FRS विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का बयान: प्रदर्शन में 2,873 संदिग्धों की हुई पहचान, डेटा लीक के आरोप गलत
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FRS विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का बयान: प्रदर्शन में 2,873 संदिग्धों की हुई पहचान, डेटा लीक के आरोप गलत

जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में FRS के इस्तेमाल पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में सफाई दी है। पुलिस के मुताबिक 2,873 संदिग्धों की पहचान हुई है और आम छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 18, 2026, 01:21 pm IST
inभारत
Supreme Court

Supreme Court

हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक (FRS) के इस्तेमाल को लेकर काफी विवाद हुआ था। इस मामले में दाखिल याचिकाओं के जवाब में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने साफ किया है कि उनका मकसद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे छात्रों को निशाना बनाना कभी नहीं था। FRS का इस्तेमाल सिर्फ उन असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों की पहचान के लिए किया गया था, जिनका पुराना और गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है।

आम छात्रों को डरने की जरूरत नहीं

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की एसआईटी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि किसी भी आम छात्र या बिना क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। पुलिस की जांच केवल उन संदिग्धों तक सीमित है जिनका नाम पहले से संगीन जुर्मों की सूची में दर्ज है।

इसे भी पढ़ें: ईरान-ओमान बातचीत से बौखलाए ट्रंप ने दे डाली धमकी, कहा-‘बीच में आए तो बमबारी कर देंगे’

भीड़ में 2,873 संदिग्धों की हुई पहचान

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान FRS कैमरों के जरिए कुल 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका रिकॉर्ड खराब रहा है।

  • इनमें से 2,402 लोगों के नाम पुलिस के रिकॉर्ड में पहले से मौजूद थे।
  • 471 लोगों के डेटा का मिलान पुलिस डोजियर से हुआ।
  • पहचान में आए लोगों में से 92 लोग ऐसे हैं जिन पर 10 से अधिक केस दर्ज हैं, जबकि 47 घोषित हिस्ट्रीशीटर हैं।

अवैध निगरानी के आरोपों को किया खारिज

पुलिस पर आरोप लगाए जा रहे थे कि वह आम लोगों का बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा कर रही है, निजी आईडी का इस्तेमाल कर समन भेज रही है या डेटा किसी निजी कंपनी को बेच रही है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और बेबुनियाद बताया है।

कैसे काम करती है FRS तकनीक?

पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर के मुख्य एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर मोबाइल FRS यूनिट्स लगाई गई थीं। जब ये कैमरे भीड़ में मौजूद चेहरों को स्कैन करते हैं, तो उन्हें तुरंत पुलिस के सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस से मिलाया जाता है। इसमें सिर्फ गंभीर अपराधों के रिकॉर्ड होते हैं, न कि छोटे-मोटे ट्रैफिक चालान जैसे मामले। अगर कोई वॉन्टेड अपराधी या हिस्ट्रीशीटर दिखता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देता है।

Topics: जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनदिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट जवाबFRS विवाद दिल्लीफेशियल रिकॉग्निशन तकनीक
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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