नाम हटने के बाद कुछ लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज और अन्नपूर्णा योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार EC के फैसले को अंतिम मानकर इन्हें नागरिकता से ही वंचित समझ रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि जिन लोगों ने अपील दायर कर दी है, उन्हें राशन और अन्नपूर्णा योजना का लाभ जारी रहेगा। बहरहाल मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

Topics: सुप्रीम कोर्टएसआईआरSIR पश्चिम बंगालसुप्रीम कोर्ट EC वोटर लिस्टशंकास्पद नागरिकता वोटर लिस्ट
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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