पश्चिम बंगाल : सड़क 'मरहम' की
October 19, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल : सड़क ‘मरहम’ की

पश्चिम बंगाल में 'सुहरावर्दी' शब्द उस घाव को ताजा करता है, जिसे हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने दिया था। कोलकाता नगर निगम ने 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी रोड' कर उस घाव पर मरहम लगाने का प्रयास किया है। यही कारण है कि कोलकाता के लोगों ने इस नामकरण का स्वागत किया है

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Jul 2, 2026, 03:31 pm IST
inपश्चिम बंगाल

सत्ता परिवर्तन के साथ ही पश्चिम बंगाल में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। पश्चिम बंगाल के हिंदू नायक गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा को 80 वर्ष बाद आखिरकार वह सम्मान मिल ही गया, जिसके वे असली हकदार थे। कोलकाता नगर निगम ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए पार्क सर्कस इलाके की एक प्रमुख सड़क का नाम ‘सुहरावर्दी एवेन्यू’ से बदलकर ‘गोपाल मुखर्जी रोड’ कर दिया है। इसे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि गोपाल मुखर्जी ऐसे निडर व्यक्ति थे, जो हजारों बेगुनाहों के रक्षक के तौर पर सामने आए थे। ऐसे सच्चे हिंदू-रक्षकों का सम्मान करके ऐतिहासिक न्याय को बहाल किया गया है।

लेकिन विपक्ष ने इस नाम परिवर्तन का विरोध किया है। विशेषकर तृणमूल और कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि ‘सुहरावर्दी एवेन्यू’ शिक्षाविद् हसन शाहिद सुहरावर्दी के नाम पर था, न कि हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर। वहीं भाजपा का कहना है जिन गोपाल मुखर्जी के नाम पर सड़क का नामकरण किया गया है, वे हिंदुओं के रक्षक थे। इसलिए विपक्ष इस नामकरण का विरोध कर रहा है। वास्तव में ‘सुहरावर्दी’ नाम से टीस ताजा हो जाती है। वह टीस, जिसे आज भी पश्चिम बंगाल के लोग भूले नहीं हैं। बता दें कि हसन शाहिद सुहरावर्दी उस हुसैन शहीद सुहरावर्दी के चाचा थे, जिसने बंगाल के ‘प्रधानमंत्री’ के नाते कलकत्ता में हिंदुओं का नरसंहार करवाया था।दरअसल, मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग के लिए 16 अगस्त, 1946 को पूरे देश में ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की घोषणा की थी। उस समय बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार थी और उसका ‘प्रधानमंत्री’ हुसैन शहीद सुहरावर्दी था। 16 अगस्त, 1946 को हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने कोलकाता में एक सभा का आयोजन किया, जिसमें करीब 2 लाख मुसलमान शामिल हुए थे।

इस भीड़ के सामने हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने बहुत ही भड़काऊ भाषण दिया था। इसके बाद भीड़ भड़क गई और अगले 24 घंटे में कोलकाता की सड़कें हिंदुओं की लाशों से भर गई थीं। दंगाइयों की भीड़ कोलकाता की जिस भी सड़क से गुजरी वहां मौत की निशानियां छोड़ती गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 10,000 से 20,000 हिंदू मारे गए थे। यही कारण है कि सुहरावर्दी नाम सामने आते ही कलकत्ता का नरसंहार याद आ जाता है।वहीं दूसरी ओर गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर हजारों हिंदुओं की जान बचाई थी। इसी कारण से इतने साल बाद भी कोलकाता के लोग गोपाल मुखर्जी को नहीं भूले हैं और आज भी लोग उन्हें ‘कोलकाता रख्ता’ यानी ‘कोलकाता का रखवाला’ कहते हैं। इसलिए जब उनके नाम पर सड़क का नामकरण किया गया तो मानो कोलकाता नगर निगम ने उस घाव पर मरहम लगाया, जिसे हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने दिया था।

