नई दिल्ली: मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को UCC विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में कहा कि जो हिंदू की बात करेगा, वही राज करेगा। समानता भारतीय संस्कृति का मूल है और भगवान की दृष्टि में सभी समान हैं। इसलिए कानून भी सभी नागरिकों के लिए एक जैसा होना चाहिए। UCC लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई नए प्रावधान लागू होंगे।
UCC सभी समुदायों में केवल एक ही शादी को अनिवार्य बनाती है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। इसमें मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित किया गया है।
हलाला दंडनीय अपराध…संपत्ति पर बेटा-बेटी का अधिकार समान
UCC में मुस्लिम महिलाओं को यह अधिकार दिया गया है कि अगर उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है। इसमें निकाह और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण न होने पर शादी अमान्य नहीं होगी। रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। इसमें हलाला को दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा। बच्चों के अधिकार और कस्टडी को लेकर संहिता में ‘अवैध संतान’ की अवधारणा समाप्त कर दी गई है।
UCC में बेटे और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो।
‘जो हिंदू की बात करेगा वही राज करेगा’, MP में UCC बिल पास होने पर CM मोहन यादव ने क्यों कही ये बात?
UCC बिल में लिव-इन पर क्या है?
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता/अभिभावकों को भेजी जाएगी।
लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा। उन्हें भी पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन रिलेशनशिप में एक महीने से अधिक साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना का प्रावधान है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है। UCC कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे कि भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा।

















