
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI generated image)
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने फारस की खाड़ी के तट पर अपनी विशेष सैन्य टुकड़ियों की तैनाती बढ़ा दी है। इन बलों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की पहले से पहचान करना और उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखना है। सूत्रों के अनुसार, IRGC ओमान के माध्यम से जहाजों के रूट, समय-सारिणी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी हासिल करने की कोशिश कर रहा है, ताकि दक्षिणी समुद्री मार्ग पर उसकी निगरानी और प्रभाव मजबूत हो सके।
बताया जा रहा है कि इन विशेष बलों के पास अत्याधुनिक निगरानी उपकरण मौजूद हैं। इनमें तटीय निगरानी चौकियां, नौसैनिक प्रणाली और हवाई निगरानी संसाधन शामिल हैं। इनका कार्य दक्षिणी मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की पहले से पहचान करना और आवश्यकता पड़ने पर चेतावनी जारी करना है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का अधिकृत मार्ग वही है जिसे उसने निर्धारित किया है, जबकि ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन दक्षिणी मार्ग के उपयोग की सिफारिश कर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद अस्थायी रूप से तनाव कम करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच ओमान की मध्यस्थता में बातचीत जारी है, लेकिन इसके समानांतर ईरान समुद्री गतिविधियों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है।
हाल ही में ओमान के तट के पास दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे सिंगापुर के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने इस तनाव को और बढ़ा दिया। इस हमले में जहाज के पुल को नुकसान पहुंचा, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर कार्रवाई की, जबकि ईरान ने भी जवाबी सैन्य कदम उठाए। इस घटनाक्रम ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से वैश्विक चिंता का केंद्र बना दिया है। वर्तमान में जहाजों के लिए तीन संभावित समुद्री मार्ग सामने हैं- ओमान के तट के निकट दक्षिणी मार्ग, पहले उपयोग में आने वाला मध्य मार्ग तथा ईरान के नियंत्रण वाला उत्तरी मार्ग। हालांकि मध्य मार्ग अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा, इसलिए अधिकांश जहाज दक्षिणी और उत्तरी मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। इससे जहाजरानी कंपनियों के सामने सुरक्षा और परिचालन संबंधी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।