बांग्लादेश के गायबांधा जिले से सामने आया एक मामला इन दिनों काफी चर्चा में है। भगवान राम की 81 फीट ऊँची प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव रखने वाले हरिदास चंद्र तरणी दास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद देश के कई मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ बिना पर्याप्त आधार के अन्याय नहीं होना चाहिए।
हरिदास की गिरफ्तारी पर विवाद
बताया जा रहा है कि हरिदास ने पलाशबाड़ी उपजिला स्थित श्री श्री राधा गोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की 81 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव हिंदू समुदाय की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा माना जा रहा था। लेकिन इसी दौरान उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की ओर से कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है, जबकि कई सामाजिक संगठनों ने इस पर सवाल उठाए हैं। ‘बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद’ का आरोप है कि हरिदास लंबे समय से कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर थे। परिषद का कहना है कि कुछ सांप्रदायिक संगठन इस प्रतिमा के निर्माण का लगातार विरोध कर रहे थे और हरिदास को धमकियां भी मिल रही थीं। उनका दावा है कि प्रशासन को पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया गया।
इस घटना के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि हर नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार अपनी बात रखने और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति पर कोई आरोप लगाया जाता है, तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। केवल आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
















