हैदराबाद। हैदराबाद में आयोजित तीन दिवसीय 15वें ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम में सदस्य देशों के श्रमिक संगठनों ने कुल 41 प्रस्तावों वाली विस्तृत मसौदा घोषणा जारी की। लचीलापन,नवाचार के लिए निर्माण, सहयोग और स्थिरता विषय पर आधारित इस घोषणा में बदलती कार्य व्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम के दूसरे दिन तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला बतौर मुख्यतिथि उपस्थित रहे।
फोरम ने स्पष्ट किया कि तकनीकी और आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे तथा कोई भी श्रमिक विकास की प्रक्रिया से पीछे न छूटे। घोषणा में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, रोबोटिक्स और डिजिटल प्लेटफार्म तेजी से काम की दुनिया को बदल रहे हैं। इनसे नए अवसर पैदा हो रहे हैं, लेकिन रोजगार की अनिश्चितता, श्रमिक अधिकारों, निजता, बढ़ती असमानता और डिजिटल बहिष्करण जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इसलिए तकनीक का उपयोग मानव हित, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक रोजगार को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। सरकारों से श्रमिक हितों की रक्षा करने वाले पारदर्शी और जवाबदेह कानून बनाने की अपील की गई है।

घोषणा में डिजिटल और प्लेटफार्म अर्थव्यवस्था में कार्यरत श्रमिकों के लिए समान अधिकार, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार को सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय कानूनों को मजबूत करने और श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
महिलाओं, सामाजिक सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर
मसौदा घोषणा में महिला श्रमिकों को आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण भागीदार बताते हुए उनकी कार्यबल में भागीदारी और नेतृत्व बढ़ाने की सिफारिश की गई है। समान काम के लिए समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, सस्ती बाल देखभाल सेवाएं, मातृत्व सुरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा, डिजिटल कौशल तथा महिला उद्यमियों को वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। कार्यस्थल पर भेदभाव, हिंसा और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रभावी कानूनी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई।
फोरम ने सामाजिक सुरक्षा को प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार बताते हुए नियमित, असंगठित, स्वरोजगार, प्रवासी, कृषि और प्लेटफार्म श्रमिकों सहित सभी के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली लागू करने का आह्वान किया। साथ ही जीवन भर सीखने, पुनः प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और डिजिटल शिक्षा को बदलती अर्थव्यवस्था की आवश्यकता बताया गया।
हरित अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में घोषणा में कहा गया कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित उद्योगों की ओर बढ़ते समय श्रमिकों के हितों की रक्षा की जाए। प्रभावित श्रमिकों को पुनः प्रशिक्षण, नए रोजगार और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराकर न्यायपूर्ण बदलाव सुनिश्चित किया जाए।
41 प्रस्तावों में वैश्विक सहयोग और स्थायी विकास का रोडमैप
घोषणा के अंतिम प्रस्तावों में ब्रिक्स देशों के बीच ट्रेड यूनियनों के संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने, श्रम क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के नियमित संग्रह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कार्य व्यवस्था और कौशल विकास के लिए ब्रिक्स ट्रेड यूनियन नेटवर्क बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ और अन्य वैश्विक संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है।
फोरम ने सतत विकास के लिए वित्तीय सहयोग, न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका मजबूत करने, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने, श्रमिक संगठनों की नीति निर्माण में नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने तथा अनुभव, अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षण के आदान प्रदान को बढ़ाने पर भी जोर दिया। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता, संवाद और सहयोग को अच्छे रोजगार और समावेशी विकास की अनिवार्य शर्त बताया गया। 41 प्रस्तावों वाली इस मसौदा घोषणा का समग्र संदेश है कि आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और सामाजिक न्याय एक दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स देशों को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करें, समान अवसर उपलब्ध कराएं, महिलाओं और कमजोर वर्गों को सशक्त बनाएं तथा तकनीकी बदलाव के दौर में हर व्यक्ति को सम्मानजनक, सुरक्षित और टिकाऊ रोजगार सुनिश्चित करें।

















