विश्व

ईरान की जेल में तड़प रही गजल मर्जाबान: इस्लाम छोड़ने पर मिली 9 साल की सजा, हफ्ते भर से भूख हड़ताल पर महिला!

ईरान की एवीन जेल में बंद गजल मर्जाबान ने अपनी 9 साल की सजा के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू कर दी है। जानिए कौन हैं गजल और क्यों ईरान में उन पर यह अत्याचार हो रहा है।

Published by
सोनाली मिश्रा

ईरान में एक महिला ग़ज़ल मर्ज़बान एवीन जेल में भूख हड़ताल पर हैं। यूं तो ईरान में लड़कियों के मामलों को लेकर ऐसी कहानियाँ सामने आती रहती हैं, मगर फिर भी ग़ज़ल मर्ज़बान की कहानी कुछ अलग है। ग़ज़ल मर्ज़बान को 9 साल की सजा दी गई है।

मगर यह सजा क्यों दी गई है?

अब यह प्रश्न उठता है कि उन्हें यह सजा क्यों दी गई है? 9 साल की लंबी सजा के लिए उन्होनें क्या किया था? ग़ज़ल को यह सजा “देश के खिलाफ प्रोपोगैंडा चलाने” और “राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ इकट्ठा होने” मे दोषी पाने पर दी गई है।

कौन है गज़ल मर्ज़बान?

ग़ज़ल मर्ज़बान दरअसल वह महिला हैं, जिन्होनें इस्लाम छोड़कर ईसाई पंथ अपनाया है। और अधिकारियों ने उनके घर पर छापा मारकर बाइबिल और ईसाई साहित्य जब्त किया था।

मर्ज़बान सात वर्ष पहले ही ईसाई पंथ अपनाया था, और उसके बाद से ही उन्हें और पार्किंसन से पीड़ित उनके पति को गिरफ्तार कर लिया था। गजल को पहले भी उनकी गतिविधियों के कारण गिरफ्तार किया जा चुका है।

ईसाई पंथ मे मतांतरित होने पर सजा

ईरान मे यदि कोई मुसलमान गैर मुसलमान बंता है या कहें ईसाई बनता है, तो उसकी ज़िंदगी का नरक बनना तय होता है। और हाल ही के साल में इस ईसाई मतांतरित महिला के सामने भी कई समस्याएं आईं, जिनमें से उसके पति को पार्किंसन्स की दवाई लेने मे भी कठिनाई जैसी घटनाएं हुईं। और उन्हें यह दवाई इसलिए नहीं मिली थी, क्योंकि गजल ने एक गैर मुसलमान से शादी कर ली थी।

कब किया था गिरफ्तार

उन्हें 15 जनवरी 2026 को तेहरान में उनक्से घर से सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था और उन्हें जांच प्रक्रियाओं के बाद एवी केल भेजा गया था।

अब उन्हें नौ साल और आठ महीने की सजा सुनाई गई है। गजल का कहना है कि उनका अपराध इतना बड़ा नहीं है कि उन्हें इतनी गंभीर सजा दी जाए! उन्होनें 25 मई 2026 को उनके खिलाफ आए हुए फैसले के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है और इसी क्रम में उन्होनें भूख हड़ताल कर दी और अब उन्हें भूख हड़ताल पर बैठे हुए एक सप्ताह से अधिक हो गया है। और खाने के बिना उनकी शारीरिक स्थिति बहुत ही खराब होती जा रही है।

ईरान में महिलाओं के साथ अत्याचार आम

यदि यह कहा जाए कि ईरान में महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार आम हैं, तो गलत नहीं होगा। शासन का नेतृत्व भले ही बदला हो, मगर महिलाओं के लिए समय वहीं का वहीं ठहरा हुआ है। जनवरी 2026 में जब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे, उसके बाद से महिलाओं पर गाज गिर रही है और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।

उन्हें लगातार सजाएं दी जा रही हैं। जहरा जमाली नामक महिला को जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था, और वे भी अभी एवीन जेल में हैं और उन्हें 6 महीने की कैद की सजा सुनाई है।

इसी जेल में महसा नूरी को भी जनवरी 2026 में देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों मे भाग लेने के कारण गिरफ्तार किया गया था और वे इस अपराध के लिए पाँच साल की सजा काट रही हैं।

wncri.org के आंकड़ों के अनुसार कई लड़कियां और महिलाओं को सजा दी जा चुकी है। इसी जेल में अफसाना तवाना भी हैं, जिन्हें देश के विरोधी समूहों के समर्थन में प्रोपोगैंडा गतिविधियों के आरोप मे बंद हैं। इसी जेल में तकतोम गोलमकानी महिला वार्ड में पाँच साल की सज़ा काट रही हैं। उनकी गिरफ़्तारी और सज़ा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर उनकी गतिविधियों से जुड़ी थी। उन्हें जून 2026 में गिरफ़्तार किया गया था और एविन जेल के वार्ड 209 में भेज दिया गया था।

सरकार बदलने के बाद जहां यह कहा जा रहा था कि ईरान में महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी, मगर हालात सुधरे नहीं हैं। फ़ैज़ह सलहबंदी को भी एक साल तीन महीने की सजा सुनाई गई है थी। हालांकि उन्हे जमानत पर रिहा करने के लिए प्रशासन तैयार था, मगर उनके परिवार ने चार मिलियन तोमा को जमा करने में असमर्थता जाहिर कर दी थी और अभी वे जेल में है।

मशहद की रहने वाली 30 साल की महिला हनियाह सरबोर्ज़ी की गिरफ़्तारी को 40 से ज़्यादा दिन हो चुके हैं। उन्हें जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में हिरासत में लिया गया था और अभी वह मशहद की वकीलआबाद जेल में बंद हैं। यह और भी बड़ी विडंबना है कि एक छोटे बच्चे की माँ हनियाह सरबोर्ज़ी, को गिरफ़्तारी के बाद से न तो फ़ोन पर बात करने दी गई है और न ही परिवार से मिलने दिया गया है।

उन पर मुख्य आरोप ‘बाघी’ (हथियारबंद विद्रोह) का है, जो धार्मिक शासन के कानून के तहत सबसे गंभीर आपराधिक आरोपों में से एक है। इस आरोप में मौत की सज़ा समेत कड़ी सज़ा हो सकती है।

कोबरा नारोई की गिरफ़्तारी उनके एक साल के बेटे के साथ हुई

20 जून 2026 को, 37 साल की कोबरा नारोई और उनके एक साल के बच्चे, सामन नारोई को गिरफ़्तार कर लिया गया। सरकारी सुरक्षा बलों ने करमान प्रांत के रुदबार-ए-जुनूब काउंटी के हैदरबाद गाँव में उनके घर पर छापा मारा था। इसके बाद उन्हें किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया।

यह गिरफ़्तारी तब हुई जब उनके पति, महमूद नारोई, घर पर नहीं मिले। पति को सरेंडर करने के लिए मजबूर करने के मकसद से पत्नी और बच्चे को बंधक बना लिया गया है।

ये कुछ ही मामले हैं, मगर गजल का और अन्य लड़कियों का मामला कुछ अलग है क्योंकि गजल जहाँ ईसाई पंथ मे जाने के कारण हिरासत में हैं तो वहीं शेष मामले वे हैं, जिन्होनें दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था।

मगर एक बात सभी मामलों मे सच है और वह है, जिन्हें भी गिरफ्तार किया गया है, उनमें से अधिकतर लड़कियां हैं।

Share

Recent News