इस्लामी हुकूमत की मांग

‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के लिए एक पर्चा बांटा गया था। 1949 में प्रकाशित न्यायमूर्ति जीडी खोसला की पुस्तक ‘स्टर्न रेकनिंग’ में इस पर्चे के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। पुस्तक के अनुसार, “उस दिन कोलकाता में बांटे गए पर्चों में मुस्लिम लीग ने लिखा था कि ये बदकिस्मती है कि हिंदुस्तान में हम 10 करोड़ मुसलमान होने के बावजूद हिंदुओं और अंग्रेजों के गुलाम बन गए हैं। दुआ कीजिए कि हम मजबूत बनें और काफिरों पर जीत हासिल करें। हम हिंदुस्तान में इस्लामी हुकूमत कायम करें और इस जिहाद के लिए कुर्बानी दें। अल्लाह की मर्जी से हम हिंदुस्तान में दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामी मुल्क कायम करने में कामयाब होंगे। जो जन्नत में जाने का अरमान रखते हैं वे भी आगे आएं। जन्नत का चमकता हुआ दरवाजा आपके लिए खुल चुका है।” इन पर्चों में आगे लिखा था, “हम सब यानी मुसलमान हजारों की तादाद में इस जन्नत में दाखिल होंगे। इस हिंदुस्तान में मुसलमानों के सर पर ताज था। मुसलमानो! सोचो फिर आज हम काफिरों के गुलाम क्यों हैं? कत्लेआम होगा। हम हाथ में तलवार लेकर फख्र के साथ काफिरों पर जीत हासिल करेंगे और आगे अंत में लिखा हुआ था कि ‘डायरेक्ट एक्शन डे’कयामत का दिन होगा।”

मुसलमानों को दी खुली छूट

16 अगस्त, 1946 को कोलकाता के परेड मैदान में जो रैली हुई थी, उसमें हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने मुसलमानों को खुली छूट देने का ऐलान कर दिया था। उसने कहा था कि जिसकी जो इच्छा है करो, उसे पुलिस नहीं रोकेगी। रैली से निकली मुसलमानों की भीड़ बहुत संगठित और तैयारी में थी। कुछ ही समय में कोलकाता की सड़कों पर ट्रक और लारियां दौड़ने लगीं।

उनमें मुस्लिम लीग के गुंडे सवार थे। उन वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल सुहरावर्दी ने सरकारी खर्चे से इंतजाम करवाया था। सुहरावर्दी ने पूरी तैयारी कर रखी थी और ये लोग जगह-जगह जाकर हिंदू बस्तियों में खून की नदियां बहा रहे थे। पुलिस भी इन्हें नहीं रोक रही थी, क्योंकि कोलकाता के 24 थानों में से 22 के थानेदार मुसलमान थे और उन्हें ऐसा करने के लिया दिशा-निर्देश था। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग किसी पर भी तरस नहीं दिखाया गया।

लाचार था हिंदू समाज

कोलकाता का हिंदू समाज मुस्लिम लीग के गुंडों के सामने लाचार था और उसे न तो सरकार से मदद मिल रही थी, न पुलिस से। ऐसे में गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा हिंदुओं को बचाने के लिए सामने आए और बेबस हिंदुओं की रक्षा और मुस्लिम दंगाइयों से हिसाब करने का फैसला किया। उन्होंने और उनके साथियों ने मुस्लिम लीग और सुहरावर्दी की बिछाई बिसात को पलटते हुए हिंदुओं की रक्षा के साथ-साथ मुस्लिम लीग के गुंडों पर जमकर वार किया। गोपाल मुखर्जी के इस साहसिक कार्य की चर्चा पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश इतिहासकार और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर यासमीन खान ने अपनी पुस्तक ‘द ग्रेट पार्टीशन : मेकिंग ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान’ में किया है। वे लिखती हैं कि कोलकाता के कुछ बड़े बाहुबलियों की तरह गोपाल मुखर्जी की भी धाक थी और नौजवान उन्हें बहादुर और बाहुबली जैसे उपनामों से पुकारते थे। उन्होंने सैकड़ों दंगाइयों का सफाया किया था।

ब्रिटिश पत्रकार लियोनार्ड मोसले ने कोलकाता में हुए हिंदू नरसंहार का वर्णन अपनी मशहूर पुस्तक ‘द लास्ट डेज ऑफ ब्रिटिश राज’ में किया है। मोसले ने लिखा है कि छोटी लड़कियों और बड़ों को रेंग कर ऐसी जगह चलने पर मजबूर किया गया, जहां पहले से ही गाय तैयार रखी गई थी। उनके हाथ में छुरी पकड़ा दी गई और फिर उनसे जबरदस्ती गाय का गला कटवाया गया था। किसी भी हिंदू के लिए गो-हत्या सबसे घोर पाप था। वहीं एक बूढ़ी महिला को सड़क पर धक्का-मुक्की करने के बाद उसके सिर पर लाठी से वार कर उसे वहीं पर ढेर कर दिया गया था।

