नई दिल्ली। भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच जमी हुई बर्फ को पिघलाने, आपसी संपर्क दोबारा शुरू करने और पूर्ण राजनयिक संबंधों को बहाल करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ की ओर से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को एक साझा खुला पत्र (Open Letter) लिखा गया है।
इस शांति प्रस्ताव वाले लेटर के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने बेहद कड़ा और दो टूक रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर पल रहे आतंकवादियों को प्रश्रय (शरण) देना बंद नहीं करता, तब तक किसी भी स्तर की बातचीत संभव नहीं है।
समझें भारत-पाक ‘ओपन लेटर’ और कूटनीतिक गतिरोध
गूगल डिस्कवर और पाठकों की त्वरित समझ के लिए इस शांति प्रस्ताव पत्र की रूपरेखा और इस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है-
| शांति प्रस्ताव एवं कूटनीतिक आयाम | आधिकारिक एवं राजनीतिक विवरण |
|---|---|
| पत्र भेजने वाली संस्था | सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस (Center for Peace and Progress) |
| कुल हस्ताक्षरकर्ता (Signatories) | 117 प्रमुख नागरिक (दोनों देशों से संयुक्त) |
| भारतीय हस्ताक्षरकर्ताओं की संख्या | 61 नेता व प्रबुद्ध नागरिक (डिजिटल हस्ताक्षर) |
| भारत के मुख्य चेहरे | फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा और हुमायूं कबीर। |
| सत्ताधारी बीजेपी का आधिकारिक स्टैंड | “आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।” |
“शांति के कबूतर उड़ाने की आदत है, इनका पाक-प्रेम बीच-बीच में जागता रहता है”
दोनों देशों के कुछ विशिष्ट नागरिकों द्वारा साझा तौर पर पत्र लिखे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि देश की नीति इस मामले पर पूरी तरह स्पष्ट है।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंचों से पहले ही यह बात साफ कर दी है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवादियों को वित्तीय व सामरिक शरण देता रहेगा, तब तक वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं है। भारत के कुछ लोगों का यह ‘पाकिस्तान प्रेम’ बीच-बीच में जागता रहता है। शांति के कबूतर उड़ाना इन लोगों की पुरानी आदत बन चुकी है, लेकिन वे सीमा पर शहीद होने वाले भारतीय जवानों के बलिदान और पाकिस्तान की नापाक हरकतों को भूल जाते हैं।” – प्रेम शुक्ला, राष्ट्रीय प्रवक्ता, BJP
दत्तात्रेय होसबाले जी के बयान पर भी शुक्ला ने रखा पक्ष
इस विवाद में उस समय एक नया मोड़ देखने को मिला जब हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने भारत-पाक संबंधों पर एक बयान दिया था। होसबाले ने कहा था कि भारत को ‘पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिएं।’ हालांकि, संघ नेता ने अपने बयान में यह भी मजबूती से जोड़ा था कि आतंकवाद के प्रति भारत के कड़े रुख में किसी भी प्रकार की नरमी या ढील नहीं बरती जानी चाहिए।
संघ पदाधिकारी के इस ‘पाकिस्तान से संवाद’ वाले संतुलित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रेम शुक्ला ने कहा, “संघ की बात में भी वही मूल भाव है। अगर पाकिस्तान ईमानदारी से आतंकवादियों का समर्थन करना और उन्हें फंड देना पूरी तरह बंद कर दे, तो द्विपक्षीय बातचीत स्वतः ही शुरू हो जाएगी। मूल समस्या पाकिस्तान का आतंकी रवैया है।”
खुले पत्र में की गई हैं ये मुख्य मांगें
डिजिटल फॉर्मेट में तैयार किए गए इस ओपन लेटर के जरिए भारत और पाकिस्तान के प्रबुद्ध वर्ग ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से मुख्य रूप से निम्नलिखित कूटनीतिक व सामाजिक कदम उठाने की अपील की है:
- राजनयिक संबंध बहाल हों: साल 2019 के बाद से दोनों देशों के बीच टूटे हुए पूर्ण राजनयिक संबंधों (Diplomatic Relations) को दोबारा से पटरी पर लाया जाए।
- पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट: दोनों देशों के आम नागरिकों, परिवारों और रिश्तेदारों के बीच आपसी संपर्क और आवाजाही को फिर से सुगम बनाया जाए।
- धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राएं: दोनों ओर स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों (धार्मिक कॉरिडोर) और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए विशेष वीजा नीतियां लागू की जाएं।
गौरतलब है कि उरी और पुलवामा हमलों के बाद से भारत ने पाकिस्तान के प्रति अत्यंत आक्रामक कूटनीति अपनाई है, जिसके तहत वित्तीय और खेल संबंधों सहित हर प्रकार की द्विपक्षीय वार्ता पर पूर्ण विराम लगा हुआ है। अब 117 दिग्गजों की इस नई पहल पर केंद्र सरकार का आधिकारिक विदेश मंत्रालय क्या रुख अपनाता है, इस पर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।

















