
मालेगांव में लैंड जिहाद का विरोध करते हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता
महाराष्ट्र के मालेगांव में लैंड जिहाद का मामला गरमाया हुआ है। यहां 19 एकड़ आरक्षित सरकारी जमीन के हस्तांतरण को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जन आक्रोश मार्च निकाला और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व विवादित लेन-देन को रद्द करने की मांग की। संगमेश्वर एवं कलेक्टर पट्टा बचाओ कृति समिति और सकल हिंदू समाज की ओर से निकाला गया यह मार्च गुरुवार (2 जुलाई) को श्रीराम मंदिर, श्रीराम सेतु पुल से शुरू होकर मालेगांव महानगरपालिका मुख्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शन में हिंदू कार्यकर्ता हर्षा ठाकुर, शुभांगी शिंदे सहित कई लोगों ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि महानगरपालिका ने जिस 19 एकड़ जमीन को पहले खेल का मैदान, महिला अस्पताल और स्कूल जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित किया था, उसका अवैध हस्तांतरण कर दिया गया। उनका कहना है कि इस आरक्षण को बरकरार रखा जाए और संबंधित लेन-देन को तत्काल निरस्त किया जाए। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस भूमि पर कब्जे के पीछे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण रहा है। नबी अहमद ने मुस्लिम मेयर से मिलकर सरकारी जमीन पर कब्जा किया था। इनकी मंशा साफ है मुस्लिम मेयर बने या जज, होगा सिर्फ जिहाद। हिंदू संगठनों ने जिला प्रशासन और महानगरपालिका आयुक्त से मांग की कि विवादित 19 एकड़ जमीन को सरकार के नियंत्रण में वापस लिया जाए व उस पर पूर्व निर्धारित (खेल का मैदान, महिला अस्पताल और स्कूल) आरक्षण बरकरार रखा जाए।
हर्षा ठाकुर ने मार्च को संबोधित करते हुए मालेगांव महानगरपालिका का नाम उर्दू में लिखे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, ”ये पाकिस्तान नहीं मालेगांव का महानगरपालिका है, जहां उर्दू में नाम लिखा है, क्योंकि यहां का मेयर मुस्लिम है। इसका उर्दू में नाम हटाया जाए। मालेगांव में हिंदू रहते हैं।” सोशल मीडिया पर हिंदू जन आक्रोश मोर्चा का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया।
मई 2026 में भाजपा लीगल सेल के शहर के अध्यक्ष एडवोकेट योगेश निकम ने दावा किया था कि मालेगांव में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध मस्जिद, कब्रगाह और बूचड़खाने बनाए गए हैं। योगेश निकम ने यह भी आरोप लगाया था कि मालेगांव में सुनियोजित तरीके से जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है और यह सिर्फ सामान्य विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की थी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।