यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के कारण रूस में ईंधन की कमी चल रही है। यूक्रेन के हमलों की वजह से वहां की रिफाइनरी और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में रूस ने भारत की नयारा एनर्जी की बनाई हुई गैसोलीन (पेट्रोल) खरीदी है। ये खरीदारी सीधे नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स के रास्ते हुई है।
क्या कहती है रिपोर्ट
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो सूत्रों ने बताया कि नयारा एनर्जी की गैसोलीन ट्रेडर्स के जरिए रूस भेजी गई। कल ही रॉयटर्स ने बताया था कि रूस भारत से समुद्री रास्ते से पेट्रोल आयात कर रहा है, लेकिन उसमें रिफाइनरी का नाम नहीं लिया गया था। अब ये साफ हो गया कि सप्लायर नयारा है। नयारा एनर्जी ने अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है।
पेट्रोलियम मंत्री का बयान
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय कंपनियां रूस को सीधे ईंधन नहीं बेच रही हैं। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि रूसी खरीदार ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए भारतीय ईंधन ले सकते हैं।
नयारा पर EU के प्रतिबंध
जुलाई 2025 में यूरोपीय संघ ने नयारा पर प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद कंपनी को कच्चा तेल खरीदने और तैयार ईंधन बेचने में दिक्कत होने लगी। पेमेंट्स जटिल हो गए। इसलिए अब नयारा ट्रेडर्स पर ज्यादा निर्भर है। नयारा का 4 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाला रिफाइनरी गुजरात के वडिनार में है। प्रतिबंधों के बाद दूसरे सप्लायर्स हट गए, अब ये रिफाइनरी सिर्फ रूसी कच्चे तेल को ही प्रोसेस करती है।
कितनी मात्रा गई रूस?
रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, भारत से रूस को कम से कम 60,000 मीट्रिक टन गैसोलीन पहले ही भेजी जा चुकी है। एक सूत्र ने बताया कि दो कार्गो भेजे गए, हर एक में 30,000 से 40,000 मीट्रिक टन थी। दावा गया है कि’अग्नि’ नाम का टैंकर 20 जून को वडिनार से गैसोलीन लोड करके फुजैराह (UAE) के लिए रवाना हुआ था। लेकिन वेसल ट्रैकिंग डेटा (LSEG) के मुताबिक, जहाज फुजैराह से आगे निकल गया, सुएज नहर से गुजरा और उत्तर की ओर बढ़ गया।
नयारा एनर्जी में रूसी ऑयल कंपनी रोज़नेफ्ट की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ये कंपनी भारत में प्राइवेट रिफाइनर है और वडिनार रिफाइनरी चलाती है।