चुप रहे नेता

कोलकाता में हिंदुओं का नरसंहार होने के बावजूद दिल्ली में कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे थे। इन नेताओं की मानसिकता पर मोसले ने लिखा है कि यह उम्मीद की जा रही थी कि नेहरू और जिन्ना एक साथ कोलकाता का दौरा करेंगे और शांति का साझा संदेश देंगे। लेकिन दोनों के पास इस तरह के काम के लिए बिल्कुल फुर्सत नहीं थी।

जिन्ना कांग्रेस के खिलाफ मोर्चाबंदी में लगे थे, तो नेहरू अंतरिम सरकार की कैबिनेट चुनने में व्यस्त थे। दूसरी तरफ गांधी जी ने कोलकाता के हिंदुओं को संयम बरतने की सलाह दी थी। महात्मा गांधी ने अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘हरिजन’ में ‘जहर की काट’ शीर्षक से एक लेख लिखा था, जो 8 सितंबर, 1946 को प्रकाशित हुआ था।

इस लेख में उन्होंने 16 अगस्त, 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के दौरान कलकत्ता (कोलकाता) में हुए हिंदू नरसंहार के संदर्भ में लिखा था कि अगर कलकत्ता के सारे हिंदू अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए बहादुरी से मर-मिटते तो वे न केवल हिंदू धर्म को, बल्कि पूरे हिंदुस्तान को बचा लेते। इससे हिंदुस्तान में इस्लाम भी शुद्ध हो जाता। महात्मा गांधी का मानना था कि हिंसा का जवाब हिंसा या बदले से देने के बजाय, पीड़ितों को बिना हथियार उठाए अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए प्राण न्योछावर कर देने चाहिए, जिससे हिंसक भीड़ का हृदय परिवर्तन हो सके।

खैर, इस प्रकरण ने एक बार फिर से बता दिया है कि कांग्रेस और उसके समविचारी दल अभी भी मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए हिंदुओं की भावनाओं को कुचलने में देर नहीं करते हैं।

 

 

Topics: डायरेक्ट एक्शन डे‘मुस्लिम तुष्टीकरणपाञ्चजन्य विशेषपश्चिम बंगाल राजनीतिगोपाल मुखर्जी रोडगोपाल पाठाशुभेंदु अधिकारीमोहम्मद अली जिन्नामुस्लिम लीगतृणमूल
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

जल : संसाधन से संस्कार तक

वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर : राष्ट्रध्वज के स्वप्नद्रष्टा!

एक शरिया अदालत

निजी संस्था न्यायालय नहीं

:केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में 24 सितंबर 2026 को 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ  

जल की हर बूंद में भारत का भविष्य

भारत की पहली एलएनजी-डीजल द्वि-ईंधन डीईएमयू ट्रेन उद्घाटन यात्रा में साबरमती से मेहसाणा जंक्शन तक चली।

पटरी पर ऊर्जा परिवर्तन की नई रफ्तार

एशियाई खेल : सपनों से स्वर्णिम शिखर तक

Load More

ताज़ा समाचार

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य। साथ में हैं (बाएं से) कैप्टन उद्यम प्रियऋषप और डॉ. राजीव कुमार सिंह।

‘कम से कम सप्ताह में एक बार परिवार के साथ करें भोजन’

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री RSS के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्रीगुरुजी

एक आकस्मिक फोन कॉल, जब पीएमओ से श्रीगुरुजी को आया बुलावा

सोना-चांदी का ताजा भाव

Gold Silver Rate Today: सोना-चांदी खरीदने वालों की बल्ले-बल्ले, जानिए आज का ताजा भाव

प्रतीकात्मक तस्वीर

मिडिल ईस्ट का कोल्ड वॉर: यमन कैसे बना ईरान-सऊदी संघर्ष का केंद्र?

कल का पंचांग

कल का पंचांग: मंगलवार को जानें ग्रहों की स्थिति, लग्नारंभ समय और दिशाशूल

पुस्तक का लोकार्पण करते हुए (बाएं से) श्री मिलिंद ओक, डॉ. गौरी माहुलीकर और डॉ. अंजलि देशपांडे।

‘पाठ्यक्रम में शामिल हो विदुषी महिलाओं का इतिहास’

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा! नेपाल भागने की फिराक में थे 3 आरोपी, पुलिस ने ऐसे दबोचा

भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर सील

पाकिस्तान में हिंदुओं की 200 साल पुरानी विरासत पर संकट? रामलीला मंदिर को लेकर आखिर क्या हुआ?

प्रतीकात्मक तस्वीर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में क्या-क्या होता है? जानिए व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies